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BJP in Lok Sabha Election: भाजपा के दिल में अयोध्या का 'दर्द' अब भी है, नेता चले भगवान जगन्नाथ की शरण में
सार
प्रधानमंत्री अपने संबोधन में किस आराध्य को स्थान देंगे, यह उनका विशेषाधिकार है, लेकिन समझा जा रहा है कि ओडिशा में भाजपा को मिले जन समर्थन ने प्रधानमंत्री के हृदय के अंत: स्थल में महाप्रभु के आशीर्वाद को जागृत कर दिया है। हालांकि, भाजपा की अयोध्या में हार पर समाजवादी पार्टी लगातार चुटकी ले रही है।
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पीएम मोदी
- फोटो : PTI
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विस्तार
लोकसभा चुनाव 2024 का नतीजा 4 जून को आया। कार्यवाहक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तब से दो बड़े संबोधन दिए। मंगलवार 5 जून और शुक्रवार 7 जून को। उन्होंने भाजपा के नेताओं को संबोधित किया। फिर एनडीए के नेताओं के समक्ष पुराने संसद भवन के केन्द्रीय कक्ष में विचार रखे। प्रधानमंत्री ने तीन बार महाप्रभु जगन्नाथ को याद किया, लेकिन भाषण में अयोध्या में इसी साल भव्य मंदिर में आए भगवान श्रीराम का जिक्र नहीं था। लगता है कि कहीं न कहीं अयोध्या और उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीट पर आए चुनाव नतीजे भाजपा को साल रहे हैं।
प्रधानमंत्री अपने संबोधन में किस आराध्य को स्थान देंगे, यह उनका विशेषाधिकार है, लेकिन समझा जा रहा है कि ओडिशा में भाजपा को मिले जन समर्थन ने प्रधानमंत्री के हृदय के अंत: स्थल में महाप्रभु के आशीर्वाद को जागृत कर दिया है। हालांकि, भाजपा की अयोध्या में हार पर समाजवादी पार्टी लगातार चुटकी ले रही है। कांग्रेस के नेता भी भाजपा पर कटाक्ष कर रहे हैं। संसद भवन परिसर में भी अयोध्या के लेकर कौतूहल, सवाल सब थे। इस बारे में भाजपा के एक केन्द्रीय नेता ने कहा कि मीडिया हर स्थान पर नकारात्मक पहले सोचती है। क्या महाप्रभु जगन्नाथ को प्रधानमंत्री नहीं याद कर सकते?
सोशल मीडिया पर अयोध्या लगातार ट्रेंड कर रहा
चुनाव नतीजे आने के बाद से सबसे अधिक चर्चा में अयोध्या है। यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में स्थान पा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लगातार ट्रेंड कर रहा है। भाजपा की विचारधारा से इत्तेफाक रखने वाले तमाम लोग अयोध्यावासियों को भाजपा उम्मीदवार को हरा देने के लिए कोस रहे हैं। बृज शर्मा कहते हैं कि जिस अयोध्या में भगवान राम का इतना भव्य मंदिर बना है, रामलला की अद्भुत मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई है और अयोध्या में विश्वस्तरीय सुविधाओं, सड़कों, होटल, विश्रामालयों ने आकार लिया है, उस पर क्या कहें?
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गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से भाजपा ने 80 के दशक में नाता जोड़ा था। इस बार वहां भाजपा प्रत्याशी की हार हुई। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 70 पार करने के सपने से भी भाजपा काफी दूर रही। वह केवल 33 सीट पर जीत सकी। 37 सीट समाजवादी पार्टी जीती और छह सीटें कांग्रेस को मिलीं। भाजपा के सहयोगी दलों में दो सीट राष्ट्रीय लोकदल को और एक सीट अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) को मिल सकी है।
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प्रधानमंत्री अपने संबोधन में किस आराध्य को स्थान देंगे, यह उनका विशेषाधिकार है, लेकिन समझा जा रहा है कि ओडिशा में भाजपा को मिले जन समर्थन ने प्रधानमंत्री के हृदय के अंत: स्थल में महाप्रभु के आशीर्वाद को जागृत कर दिया है। हालांकि, भाजपा की अयोध्या में हार पर समाजवादी पार्टी लगातार चुटकी ले रही है। कांग्रेस के नेता भी भाजपा पर कटाक्ष कर रहे हैं। संसद भवन परिसर में भी अयोध्या के लेकर कौतूहल, सवाल सब थे। इस बारे में भाजपा के एक केन्द्रीय नेता ने कहा कि मीडिया हर स्थान पर नकारात्मक पहले सोचती है। क्या महाप्रभु जगन्नाथ को प्रधानमंत्री नहीं याद कर सकते?
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सोशल मीडिया पर अयोध्या लगातार ट्रेंड कर रहा
चुनाव नतीजे आने के बाद से सबसे अधिक चर्चा में अयोध्या है। यह अंतरराष्ट्रीय मीडिया में स्थान पा रहा है। सोशल मीडिया पर भी लगातार ट्रेंड कर रहा है। भाजपा की विचारधारा से इत्तेफाक रखने वाले तमाम लोग अयोध्यावासियों को भाजपा उम्मीदवार को हरा देने के लिए कोस रहे हैं। बृज शर्मा कहते हैं कि जिस अयोध्या में भगवान राम का इतना भव्य मंदिर बना है, रामलला की अद्भुत मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा हुई है और अयोध्या में विश्वस्तरीय सुविधाओं, सड़कों, होटल, विश्रामालयों ने आकार लिया है, उस पर क्या कहें?
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गौरतलब है कि अयोध्या में राम मंदिर आंदोलन से भाजपा ने 80 के दशक में नाता जोड़ा था। इस बार वहां भाजपा प्रत्याशी की हार हुई। इतना ही नहीं, उत्तर प्रदेश की 80 सीटों में 70 पार करने के सपने से भी भाजपा काफी दूर रही। वह केवल 33 सीट पर जीत सकी। 37 सीट समाजवादी पार्टी जीती और छह सीटें कांग्रेस को मिलीं। भाजपा के सहयोगी दलों में दो सीट राष्ट्रीय लोकदल को और एक सीट अनुप्रिया पटेल की अपना दल (एस) को मिल सकी है।