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रूठे साथियों को मनाने में जुटी भाजपा, मातोश्री में उद्धव ठाकरे से मिलेंगे अमित शाह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Updated Tue, 05 Jun 2018 10:00 AM IST
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amit shah-Uddhav Thackeray (file photo)
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उपचुनावों में लगातार अपनी महत्वपूर्ण सीटें गंवा चुकी भारतीय जनता पार्टी आगामी आम चुनाव के लिए 'संपर्क फॉर समर्थन' अभियान शुरू कर रही है। 2019 के लोकसभा चुनाव के मद्देनजर अपने रूठे साथियों को मनाने का जिम्मा संभाला है खुद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने।
इसी कड़ी में बुधवार शाम अमित शाह अपने पुराने और भाजपा से लंबे समय से नाराज चल रहे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मातोश्री में मुलाकात करेंगे। पिछले दिनों हुए उपचुनाव भाजपा के लिए खुशखबरी नहीं लाया है। लेकिन महाराष्ट्र की पालघर सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा जमाया था, इस चुनाव में शिवसेना-भाजपा एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी थी। वैसे इस चुनाव के बाद दोनों नेताओं की ये पहली मुलाकात है।
सोमवार को बिहार में जिस तरह से आमचुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर जदयू और भाजपा के समीकरण बिगड़े और भाजपा को जदयू की शर्तें माननी पड़ी उससे यह प्रतीत होने लगा है कि महागठबंधन की आंच भाजपा को लगने लगी है।
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पिछले साल हुए अपने महासम्मेलन में शिवसेना ने भाजपा से अलग होकर आम चुनावों में अकेले लड़ने की घोषणा कर दी थी। पिछले काफी समय से शिवसेना और भाजपा के संबंध कुछ ठीक नहीं रहे हैं, लगातार शिवसेना के नेताओं ने भाजपा और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोलते रहे हैं। ऐसे में अब जब 2019 के आने में महज 6 महीने रह गए हैं अमित शाह ने एकबार फिर से अपने नाराज साथियों को फिर से मनाने की कवायद शुरू कर दी है।
48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन 2014 में 42 सीटें जीत कर आया था। ऐसे में भाजपा बिल्कुल नहीं चाहेगी कि उसका कोई मजबूत साथी उससे दूर हो और सीटों में उसे नुकसान उठाना पड़े।
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इसी कड़ी में बुधवार शाम अमित शाह अपने पुराने और भाजपा से लंबे समय से नाराज चल रहे शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से मातोश्री में मुलाकात करेंगे। पिछले दिनों हुए उपचुनाव भाजपा के लिए खुशखबरी नहीं लाया है। लेकिन महाराष्ट्र की पालघर सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा जमाया था, इस चुनाव में शिवसेना-भाजपा एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में उतरी थी। वैसे इस चुनाव के बाद दोनों नेताओं की ये पहली मुलाकात है।
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सोमवार को बिहार में जिस तरह से आमचुनावों में टिकट बंटवारे को लेकर जदयू और भाजपा के समीकरण बिगड़े और भाजपा को जदयू की शर्तें माननी पड़ी उससे यह प्रतीत होने लगा है कि महागठबंधन की आंच भाजपा को लगने लगी है।
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पिछले साल हुए अपने महासम्मेलन में शिवसेना ने भाजपा से अलग होकर आम चुनावों में अकेले लड़ने की घोषणा कर दी थी। पिछले काफी समय से शिवसेना और भाजपा के संबंध कुछ ठीक नहीं रहे हैं, लगातार शिवसेना के नेताओं ने भाजपा और मोदी सरकार पर जमकर हमला बोलते रहे हैं। ऐसे में अब जब 2019 के आने में महज 6 महीने रह गए हैं अमित शाह ने एकबार फिर से अपने नाराज साथियों को फिर से मनाने की कवायद शुरू कर दी है।
48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में भाजपा-शिवसेना का गठबंधन 2014 में 42 सीटें जीत कर आया था। ऐसे में भाजपा बिल्कुल नहीं चाहेगी कि उसका कोई मजबूत साथी उससे दूर हो और सीटों में उसे नुकसान उठाना पड़े।
BJP President Amit Shah to meet Shiv Sena's Uddhav Thackeray at the latter's residence in Mumbai at 6 pm tomorrow, as a part of BJP's 'Sampark for Samarthan' #Maharashtra (File pics) pic.twitter.com/mO0QjAYhGo
— ANI (@ANI) June 5, 2018
48 लोकसभा सीटों वाले महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना का गठबंधन 2014 में 42 सीटें जीत कर आया था। ऐसे में बीजेपी बिल्कुल नहीं चाहेगी कि उसका कोई मजबूत साथी उससे दूर हो और सीटों में उसे नुकसान उठाना पड़े।
हाल ही में हुए पालघर उपचुनाव के दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तीखे शब्दों का प्रयोग कर अपनी पार्टी से दूरी का इजहार किया था। यहां तक कि उद्धव ने बीजेपी को चुनौती देते हुए और विपक्ष को इशारों- इशारों में एकजुट होने की सलाह तक दे डाली थी। उन्होंने कहा था कि अगर विपक्ष एक नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में बीजेपी को हराना काफी मुश्किल हो जाएगा।
उपचुनावों में लगातार हार का सामना कर रही है बीजेपी के सामने अपने सहयोगियों को भी साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती बन चुकी है। शिवसेना के बाद बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू, रामविलास पासवान समेत अन्य पार्टियों ने भी कई ऐसे बयान दिए हैं जो पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।
हाल ही में हुए पालघर उपचुनाव के दौरान शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ तीखे शब्दों का प्रयोग कर अपनी पार्टी से दूरी का इजहार किया था। यहां तक कि उद्धव ने बीजेपी को चुनौती देते हुए और विपक्ष को इशारों- इशारों में एकजुट होने की सलाह तक दे डाली थी। उन्होंने कहा था कि अगर विपक्ष एक नहीं हुआ तो आगामी चुनावों में बीजेपी को हराना काफी मुश्किल हो जाएगा।
उपचुनावों में लगातार हार का सामना कर रही है बीजेपी के सामने अपने सहयोगियों को भी साथ लेकर चलना बड़ी चुनौती बन चुकी है। शिवसेना के बाद बिहार में नीतीश कुमार की जेडीयू, रामविलास पासवान समेत अन्य पार्टियों ने भी कई ऐसे बयान दिए हैं जो पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकते हैं।