संबित पात्रा का बनर्जी पर तंज, बोले- अब तो प्रशांत किशोर ने भी दीदी का साथ छोड़ दिया
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चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उर्फ पीके को पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह द्वारा प्रधान सलाहकार नियुक्त किए जाने पर भाजपा ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष ममता बनर्जी पर तंज कसा। भाजपा नेता संबित पात्रा ने एक कार्यक्रम के दौरान कहा कि अब तो उन्होंने ( प्रशांत किशोर ने) भी 'दीदी' का साथ छोड़ दिया है।
भाजपा मुख्यालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान एक सवाल के जवाब में पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, 'प्रशांत ने भी दीदी का साथ छोड़ दिया है। इससे पहले कि चुनाव के नतीजे घोषित हों, दीदी के सबसे बड़े सलाहकार घर छोड़कर दूसरे के घर जा रहे हैं।' ज्ञात हो कि प्रशांत किशोर बंगाल की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख रणनीतिकार के रूप में काम कर रहे हैं।
अमरिंदर सिंह ने सोमवार को खुद यह घोषणा की थी कि प्रशांत किशोर को उनका प्रधान सलाहाकार नियुक्त किया गया है। पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से आठ चरणों में विधानसभा चुनाव होने हैं। हाल के वर्षों में वह कई विधानसभा चुनावों में भाजपा-विरोधी दलों के लिए काम कर चुके हैं। किशोर ने वर्ष 2014 के आम चुनाव में नरेंद्र मोदी के अभियान की कमान संभाली थी।
पात्रा ने कहा कि प्रशांत किशोर का अमरिंदर सिंह के साथ जाना अपने आप में बहुत कुछ कहता है। उन्होंने कहा, 'अमित शाह (केंद्रीय गृह मंत्री) और जे पी नड्डा (भाजपा अध्यक्ष) हर बार कहते हैं कि बंगाल में भाजपा की सीटें 200 के पार होंगी। आज हर कोई इस बात को स्वीकार करता है और जो तथाकथित राजनीतिक सलाहकार है वह भी इस बात से अच्छी तरह से अवगत हैं।'
यह नियुक्ति काफी महत्व रखती है क्योंकि अगले साल की शुरुआत में पंजाब में विधानसभा चुनाव होने हैं। किशोर की कंपनी, इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी बंगाल के आगामी चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की सहायता कर रही है। किशोर ने 2017 के पंजाब चुनाव में कांग्रेस के अभियान को भी संभाला था जब पार्टी 117 सदस्यीय सदन में 77 सीटें जीत सत्ता में पहुंची थी।
'आजाद जैसे वरिष्ठ नेता को कांग्रेस की ओर से निशाना बनाया जाना दुखद'
पात्रा ने कहा कि कांग्रेस हर उस व्यक्ति को निशाना बनाएगी जो पार्टी के अंदर लोकतंत्र की बात करेगा, अध्यक्ष पद का चुनाव चाहेगा, विकास की राजनीति का समर्थन करेगा या फिर प्रधानमंत्री के सही एजेंडे के साथ खड़ा होगा। उन्होंने कहा कि भाजपा और कांग्रेस के बीच बुनियादी अंतर है कि कांग्रेस में परिवार ही पार्टी है और भाजपा के लिए पार्टी ही परिवार है।
पात्रा ने कांग्रेस के जी-23 नेताओं द्वारा पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में बदलाव की वकालत को उसका अंदरूनी मामला बताया। उन्होंने कहा, ‘दुख की बात है कि गुलाम नबी आजाद जैसे वरिष्ठ नेता और अन्य नेता देश के बारे में बोलते हैं, देश के विकास के बारे में बोलते हैं, सही बोलते हैं तो उनकी अपनी ही पार्टी के लोग उनको अलग करने में लग जाते हैं।’
