'कानून से ऊपर कोई नहीं': राहुल गांधी पर भाजपा का पलटवार, सीजेपी नेताओं पर कार्रवाई को बताया था कायरता
सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच बयानबाजी तेज हो गई। राहुल गांधी ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए युवाओं को जेल भेजने की आलोचना की थी। जवाब में भाजपा ने कहा कि संविधान विरोध प्रदर्शन की अनुमति देता है, लेकिन कानून तोड़ने की नहीं।
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भाजपा के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक आशीष उषा अग्रवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट में कहा कि सार्वजनिक स्थानों को सत्ता हासिल करने के लिए राजनीतिक अखाड़े में नहीं बदला जा सकता।
राहुल गांधी ने की थी केंद्र सरकार की आलोचना
इससे पहले दिन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीजेपी नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद केंद्र सरकार की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर पर तिरंगा लहराना कोई अपराध नहीं है। इसके लिए युवाओं को जेल भेजना "कायरता" है। राहुल गांधी ने यह भी कहा था कि जंतर-मंतर भारत के लोगों का है और इसे वापस हासिल किया जाएगा।
Rahul Gandhi, stop misleading the nation! The Constitution guarantees the right to protest, not the right to violate the law. Jantar Mantar’s de-notification followed due legal process. No one is above the law. For decades, your party and family defended Article 370, which stood in the way of J&K’s full constitutional integration. It was Hon'ble PM Shri Narendra Modi ji’s decisive leadership and commitment to national unity that ensured J&K’s full integration, and today, the Tricolour flies proudly in Kashmir. Democracy is governed by the Constitution, not the street. You cannot turn public spaces into political battlegrounds or manufacture chaos to capture power. India will always stand by the rule of law not your political ambitions. @PMOIndia @NitinNabin @AmitShah @BJP4India
— Ashish Usha Agarwal आशीष ऊषा अग्रवाल (@Ashish_HG) October 14, 2026
भाजपा नेता आशीष उषा अग्रवाल ने कहा, "राहुल गांधी, देश को गुमराह करना बंद करें।" उन्होंने कहा कि संविधान विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार देता है, लेकिन कानून का उल्लंघन करने का नहीं। अग्रवाल के मुताबिक, जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाने की प्रक्रिया कानूनी नियमों के तहत पूरी की गई है और कोई भी कानून से ऊपर नहीं है।
अनुच्छेद 370 का भी किया जिक्र
अग्रवाल ने जम्मू-कश्मीर से जुड़े अनुच्छेद 370 का जिक्र करते हुए कांग्रेस और गांधी परिवार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दशकों तक कांग्रेस और उसका परिवार अनुच्छेद 370 का समर्थन करते रहे, जो जम्मू-कश्मीर के पूर्ण संवैधानिक एकीकरण के रास्ते में बाधा था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णायक नेतृत्व और राष्ट्रीय एकता के प्रति प्रतिबद्धता से जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण सुनिश्चित हुआ और आज कश्मीर में तिरंगा गर्व से लहरा रहा है।
अग्रवाल ने कहा कि लोकतंत्र संविधान के अनुसार चलता है, सड़कों के अनुसार नहीं। उन्होंने कहा, "आप सत्ता हासिल करने के लिए सार्वजनिक स्थानों को राजनीतिक अखाड़े में नहीं बदल सकते और न ही अराजकता पैदा कर सकते हैं। भारत हमेशा कानून के शासन के साथ खड़ा रहेगा, न कि आपकी राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं के साथ।"
जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के बाद गिरफ्तार हुए थे सीजेपी नेता
पुलिस के मुताबिक, सीजेपी के सदस्य सौरव दास, आशुतोष रांका और अन्य लोग मंगलवार को निषेधाज्ञा का उल्लंघन करते हुए जंतर-मंतर पहुंचे थे। उन्होंने वहां तिरंगा फहराया और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए। सीजेपी मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रही है। संगठन का आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर में अनियमितताएं हुई हैं।
पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर को रविवार को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटाया गया था। दास और रांका को शांति बनाए रखने से संबंधित बांड का कथित उल्लंघन करने और जंतर-मंतर में अनधिकृत प्रवेश के आरोप में बुधवार को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों को तिहाड़ जेल में रखा गया है।