भाजपा के सामने विपक्ष के हमलों से प्रधानमंत्री की छवि को बचाने की चुनौती
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मई 2014 में प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने जिस राजनीतिक ऊंचाई और छवि को पाया था, अब उनके और भाजपा के सामने उसे बरकरार रखने की चुनौती है। क्योंकि एक के बाद एक मामले में विपक्ष और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सीधे प्रधानमंत्री को निशाने पर ले रहे हैं। प्रधानमंत्री पर पहला राजनीतिक हमला भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के बेटे जय शाह पर लगे आरोप को लेकर विपक्ष ने किया था। तब कांग्रेस पार्टी के तत्कालीन उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से चुप्पी तोड़ने का आग्रह किया था। इसके बाद कांग्रेस ने प्रधानमंत्री पर दूसरा आरोप राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर लगाया।
इस सौदे को लेकर अभी तक जांच नहीं हुई है, लेकिन देश के जाने- माने उद्योगपति की कंपनी को विमान सौदे में 30 हजार करोड़ रुपये का ठेका दिलाने के आरोप को राहुल गांधी पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों में भाजपा के खिलाफ मुद्दा बनाने में जुटे हैं। इसके पहले संसद में राहुल गांधी राफेल सौदे को लेकर प्रधानमंत्री पर सीधा यह आरोप लगा चुके हैं कि चौकीदार भागीदार है। हालांकि अगले दिन ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका जवाब एक जनसभा में यह कहकर दिया कि वह भागीदार हैं लेकिन जनता के सुख- दुख में। कांग्रेस राफेल सौदे को बोफोर्स जैसा मुद्दा बनाने की कोशिश में है।
मेहुल-नीरव के मामले
इस बीच में हजारों करोड़ रुपए के बैंक घोटाले में आरोपित नीरव मोदी और मेहुल चौकसी को लेकर भी विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी को घेरने की कोशिश की। गीतांजलि ज्वेलर्स के प्रमोटर मेहुल चोकसी से संबंध, गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम की लांचिंग के कार्यक्रम में मेहुल चोकसी की मौजूदगी और मंच से प्रधानमंत्री द्वारा मेहुल चोकसी को मेहुल भाई कहना, डावोस विश्व व्यापार संगठन की बैठक के बाद भारतीय उद्योगपतियों के साथ प्रधानमंत्री की फोटो में नीरव मोदी के भी होने को लेकर भी विपक्ष ने प्रधानमंत्री को घेरा। शराब कारोबारी विजय माल्या के विदेश जाने से पहले वित्त मंत्री अरुण जेटली से संसद भवन परिसर में मुलाकात की थी। विपक्ष ने इस मामले पर भी केंद्र सरकार पर तीखा हमला किया।
सीबीआई के झगड़े से बिगड़ सकती है सरकार की छवि
सीबीआई में निदेशक और विशेष निदेशक के बीच छिड़ी रार का छींटा सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय की छवि पर भी आ सकता है। सीबीआई निदेशक की नियुक्ति प्रधानमंत्री, देश के प्रधानमंत्री न्यायाधीश और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष के कोलेजियम से होती है।
इसी तरह से सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बारे में कहा जाता है कि वह प्रधानमंत्री के लगातार भरोसेमंद रहे हैं। गोधरा में 2002 में साबरमती एक्सप्रेस में लगी आग की जांच के लिए गठित एसआईटी का नेतृत्व करने वाले राकेश अस्थाना ने प्रधानमंत्री के मुख्यमंत्रित्व काल में लगातार अच्छी पोस्टिंग पाई है।
राकेश अस्थाना पर लगातार एक के बाद एक कई आरोप भी लगे हैं। उनकी नियुक्ति के समय ही वकील प्रशांत भूषण ने उनकी तैनाती का विरोध किया था। फरवरी 2017 में आलोक वर्मा ने भी उनकी दागदार छवि का हवाला देकर आपत्ति जताई थी।
सीबीआई निदेशक और सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर के बीच में यह झगड़ा करीब साल भर से सतह पर है, इसके बाद भी पीएमओ चुप रहा फिर अचानक जिस तरह आधी रात को आनन-फानन में कार्रवाई की गई और मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया, उसने भी विपक्ष को पीएमओ पर हमला करने का मौका दे दिया है।