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शाह-फडणवीस और सोनिया-पवार की मुलाकात के बाद भी नहीं सुलझी महाराष्ट्र की गुत्थी

Tue, 05 Nov 2019 04:02 AM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: संजीव कुमार झा Updated Tue, 05 Nov 2019 04:02 AM IST
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BJP last proposal to Shiv Sena, no chief minister post will be given on 16 ministers
devendra fadanvis

महाराष्ट्र में सत्ता की खींचतान के बीच भाजपा ने सोमवार को शिवसेना के पास आखिरी प्रस्ताव भेजा है जिसमें शिवसेना को 16 मंत्री पद देने की बात है, हालांकि इसमें मुख्यमंत्री की कुर्सी साझा नहीं होगी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की दिल्ली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के साथ मुलाकात के बाद यह फार्मूला आया है।

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सूत्रों का कहना है कि भाजपा द्वारा प्रस्तावित मंत्रालयों में गृह, वित्त, नगर विकास और राजस्व मंत्रालय नहीं हैं। जबकि शिवसेना इनकी मांग कर रही है। ज्यादा जोर दिए जाने पर भाजपा राजस्व विभाग शिवसेना को देने पर विचार कर सकती है। तमाम खींचतान और नाराजगी के बावजूद दोनों दलों में पर्दे के पीछे बात चल रही है।
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मगर भाजपा के प्रस्ताव से साफ है कि वह शिवसेना को किसी कीमत पर मुख्यमंत्री की कुर्सी नहीं देगी। सूत्रों के मुताबिक गेंद अब शिवसेना के पाले में है, भाजपा के साथ सत्ता में आने के लिए उसे अपनी सीएम की जिद छोड़ने पड़ेगी। इससे पहले भाजपा ने शिवसेना को 13 मंत्री पद देने पर सहमति जताई थी परंतु अब थोड़ा झुकते हुए 16 तक आ गई है।
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मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार को दिल्ली में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह, प्रभारी भूपेंद्र यादव और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से सरकार गठन पर अलग-अलग मुलाकात की। उन्होंने कहा कि राज्य में जल्द सरकार बनाने की जरूरत है।

 गुत्थी नहीं सुलझी तो अल्पमत सरकार बना सकती है भाजपा

वहीं अगर सियासी गुत्थी न सुलझी तो भाजपा पहले की तरह सूबे में अल्पमत सरकार बना सकती है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक पार्टी शिवसेना को पहले से अधिक मंत्री पद के साथ जैसे अहम मंत्रालय देने के लिए राजी है। लेकिन पार्टी चाहती है कि बातचीत की पेशकश शिवसेना प्रमुख उद्घव ठाकरे की ओर से आए।

शिवसेना के 25 विधायक फडणवीस के संपर्क में

निर्दलीय विधायक रवि राणा ने सोमवार को सांसद पत्नी नवनीत कौर राणा के साथ राज्यपाल से मुलाकात के बाद दावा किया कि शिवसेना के करीब 25 विधायक सीधे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के संपर्क में हैं। उन्होंने कहा, ‘फडणवीस का मुख्यमंत्री बनना तय है क्योंकि शिवसेना के 20 से 25 विधायक सीधे उनसे बात कर रहे हैं। फडणवीस ने पांच साल में अच्छा काम किया है, इसलिए लोग उन्हें फिर इस पद पर देखना चाहते हैं।’

राज्यपाल से मिले राउत न कहा, हम बाधा नहीं डाल रहे

मुंबई। शिवसेना नेता संजय राउत ने सोमवार को राज्यपाल भगत सिंह कोशियारी से मुलाकात कर बताया कि सरकार गठन में शिवसेना की ओर से कोई कोई बाधा नहीं डाली जा रही है। हालांकि राउत ने राज्यपाल के साथ उनकी मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया। राउत ने कहा, राज्यपाल ने उन्हें बताया है कि कुछ ही समय में महाराष्ट्र में सरकार का गठन होगा। उन्होंने कहा, राज्यपाल इस मामले में संविधान के नियमों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

‘औकात’ पर बात ले आए संजय राउत

भाजपा पर लगातार हमला कर रहे शिवसेना सांसद संजय राउत ने रविवार की रात अपने ट्विटर अकाउंट से गठबंधन निभाने की बात ‘औकात’ तक पहुंचा दी। उन्होंने दिवंगत बाल ठाकरे की तस्वीर के साथ उनका एक वक्तव्य लगाया और लिखा, दोस्ती उन्हीं से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हों। भाजपा फिलहाल शिवसेना के हमलों का जवाब नहीं दे रही है। पार्टी के नेता भी खामोश हैं।

