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राहुल गांधी और बजाज की वार्ता पर भाजपा ने कहा, कोरोना के विशेषज्ञ नहीं हैं बजाज ऑटो के एमडी

Thu, 04 Jun 2020 07:49 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 04 Jun 2020 07:49 PM IST
सार

कांग्रेस नेता राहुल गांधी और बजाज ऑटो के प्रबंध निदेशक राजीव बजाज की वार्ता के दौरान बजाज ने भारत में लागू किए गए लॉकडाउन के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए। अब भाजपा ने इसे लेकर कहा है कि केंद्र सरकार ने लॉकडाउन इसलिए लगाया था कि कोरोना वायरस के प्रसार को बड़े स्तर तक पहुंचने से रोका जा सके। 
सरकार की यह प्राथमिकता थी कि लोगों की जान बचाई जाए और इस महामारी से निपटने के लिए स्वास्थ्य इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाए। 

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BJP says that Bajaj Auto MD Rajiv Bajaj is no Covid-19 expert, government used lockdown to boost health infrastructure
बजाज ऑटो के एमडी राजीव बजाज - फोटो : यूट्यूब स्क्रीनशॉट

विस्तार

उद्योगपति राजीव बजाज ने पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर हुई इस बातचीत के दौरान वैश्विक महामारी के इस दौर में भारत सरकार के तौर-तरीकों की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि इससे देश की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ा है। भाजपा ने इस पर कहा है कि वह (राहुल बजाज) स्वास्थ्य संकट के कोई विशेषज्ञ नहीं हैं। 

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आर्थिक मामलों पर भाजपा के प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि राहुल गांधी ने पूरी वार्ता के दौरान बजाज का इस्तेमाल एक बाउंसिंग बॉल की तरह किया। इस दौरान बजाज के विचारों के आधार पर अधिकतर समय विपक्षी नेता ही बोलते रहे। उन्होंने कहा, 'सबको अपना पक्ष रखने का अधिकार है लेकिन राजीव बजाज कोविड-19 के विशेषज्ञ नहीं हैं और न ही वह इस बात के विशेषज्ञ हैं कि इस आपदा से कैसे निपटा जाए।'
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वहीं, भाजपा के अमित मालवीय का कहना है कि बजाज ने स्वडन की रणनीति का जिक्र किया जहां महामारी से निपटने ले किए लॉकडाउन न लगाने का फैसला किया गया था। मालवीय ने कहा कि खुद स्वीडन के मुख्य महामारी विशेषज्ञ ने यह स्वीकार किया था कि यह रणनीति एक गलती थी, जिससे देश में कोरोना संक्रमण और तेजी से फैला और लोगों की मौत हुई। 
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गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि कई देश महामारी से निपटने में असफल हुए हैं और इसका कोई एक निश्चित पैटर्न नहीं है। उन्होंने कहा कि सब लोग इस बात को अच्छे से जानते हैं कि लॉकडाउन कोरोना वायरस का इलाज नहीं है। लॉकडाउन ने देश की कमजोर स्वास्थ्य व्यवस्था को सही करने का समय दिया। उन्होंने कहा कि 25 मार्च को जब लॉकडाउन शुरू हुआ था तब भारत की पीपीई किट और मास्क उत्पादन क्षमता लगभग न के बराबर थी। 


अग्रवाल ने कहा, 'अब इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया गया है। महामारी की गंभीरता के चलते अर्थव्यवस्था का नीचे जाना तय था भले ही लॉकडाउन न लगाया जाता। सरकार के पास दो विकल्प थे, पहले में महामारी से मृतकों की संख्या बढ़ने दी जाती या अर्थव्यवस्था को नीचे जाने दिया जाता। सरकार ने लोगों को चुना। सरकार की प्राथमिकता लोगों का जीवन है।'

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