पात्रा ने कहा कि जो व्यक्ति इतने लंबे समय तक अपनी पार्टी के साथ खड़े रहा आज उनकी पार्टी ही उन्हें निशाना बना रही है। ज्ञात हो कि जम्मू में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आजाद का आज पुतला फूंका और उन पर अपने निजी हितों की खातिर पार्टी को कमजोर करने के लिए भाजपा के इशारे पर कांग्रेस के खिलाफ षड्यंत्र रचने का आरोप लगाया।
पात्रा ने कहा कि आजाद के खिलाफ जो सड़कों पर प्रदर्शन हो रहा है उसका कारण कांग्रेस के भीतर असहिष्णुता की राजनीति है। उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस में सहिष्णुता नहीं है। वह एक असहिष्णु पार्टी के रूप में उभरी है।’ उन्होंने कहा कि इनका एकमात्र एजेंडा मोदी से ‘‘घृणा’’ करना है।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा और उनके पति रॉबर्ट वाड्रा का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब चार नेताओं तक ही सीमित रह गई है। राहुल गांधी को ‘खाली मिसाइल’ करार देते हुए भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ता अपने ही उन नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं जिन्होंने मोदी के अच्छे कार्यों की सराहना की।
'कांग्रेस का न कोई ईमान और न विचारधारा'
भाजपा नेता ने पश्चिम बंगाल में मुस्लिम धर्मगुरु अब्बास सिद्दिकी के नेतृत्व वाले इंडियन सेक्युलर फ्रंट (आईएसएफ) के साथ गठबंधन को लेकर भी कांग्रेस पर निशाना साधा और कहा कि विपक्षी दल का न कोई ईमान है और न कोई विचारधारा। भाजपा ने गठबधंन को लेकर कांग्रेस में मचे घमासान पर चुटकी भी ली और दावा किया कि वह चाहे कितने भी गठबंधन कर ले उसका डूब चुका जहाज अब बचने वाला नहीं है।
पात्रा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस का न कोई ईमान है और न ही विचारधारा बल्कि भ्रष्टाचार, परिवारवाद और जाति तथा धर्म के नाम पर लोगों को बांटना ही उसकी विचारधारा है। पात्रा ने कहा कि आज कांग्रेस अपनी प्रासंगिकता को बनाए रखने के लिए गठबंधन पर निर्भर है और ठीक ऐसे ही एक गठबंधन की प्रक्रिया कांग्रेस पार्टी बंगाल में कर रही है।
उन्होंने कहा, ‘जो कांग्रेस अपने को धर्मनरिपेक्ष बताती है, वही कांग्रेस बंगाल में आईएसएफ के साथ गठबंधन करती है। केरल में मुस्लिम लीग के साथ गठबंधन करती है, जमात-ए-इस्लामी के अग्रिम संगठन के साथ गठबंधन करती है। असम में बदरुद्दीन अजमल की पार्टी एआईयूडीएफ के साथ गठबंधन करती है। और महाराष्ट्र में शिव सेना के साथ उसने हाथ मिला रखा है।’
भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि ये गठबंधन केवल इसलिए किये कि किसी प्रकार गांधी परिवार अपनी राजनीतिक प्रासंगिकता बनाएं रखें। उन्होंने कहा कि आईएसफ के साथ गठबंधन करने को लेकर कांग्रेस के अंदर ही घमासान मचा हुआ है और विपक्षी पार्टी के नेता ही सवाल उठा रहे हैं कि क्या यही महात्मा गांधी वाली धर्मनरिपेक्षता है।
पात्रा ने कहा, ‘पराकाष्ठा देखिए। बंगाल में वामपंथी दलों के साथ लड़ेंगे और केरल में खिलाफ लड़ेंगे। ये कैसी विडंबना है। इनका उद्देश्य केवल एक है। किसी भी प्रकार, किसी का भी साथ लेकर सत्ता हासिल करना।’ ज्ञात हो कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने पश्चिम बंगाल में आईएसएफ के साथ पार्टी के गठजोड़ की आलोचना करते हुए सोमवार को कहा था कि यह पार्टी की मूल विचारधारा तथा गांधीवादी और नेहरूवादी धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ है।