 मराठी अखबार ने राउत को बेताल बताया

मुंबई। सियासी गतिरोध के बीच मराठी के अखबार ने बिना नाम लिये शिवसेना नेता संजय राउत को जोकर और बेताल बताया। बेताल किवदंती कथाओं में एक भूत था जो राजा विक्रमादित्य को अपने सवालों में फंसा था। संघ की ओर झुकाव रखने वाले नागपुर से प्रकाशित तरुण भारत ने अपने उद्धव और बेताल शीर्षक से प्रकाशित लेख में राउत पर हमला बोलते हुए लिखा कि वह भाजपा-शिवसेना गठबंधन को महाराष्ट्र की सत्ता में आने से रोक रहे हैं। लेख में लिखा गया कि अयोध्या पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने वाला है ऐसे में राज्य में पूर्ण बहुमत वाली स्थायी सरकार बहुत जरूरी है।

उधर, फडणवीस के करीबी मंत्री बोले- दोबारा चुनाव को तैयार

सियासी गतिरोध के बीच महाराष्ट्र में भाजपा के पर्यटन एवं एफडीए मंत्री जयकुमार रावल ने सोमवार को कहा कि पार्टी के कुछ नेता दोबारा चुनाव कराने को तैयार हैं।

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के करीब रावल ने एक चैनल को बताया कि पार्टी नेताओं का कहना है कि नेतृत्व को शिवसेना के साथ गठबंधन को लेकर बहुत मशक्कत करने की जरूरत नहीं है।

हमें दोबारा मौका दिया जाए और इस बार हम और अधिक वोटों के साथ जीतकर सरकार बना लेंगे। मौजूदा चुनाव में भाजपा को 105 और शिवसेना को 56 सीटें मिली हैं।

पवार ने शिवसेना के पाले में डाली गेंद

महाराष्ट्र में नई सरकार के गठन की गुत्थी सुलझने के बदले और उलझ गई है। कांग्रेस और भाजपा ने शिवसेना की उनके समर्थन के नाम पर भाजपा से मोलभाव की रणनीति पर पानी फेर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष और एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने तय किया है कि जब तक शिवसेना सार्वजनिक तौर पर भाजपा ने नाता तोड़ने का फैसला नहीं करेगी, तब तक दोनों दल नई सरकार के गठन की प्रक्रिया में हिस्सा नहीं लेंगे। जाहिर तौर पर कांग्रेस और एनसीपी के इस रुख के बाद सूबे में नई सरकार के गठन की गेंद शिवसेना के पाले में चली गई है।

सोमवार शाम सोनिया से मुलाकात के बाद पवार ने साफ शब्दों में कहा, भाजपा-शिवसेना के पास बहुमत होने के कारण सरकार बनाने की जिम्मेदारी उनकी है। कांग्रेस और एनसीपी के पास सरकार बनाने के लिए जरूरी संख्या नहीं है। इस सिलसिले में न तो शिवसेना ने उनसे बात की है और ना ही एनसीपी ने शिवसेना से संपर्क किया है। हालांकि पवार ने भाजपा-शिवसेना के बीच जारी खींचतान को नूरा कुश्ती की जगह गंभीर मामला बताया।

सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस और एनसीपी दोनों दल नहीं चाहते कि शिवसेना उनके समर्थन का दबाव दिखा कर भाजपा से मोलभाव करे। यही कारण है कि सोनिया-पवार की मुलाकात में शिवसेना की ओर से भाजपा के समर्थन के इतर सरकार बनाने की पहल का इंतजार करने पर सहमति बनी। दोनों दल नहीं चाहते कि उनकी ओर से पहल होने के बाद शिवसेना एक बार फिर से भाजपा से गठबंधन कर ले।

भाजपा 1995 के फार्मूले पर राजी

उधर, पूरे घटनाक्रम से चिंतित भाजपा ने नई सरकार में शिवसेना की भागीदारी बढ़ाने और महत्वपूर्ण मंत्रालय देने का नया फार्मूला तैयार किया है। पार्टी का कहना है कि अगर शिवसेना 1995 के फार्मूले पर सरकार बनाने के लिए भी राजी हो तो भाजपा तैयार है। तब के फार्मूले में सबसे अधिक सीटें जीतने वाले को सीएम का पद और दूसरे को डिप्टी सीएम समेत कुछ अहम मंत्रालय दिया जाना शामिल था।

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