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ऑपरेशन ब्लू स्टार: निशिकांत दुबे का दावा, इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर पर किया था हमला

Mon, 07 Jul 2025 12:16 PM IST
राहुल कुमार आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: राहुल कुमार Updated Mon, 07 Jul 2025 12:16 PM IST
सार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने दावा किया है कि 1984 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर पर हमला किया था। इसके साथ ही एक्स पर उन्होंने एक दस्तावेज भी साझा किया है। 

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bjp mp Nishikant Dubey claims Indira Gandhi attacked Golden Temple in collaboration with Britain
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे - फोटो : ANI

विस्तार

भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने 1984 के स्वर्ण मंदिर हमले को लेकर सनसनीखेज दावा किया है। उन्होंने कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ब्रिटेन के साथ मिलकर स्वर्ण मंदिर पर हमला किया था। दुबे ने कांग्रेस पर हमला बोलते हुए कहा कि  कांग्रेस के लिए सिख समुदाय सिर्फ खिलौना है। सिखों के कत्लेआम को छुपाने के लिए 2004 में मनमोहन सिंह को "कठपुतली प्रधानमंत्री" बनाया गया।

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रिपोर्ट शेयर कर किया दावा
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने एक्स अकाउंट पर गृह सचिव की एक कथित रिपोर्ट का हवाला देते हुए लिखा,1984 में स्वर्ण मंदिर पर इंदिरा गांधी जी ने आक्रमण ब्रिटेन के साथ मिलकर किया, ब्रिटेन की सेना के अधिकारी उस वक्त अमृतसर में मौजूद थे। कांग्रेस के लिए सिख समुदाय केवल खिलौना मात्र है
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उन्होंने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान से 1960 में करतारपुर साहिब समझौता सरदार स्वर्ण सिंह जी ने किया। स्वर्ण मंदिर पर 1984 के आक्रमण और निर्दोष श्रद्धालुओं को मारने के समय ज्ञानी जैल सिंह जी को राष्ट्रपति बनाया। 1984 के सिखों के कत्लेआम को छुपाने तथा वरिष्ठ नेताओं एच के एल भगत, जगदीश टाइटलर, सज्जन कुमार को बचाने के लिए 2004 में मनमोहन सिंह जी को कठपुतली प्रधानमंत्री बनाया गया। कांग्रेस की देश को बेचने और विदेशियों के सामने सरेंडर की कहानी जारी है।
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भाजपा ने गृह सचिव की एक कथित गोपनीय चिट्ठी साझा की, जिसमें दावा किया गया है कि भारतीय अधिकारियों ने स्वर्ण मंदिर से सिख चरमपंथियों को हटाने के लिए ब्रिटेन से सलाह मांगी थी। ये खत विदेश एवं राष्ट्रमंडल कार्यालय के निजी सचिव ब्रायन फॉल ने तत्कालीन गृह सचिव के निजी सचिव ह्यूग टेलर को लिखा था।
 

इस खत के जरिए निशिकांत ने अपने दावे को पुख्ता किया है। इसमें लिखा है, विदेश सचिव ने इस अनुरोध पर सहमति दी और ब्रिटिश प्रधानमंत्री की मंजूरी से एक शिरोमणि अकाली दल के अधिकारी ने भारत का दौरा किया। इस अधिकारी ने एक योजना बनाई, जिसे इंदिरा गांधी ने मंजूरी दी। योजना को जल्द लागू करने की संभावना थी।

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इसमें कहा गया है कि स्वर्ण मंदिर में इस कार्रवाई से पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा भड़क सकती थी, जिससे भारत और ब्रिटेन में सिख समुदाय के बीच तनाव बढ़ने का खतरा था, खासकर अगर ब्रिटिश विशेष बल (एसएएस) की भूमिका उजागर हो जाती। इसलिए, इस जानकारी को भारत और लंदन में गोपनीय रखा गया। विदेश सचिव ने इसे सीमित लोगों तक रखने की सलाह दी थी। इस पत्र की प्रति नंबर 10 डाउनिंग स्ट्रीट, रक्षा मंत्रालय और कैबिनेट कार्यालय को भेजी गई थी।

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