BJP: जानें किन सांसदों और मंत्रियों के टिकट काटने जा रही है भाजपा, पार्टी ने तैयार किया यह रिपोर्ट कार्ड
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सांसदों का पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा चुका है। इस आधार पर टिकटों के बंटवारे में न सिर्फ सहूलियत होगी, बल्कि टिकट काटने में भी जनता के फीडबैक का ही आधार बनेगा...
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आने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर भाजपा ने मजबूत तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक भाजपा एक बार फिर बड़े प्रयोग के साथ सांसदों के टिकट काटने जा रही है। चर्चा यही हो रही है कि इस बार भाजपा अपने तकरीबन एक चौथाई सांसदों को टिकट नहीं देगी। इसमें कई सांसद नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में मंत्री भी हैं। इसके अलावा पार्टी उन सांसदों के भी टिकट काटने की तैयारी में है जिनका नाम किसी ने किसी तरीके से विवाद में शामिल रहा है। भाजपा के पिछले साल जून में शुरू हुए महाजनसंपर्क अभियान और इस दौरान बूथ स्तर पर इकट्ठा की गई जानकारी की रिपोर्ट को पार्टी नेतृत्व के साथ साझा किया गया है। सूत्रों के मुताबिक भाजपा आने वाले चुनाव में इस तरह के बड़े कदम ऐसी ही रिपोर्ट के आधार पर लेने वाली है।
सूत्रों के मुताबिक आने वाले लोकसभा के चुनाव में बड़े स्तर पर सांसदों के टिकट काटकर नई रणनीति के साथ सियासी मैदान में उतरने जा रही है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक उत्तर भारत के राज्यों में पार्टी तकरीबन एक चौथाई से ज्यादा सांसदों के टिकट काट सकती है। इसमें कई सांसद केंद्र में मंत्री भी हैं। भाजपा से जुड़े सूत्रों की मानें, तो पिछले साल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार के नौ साल पूरे होने पर संपर्क से समर्थन अभियान के साथ-साथ महाजनसंपर्क अभियान चलाया था। पार्टी ने हर बूथ के साथ लोगों से सीधे तौर पर न सिर्फ जुड़ना शुरू किया, बल्कि सांसदों का रिपोर्ट कार्ड भी पब्लिक से लेना शुरू किया था।
सूत्रों के मुताबिक इस दौरान जो जानकारियां सामने आई हैं, वह कई सांसदों के टिकट कटने के रूप में सामने आ सकती हैं। इस अभियान में शामिल केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि इन अभियानों की एक पूरी रिपोर्ट तैयार हुई है, जो कि केंद्रीय नेतृत्व के साथ साझा की गई है। इस रिपोर्ट में महाजनसंपर्क अभियान समेत कई अन्य जनता से सीधे मुखातिब होने वाले कार्यक्रमों के दौरान एकत्र की गई पूरी रिपोर्ट भी है। सूत्रों के मुताबिक बूथ स्तर पर एक-एक कार्यकर्ता से मुलाकात के दौरान उनके सांसदों की जनता के कार्यक्रमों में भागीदारी से लेकर वोटर आउटरीच जैसे कार्यक्रमों में सहभागिता और सांसद निधि के इस्तेमाल का पूरा ब्यौरा तैयार हुआ है।
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता बताते हैं कि केंद्र सरकार की योजनाओं के साथ-साथ ऐसे कार्यक्रमों के माध्यम से सांसदों का पूरा रिपोर्ट कार्ड तैयार किया जा चुका है। इस आधार पर टिकटों के बंटवारे में न सिर्फ सहूलियत होगी, बल्कि टिकट काटने में भी जनता के फीडबैक का ही आधार बनेगा। इसके अलावा पार्टी उन प्रत्याशियों पर भी इस बार दांव नहीं लगाने वाली है, जो सिर्फ पीएम मोदी की उपलब्धि और उनके नाम पर चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे हैं। भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व से जुड़े एक वरिष्ठ पदाधिकारी कहते हैं कि पार्टी इस चुनाव में किसी भी तरीके का चांस नहीं लेना चाहती है। एंटी इनकंबेंसी को कम करने के लिए पार्टी न सिर्फ नए लोगों पर दांव लगा सकती है, बल्कि उनको बड़ी जिम्मेदारियां भी दे सकती है।
भाजपा के सूत्रों के मुताबिक 75 साल से अधिक उम्र के नेताओं को भी इस बार टिकट नहीं मिलने की बात की जा रही है। इसके अलावा बीते पांच साल में जो नेता अलग-अलग तरह से विवादों में रहे, उन्हें भी इस साल होने वाले लोकसभा के चुनाव में पार्टी टिकट देने से परहेज कर सकती है। ऐसे नेताओं की पूरी लिस्ट पार्टी आलाकमान को सौंपी जा चुकी है, जिस पर फैसला लिया जाना है। इसके अलावा आने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी वर्तमान सांसदों की छुट्टी कर अलग-अलग राज्यों के विधायकों को लोकसभा के चुनाव में किस्मत आजमाने का मौका भी दे सकती है।
भाजपा सूत्रों के मुताबिक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले साल कर्नाटक विधानसभा के चुनाव में विवादित नेताओं से दूर रहने का इशारा भी किया था। राजनीतिक जानकार अभिजीत मोघे कहते हैं कि भाजपा इस वक्त उसे दौर में है, जहां पर वह किसी भी तरीके के विवादित नेताओं से दूर रहकर खुद की सीटों को मल्टीप्लाई कर सकती है। वह कहते हैं कि भाजपा अगर एक चौथाई सांसदों के टिकट काटने के फैसले जैसा मन बना रही है, तो यह निश्चित रूप से पार्टी के लिए बेहतर साबित हो सकता है। उनका मानना है कि भाजपा लगातार प्रयोग करती है।