{"_id":"5c5d3231bdec22102e65d5e4","slug":"bjp-goapl-agarwal-questions-congress-rahul-gandhi-over-rafale-deal-price-sc-nirmala-sitharaman","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"राहुल गांधी को रक्षामंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा एक अधिकारी की बात पर भरोसा क्यों?- भाजपा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
राहुल गांधी को रक्षामंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा एक अधिकारी की बात पर भरोसा क्यों?- भाजपा
Fri, 08 Feb 2019 01:09 PM IST
Amit Digital
अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली
Published by: Amit Digital
Updated Fri, 08 Feb 2019 01:09 PM IST
विज्ञापन
गोपाल कृष्ण अग्रवाल
- फोटो : twitter/@gopalkagarwal
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भाजपा ने राफेल मामले पर राहुल गांधी के बयान को उनकी झूठ की फैक्ट्री का एक और घटिया उत्पाद बताया है। बीजेपी प्रवक्ता गोपाल कृष्ण अग्रवाल ने कहा कि देश की रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मामले पर लोकसभा में बयान दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया है कि इस मामले की खरीद में प्रक्रिया का पूरा पालन किया गया, और राफेल विमानों की खरीद में कैबिनेट कमेटी ऑन डिफेन्स की सहमती ली गई थी। इसके बाद विवाद के लिए कुछ शेष नहीं रह जाना चाहिए।
भाजपा प्रवक्ता अग्रवाल ने कहा कि यह देखने वाली बात है कि राहुल गांधी देश की रक्षामंत्री के लोकसभा में दिए गये बयान पर भरोसा नहीं करते हैं, सर्वोच्च अदालत की बात पर भरोसा नहीं करते हैं, लेकिन एक अधिकारी की बात पर ज्यादा भरोसा दिखाते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि वे एक अधिकारी के एक नोट को रक्षामंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा भरोसेमंद क्यों मानते हैं?
इसके पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि राफेल की डील में पीएम खुद सौदेबाजी कर रहे थे। माना जाता है कि कांग्रेस राफेल मामले को एक बड़े चुनावी हथियार के रूप में देख रही है। यही कारण है कि वह इस मामले पर नए-नए तथ्यों के साथ रोज मैदान में उतर रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने पूर्व में कहा है कि राफेल मामला हमारे हाथ लगा चुनावी ट्रम्प कार्ड है। पार्टी इसे पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान जोर शोर से उठाएगी। और अगले लोकसभा चुनाव में यह पार्टी का प्रमुख मुद्दा होगा।
विज्ञापन
विज्ञापन
भाजपा प्रवक्ता अग्रवाल ने कहा कि यह देखने वाली बात है कि राहुल गांधी देश की रक्षामंत्री के लोकसभा में दिए गये बयान पर भरोसा नहीं करते हैं, सर्वोच्च अदालत की बात पर भरोसा नहीं करते हैं, लेकिन एक अधिकारी की बात पर ज्यादा भरोसा दिखाते हैं। उनसे पूछा जाना चाहिए कि वे एक अधिकारी के एक नोट को रक्षामंत्री और सुप्रीम कोर्ट से ज्यादा भरोसेमंद क्यों मानते हैं?
विज्ञापन
इसके पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक प्रेस कांफ्रेंस कर सीधे प्रधानमंत्री पर हमला बोला। उन्होंने एक मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आरोप लगाया कि राफेल की डील में पीएम खुद सौदेबाजी कर रहे थे। माना जाता है कि कांग्रेस राफेल मामले को एक बड़े चुनावी हथियार के रूप में देख रही है। यही कारण है कि वह इस मामले पर नए-नए तथ्यों के साथ रोज मैदान में उतर रही है। दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अजय माकन ने पूर्व में कहा है कि राफेल मामला हमारे हाथ लगा चुनावी ट्रम्प कार्ड है। पार्टी इसे पूरे लोकसभा चुनाव के दौरान जोर शोर से उठाएगी। और अगले लोकसभा चुनाव में यह पार्टी का प्रमुख मुद्दा होगा।
विज्ञापन
कैसे बढ़ी राफेल की कीमत
कांग्रेस का कहना है कि उसने अपने कार्यकाल में राफेल की कीमत 526 करोड़ रूपये प्रति विमान तय की थी। लेकिन भाजपा सरकार ने इसे 1670 करोड़ रूपये प्रति विमान की कीमत पर विमान समझौते को अंतिम रूप दिया। इस मसले पर भाजपा का तर्क है कि विमान की 526 करोड़ की कीमत रूपये के अवमूल्यन और समय अधिक होने के कारण बढ़ती गई है। इसके आलावा विमानों पर लगाये जाने वाली मिसाइलों और अन्य युद्धक उपकरणों के कारण विमान की कीमतों में इजाफा हुआ है।
कांग्रेस का सबसे संगीन आरोप राफेल विमानों के ऑफसेट ठेकों को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि पीएम के इशारे पर देश की सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी एचएएल को हटाकर उसकी जगह अनुभवहीन रिलायंस को ऑफसेट ठेका दे दिया गया। जबकि सरकार का पक्ष है कि राफेल कम्पनी को अपने लिए भारतीय पार्टनर चुनने का अधिकार था। रिलायंस को मिले ठेके भी कुल ओफ़्सेट का महज चार फीसदी ही है। बाकी के ठेके अन्य कम्पनियों के पास हैं। ऐसे में इस मामले को विवाद में घसीटना एक राजनीतिक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है।
कांग्रेस का सबसे संगीन आरोप राफेल विमानों के ऑफसेट ठेकों को लेकर है। पार्टी का आरोप है कि पीएम के इशारे पर देश की सार्वजनिक क्षेत्र की कम्पनी एचएएल को हटाकर उसकी जगह अनुभवहीन रिलायंस को ऑफसेट ठेका दे दिया गया। जबकि सरकार का पक्ष है कि राफेल कम्पनी को अपने लिए भारतीय पार्टनर चुनने का अधिकार था। रिलायंस को मिले ठेके भी कुल ओफ़्सेट का महज चार फीसदी ही है। बाकी के ठेके अन्य कम्पनियों के पास हैं। ऐसे में इस मामले को विवाद में घसीटना एक राजनीतिक साजिश से ज्यादा कुछ नहीं है।