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यूपीए-1 से सबक लेगी बीजेपी, किसानों के लिए हो सकता है बड़ी योजना का एलान

Sun, 10 Jun 2018 05:55 PM IST
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली
हरेन्द्र, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 10 Jun 2018 05:55 PM IST
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BJP planning for agriculture debt relief package like upa ahead of 2019 lok sabha elections

बीजेपी राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ राज्यों में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबटने के लिए यूपीए-1 की कल्याणकारी योजनाओं से मदद लेने की योजना बना रही है। साथ ही पार्टी ने बीजेपी शासित राज्यों से कहा है कि चुनावों से पहले केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा से लाभान्वितों तक पहुंचाया जाए।

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बीजेपी और आरएसएस की अहम बैठक  

मोदी सरकार के चार साल पूरे होने पर चलाया जा रहा बीजेपी का 'संपर्क से समर्थन' अभियान 11 जून को समाप्त हो रहा है। जिसके बाद पार्टी 2019 की तैयारियों में जुट जाएगी। 2019 में होने वाले आम चुनावों में एकजुट विपक्ष की संभावित चुनावी चुनौतियों के आंकलन के लिए शनिवार को बीजेपी और आरएसएस नेताओं की एक अहम बैठक हुई। 
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गृह मंत्री राजनाथ सिंह के आवास पर आयोजित इस बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और आरएसएस के सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल के अलावा विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, महामंत्री रामलाल और पार्टी के उपाध्यक्ष वी सतीश ने हिस्सा लिया। 
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एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबटने पर जोर

पार्टी सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्री के यहां बैठक आयोजित करने का मकसद था कि राजनाथ के पार्टी अध्यक्ष रहने के दौरान ही बीजेपी ने राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में जीत हासिल की थी। लेकिन इस बार पार्टी की चिंता इन तीनों राज्यों में एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबटने की है। पार्टी लीडरशिप को फिक्र है कि एंटी इनकंबेंसी फैक्टर से निबटने के लिए क्या कारगर रणनीति बनाई जाए। 

सूत्रों के मुताबिक एंटी इनकंबेंसी फैक्टर की चुनौतियों से निबटने के लिए पार्टी नेतृत्व ने इन राज्यों में सामाजिक कल्याण मंत्रालय की रिपोर्टों की मदद से कल्याणकारी योजनाओं को इन राज्यों में प्रभावशाली ढंग से पहुंच बनाने की रणनीति पर जोर दिया। 

लोकप्रियतावाद और कल्याणवाद बनेंगे जीत का मंत्र 

BJP planning for agriculture debt relief package like upa ahead of 2019 lok sabha elections

पार्टी सूत्रों के आगामी लोकसभा चुनावों को लेकर एकजुट हो रहे विपक्ष को पटखनी देने के लिए पार्टी लोकप्रियतावाद और कल्याणवाद को जीत का मंत्र बना सकती है। वहीं बैठक में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने बीजेपी शासित इन राज्यों से केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं के लाभान्वितों की संख्या बढ़ाने के लिए कहा है। वहीं पार्टी यूपीए-1 शासन के दौरान दिए गए कृषि ऋण माफी योजना को भी जीत की नजर से देख रही है। 

आ सकती है ऋणमाफी योजना

सूत्रों का कहना है कि साल 2008 में यूपीए-1 के शासन काल के दौरान 63 हजार करोड़ रुपयों की कृषि ऋण माफी योजना ने अगले चुनावों में कांग्रेस के लिए जीत के दरवाजे खोल दिए दिए थे और कांग्रेस अकेले उत्तर प्रदेश में ही 21 सीटें जीतने में कामयाब हुई थी। वहीं अब पार्टी भी 1 लाख रुपए तक की कृषि ऋण माफी योजना की संभावना पर विचार कर रही है।

पार्टी की योजना है कि कृषि ऋण माफी योजना से किसान बहुल यूपी, एमपी, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, पंजाब, हरियाणा और बिहार की तकरीबन 300 लोकसभा सीटों को जीत में बदला जा सकता है। 

केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं पर फोकस

पार्टी सूत्रों के कहना है कि मोदी सरकार के कामकाज को तीन चरणों में सुधार, आधारभूत ढांचे का विकास और जनहित कार्यों में विभाजित किया जा सकता है। वहीं विपक्ष जाति के आधार पर राजनीतिक दलों को एकजुट करने की कोशिशों में जुटा है। 

सूत्रों के मुताबिक पार्टी की योजना है कि चुनावों से पहले केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचा कर लाभान्वितों की संख्या बढ़ा कर जाति आधारित राजनीतिक को कड़ी टक्कर दी जा सकती है।

बढ़ाई जाए लाभान्वितों की संख्या

BJP planning for agriculture debt relief package like upa ahead of 2019 lok sabha elections

सूत्रों का कहना है कि अमित शाह ने बीजेपी शासित राज्यों से कहा है कि केन्द्र की कल्याणकारी योजनाओं को ज्यादा से ज्यादा से लाभन्वितों तक पहुंचाया जाए। केन्द्र की मुद्रा स्कीम, उज्जवला योजना, सौभाग्या योजना, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, जन औषधि जैसी योजनाओं के लाभान्वितों की संख्या बढ़ा कर बीजेपी शासित इन राज्यों में ज्यादा सीटें हासिल की जा सकती हैं। 

एनडीए के एकजुट रहने पर जोर

सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में शाह ने शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे और अकाली दल के नेताओं से एनडीए के भविष्य को लेकर हुई चर्चा के बारे में जानकारी दी। वहीं इस बैठक में बिहार में जेडीयू नेताओं के साथ सीटों के बंटवारे को लेकर मचे बवाल और बिहार में एनडीए के चेहरे को लेकर चल रही अटकलों पर भी बातचीत हुई। 

सूत्रों के मुताबिक बैठक में नेताओं ने एनडीए के एकजुट रहने पर जोर दिया, ताकि 2019 में एकजुट विपक्ष से मिलने वाली भावी चुनौतियों का सामना किया जा सके।  

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