त्रिपुरा की जीत को कर्नाटक में भुनाएगी भाजपा, पूर्वोत्तर बन रहा है पार्टी के लिए लक्की
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त्रिपुरा की जीत को भाजपा ने कर्नाटक चुनाव में भुनाने का निर्णय लिया है। इस कवायद में पार्टी ने अपने सभी मुख्यमंत्रियों को अपने-अपने प्रदेश में त्रिपुरा की जीत का जश्र मनाने का फरमान जारी किया है। तो परणिाम आने के बाद भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के चेहरे की खुशी देखने लायक थी।
परिणाम के बाद जब वे मीडिया से मिलने आए तो बेहद खुश नजर आ रहे थे। उन्होंने स्वीकार किया त्रिपुरा के परिणाम कर्नाटक और लोकसभा चुनाव 2019 के लिए अहम होंगे।
उन्होंने कहा कि पूरे देश के कार्यकर्ताओं में त्रिपुरा की जीत को लेकर खुशी की लहर है। खासतौर से केरल और पश्चिम बंगाल के कार्यकर्ता बेहद प्रसन्न होंगे। लंबे संघर्ष के बाद भाजपा अपने धुर वैचारिक प्रतिद्वंदी को मात देने में सफल हुई है।
बताया जा रहा है कि पार्टी ने त्रिपुरा चुनाव के परिणामों को कर्नाटक के चुनाव में भुनाने की रणनीति बनाई है। त्रिपुरा की जीत का जश्र मनाने के बाद शाह ने दावा ठोकते हुए कहा है कि कर्नाटक में जीत भाजपा की होगी। जबकि यहां कांग्रेस के साथ भाजपा का कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। मगर भाजपा यहां बढ़े उत्साह के साथ मैदान में उतरेगी। जबकि कांग्रेस का मनोबल गिरा रहेगा क्योंकि त्रिपुरा और नागालैंड में उसे सीटें नसीब नहीं हुई हैं।
केरल, बंगाल और उड़ीसा की जीत के बाद होगा भाजपा का स्वर्ण काल
21 राज्यों में भाजपा और उसकी सहयोगी दलों की सरकार होने के बावजूद भी भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने कहा कि पार्टी का अभी स्वर्णकाल नहीं आया है।
एक सवाल का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि केरल, उड़ीसा और पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत के बाद ही पार्टी का गोल्डन ऐज (स्वर्णकाल) आएगा। उन्होंने विश्वास जताया कि इन राज्यों में अगली जीत भाजपा की होगी।
भाजपा के लिए लक्की रहा है पूर्वोत्तर
शनिवार के चुनाव परिणामों पर गौर करें तो पूर्वोत्तर राज्यों के चुनाव परिणाम भाजपा के लिए लक्की रहे हैं। जब भी उत्तर भारत में पार्टी की चमक कमजोर होने के संकेत दिखते हैं तो पार्टी को पूर्वोत्तर के राज्यों से जीत की संजीवनी मिल जाती है।
दिल्ली और बिहार की हार के बाद जब भाजपा के कार्यकर्ताओं में निराशा का दौर शुरू होने लगा था तो पार्टी को असम में ऐतिहासिक जीत मिली थी। उसके बाद सभी चुनावी यूपी, उत्तराखंड, मणिपुर, हिमाचल और गुजरात में भाजपा को जीत मिली। अब गुजरात में कड़ी टक्कर के बाद राजस्थान और मध्य प्रदेश में हुए उपचुनाव के नतीजें भाजपा आलाकमान के माथे की चिंता बढ़ाते इससे पहले त्रिपुरा और नागालैंड की सफलता ने पार्टी नेतृत्व को दोबारा से उर्जा प्रदान कर दिया है।
यही वजह है कि पूर्वोत्तर को भाजपा के लिए लक्की कहा जाने लगा है और वहां के प्रभारी राम माधव की गिनती शाह के लक्की महामंत्री के रूप में होने लगी है। हालांकि त्रिपुरा की जीत को भगवा परिवार के लिए वैचारिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। हर जगह खुशी का माहौल है।