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लिंगायत मुद्दे पर घिरी भाजपा को मक्का मस्जिद फैसले से मिली सियासी संजीवनी
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
Updated Tue, 17 Apr 2018 01:33 AM IST
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मक्का मस्जिद ब्लास्ट केस
- फोटो : indian express
कर्नाटक में सीएम सिद्घारमैया के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा संबंधी सियासी दांव में बुरी तरह उलझी भाजपा को मक्का मस्जिद ब्लास्ट मामले में एनआईए कोर्ट के फैसले से सियासी संजीवनी दे दी है। पार्टी की रणनीति इस फैसले को लिंगायत मामले से जोड़ कर कांग्रेस को हिंदू विरोधी साबित करने की है। इसी महीने की अंतिम हफ्ते से खुद को विधानसभा चुनाव प्रचार में झोंक रहे पीएम नरेंद्र मोदी इसी फैसले के आधार पर कांग्रेस पर सियासी वार करेंगे। पार्टी को उम्मीद है कि इस रणनीति के सहारे वह सॉफ्ट हिंदुत्व की राजनीति कर रहे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को सियासी मोर्चे पर घेरने में कामयाब होगी।
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दरअसल सिद्घारमैया द्वारा लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने संबंधी फैसले के बाद संघ ने इस दांव का हवा निकालने के लिए अपने 30 वरिष्ठ प्रचारकों को मैदान में उतारा है। संघ के वरिष्ठ प्रचारक बीते दो हफ्ते से इस समुदाय से जुड़े मठ और प्रमुख लोगों के संपर्क में हैं। प्रचारक यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि अलग धर्म का दर्जा देने से लिंगायत समुदाय का भला होने के बदले उनका नुकसान होगा। इसके अलावा हिंदू धर्म भी कमजोर होगा। वरिष्ठ प्रचारक खासतौर से कर्नाटक के तटीय और उत्तरी इलाके में हैं जहां इस समुदाय की संख्या बहुत ज्यादा है।
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चुनाव अभियान से जुड़े पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक एनआईए कोर्ट द्वारा हिंदू आतंकवाद की थ्योरी को खारिज किए जाने के बाद पार्टी के लिए कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करना आसान होगा। पीएम राज्य में करीब दो दर्जन रैलियां करेंगे। इन रैलियों में पहले हिंदू आतंकवाद के जरिए हिंदुओं को बदनाम करने और लिंगायत मामले में हिंदुओं को बांटने की साजिश का आरोप लगाएंगे।
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दलित वोटरों पर भी निगाह
पार्टी ने कांग्रेस के परंपरागत मतदाता माने जाने वाले दलितों के वोट बैंक में सेंध लगाने की भी अलग से रणनीति बनाई है। इसके तहत दलितों से जुड़ी लंबनी और वोद्दार जातियों को टिकट दिया है। ये जातियां वाम पक्ष से जुड़ी हैं और दलितों के दूसरे धड़े दक्षिण पक्ष की जातियों के मुकाबले शैक्षिक और आर्थिक दृष्टि से पिछड़े हैं।