दिल्ली में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी भाजपा, इन कारणों से बदली चुनावी रणनीति
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भाजपा की चुनावी रणनीति के केंद्र में राष्ट्रीय मुद्दे हमेशा छाए रहते हैं। कुछ चुनावों को छोड़ दें तो अब तक उसके नेता, जनता के बीच राम मंदिर, अनुच्छेद 370, पाकिस्तान और तीन तलाक जैसे संवेदनशील विषयों पर बोलते रहे हैं, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव इनमें अपवाद हो सकता है।
रणनीति के तहत भाजपा दिल्ली में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता से उठाएगी। मंगलवार को पार्टी की एक उच्च स्तरीय मीटिंग में सभी नेताओं को इससे जुड़े निर्देश दे दिये गए हैं। प्रमुख मुद्दों की पहचान कर प्रदेश के विशेष नेताओं को उन मुद्दों पर काम करने की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई है।
केंद्रीय महामंत्री ने ली बैठक
भाजपा के केंद्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने मंगलवार को दिल्ली की सभी 70 विधानसभाओं और सातों लोकसभा क्षेत्रों के संगठनमंत्रियों/विस्तारकों की बैठक ली। संगठन महामंत्री ने पार्टी नेताओं को अपने-अपने क्षेत्रों में जनता से जुड़े संवेदनशील मुद्दों की पहचान करने का निर्देश दिया। नेताओं को इन मुद्दों की पहचान के साथ-साथ संभावित हल का उपाय भी सुझाना है। रणनीति है कि विधानसभा चुनाव के दौरान उस क्षेत्र के चुनाव प्रचार में उन्हीं मुद्दों को प्रमुखता दी जाएगी।
स्थानीय मुद्दे क्यों?
बैठक में शामिल एक नेता के मुताबिक राष्ट्रीय विषय पार्टी के केंद्रीय नेता अपनी जनसभाओं के दौरान उठाएंगे, लेकिन स्थानीय स्तर पर प्रचार के दौरान सभी नेता इन मुद्दों से दूरी रखेंगे। वे जनता से जुड़े मुद्दे पर ही लोगों से संवाद करेंगे। माना जा रहा है कि पार्टी की यह रणनीति अरविंद केजरीवाल की वजह से आई है, जिन्होंने भाजपा को भी स्थानीय मुद्दों पर खेलने को मजबूर कर दिया है।
वे बड़े विषयों को छोड़ बिजली, पानी, सड़क, प्रदूषण, डेंगू, गलियों-नालियों की सफाई, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य जैसे मुद्दे उठा रहे हैं और कई मुद्दों पर जनता को समाधान भी पेश कर रहे हैं। इसलिए बीजेपी नेतृत्व को लगता है कि अगर अरविंद केजरीवाल को हटाना है तो उसे भी जनता को उसके हितों को प्रभावित करने वाले मुद्दों का समाधान पेश करना पड़ेगा। कच्ची कालोनियों को पक्का करने का फैसला, इसी नजरिये से लिया गया बताया जा रहा है।
हर समस्या को अलग नेता करेंगे फोकस
इसके पूर्व की बैठक में बीएल संतोष ने प्रमुख मुद्दों की पहचान कर प्रमुख नेताओं को एक-एक वर्ग की जिम्मेदारी सौंप दी है। मसलन राजधानी दिल्ली में महिलाओं से जुड़ी समस्याओं को उठाने के लिए मीनाक्षी लेखी को आगे किया गया है। इसी प्रकार व्यापारी वर्ग की समस्याओं के अध्ययन और उसके निदान के लिए सांसद विजय गोयल को जिम्मेदारी दी गई है।
इसी क्रम में बौद्धिक वर्ग की जिम्मेदारी केंद्रीय मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन, सोशल मीडिया की जिम्मेदारी सुमीत भसीन, युवाओं से जुड़ी जिम्मेदारी गौतम गंभीर, ओबीसी वर्ग की जिम्मेदारी प्रवेश वर्मा, अनुसूचित जाति के मुद्दे सांसद हंसराज हंस, सांस्कृतिक मुद्दे की जिम्मेदारी पूर्व सांसद महेश गिरी और पूर्वांचल से जुड़े लोगों से जुड़ने की जिम्मेदारी प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी को सौंपी गई है।