{"_id":"60f9aabe8ebc3efbe37e8f46","slug":"bjp-mps-submit-memorandum-to-union-minister-demanding-inquiry-into-irregularities-in-pmgkay-implementation","type":"story","status":"publish","title_hn":"ओडिशा: पीएम मोदी की इस योजना में गड़बड़ी, भाजपा सांसदों ने केंद्रीय मंत्री से की जांच की मांग","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
ओडिशा: पीएम मोदी की इस योजना में गड़बड़ी, भाजपा सांसदों ने केंद्रीय मंत्री से की जांच की मांग
Thu, 22 Jul 2021 10:58 PM IST
संजीव कुमार झा
पीटीआई, भुवनेश्वर
पीटीआई, भुवनेश्वर
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Thu, 22 Jul 2021 10:58 PM IST
सार
इस मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अश्विनी वैष्णव सहित भाजपा सांसदों ने नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा।
विज्ञापन
प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना
- फोटो : social media
विस्तार
ओडिशा के भारतीय जनता पार्टी के सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने गुरुवार को केंद्र से राज्य में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं की जांच करने का आग्रह किया। केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और अश्विनी वैष्णव सहित भाजपा सांसदों ने नई दिल्ली में केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री पीयूष गोयल को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें केंद्र सरकार को सुधार के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के लिए राज्य सरकार को निर्देश जारी करने का आग्रह किया।
विज्ञापन
सांसदों ने आरोप लगाया कि केंद्र द्वारा किए गए आवंटन और पीएमजीकेएवाई और एनएफएसए के तहत राज्य में खाद्यान्न के वितरण के बीच काफी विसंगतियां हैं। ओडिशा सरकार द्वारा तैयार एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) राशन कार्डधारकों की सूची में मृत लोगों की उपस्थिति को भी दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पीएमजीकेएवाई योजना के तहत, ओडिशा में 92.83 लाख एनएफएसए कार्डधारकों में से, मई में 87.39 लाख लाभार्थियों और जून में 88.23 लाख लाभार्थियों को मुफ्त खाद्यान्न वितरित किया गया था। इसी तरह एनएफएसए योजना के तहत मई में 88.76 लाख और जून में 88.72 लाख लाभार्थियों को खाद्यान्न वितरित किया गया था।
विज्ञापन
इन आंकड़ों में विसंगतियां न केवल राज्य स्तर पर अनियमितताओं की ओर इशारा करती हैं, बल्कि मृत लाभार्थियों के नाम दर्ज होने की ओर इशारा करती है। सांसदों ने कहा कि गरीबों और जरूरतमंदों की कीमत पर खुले बाजार में राशन की तस्करी की मीडिया में खबरें आई हैं, जिससे लोग भूखे मर रहे हैं।
विज्ञापन