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BJP: भाजपा को भितरघात का डर, क्या बागी होंगे टिकट न पाने वाले नेता?
सार
BJP: भाजपा ने शनिवार को दिल्ली के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी। इसमें करावल नगर विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक मोहन सिंह बिष्ट का टिकट काटकर उसने अपने हिंदू फायरब्रांड नेता कपिल मिश्रा को टिकट थमा दिया।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
इस बार दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर भाजपा बहुत गंभीर है। उसे लगता है कि यदि उसने सभी पांसे सही से फेंके तो इस बार दिल्ली में उसकी सरकार बन सकती है। यही कारण है कि भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व दिल्ली को लेकर बहुत गंभीर हो गया है और उसने दिल्ली का चुनाव सीधे अपने हाथों में ले लिया है। लेकिन इसी बीच भाजपा के बागी नेता उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं। यदि पार्टी के प्रभावशाली नेताओं को टिकट नहीं मिला तो वे बगावत करके चुनाव मैदान में उतर सकते हैं और यदि ऐसा होता तो भाजपा के सपने पर पानी फिर सकता है।
दरअसल, भाजपा ने शनिवार को दिल्ली के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी। इसमें करावल नगर विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक मोहन सिंह बिष्ट का टिकट काटकर उसने अपने हिंदू फायरब्रांड नेता कपिल मिश्रा को टिकट थमा दिया। कपिल मिश्रा करावल नगर में काफी दमदार उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन इसी बीच मोहन सिंह बिष्ट ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।
मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि पार्टी सोचती है कि वह किसी को भी टिकट दे देगी और वह जीत जाएगी तो ऐसा नहीं होगा। अपनी सीट के साथ-साथ उन्होंने आसपास की सीटों पर भी भाजपा के लिए गंभीर परिणाम होने की चेतावनी भी दे दी। दरअसल, करावल नगर एरिया में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आए बाहरी मतदाता बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं और कहा जाता है कि मोहन सिंह बिष्ट का उन पर काफी प्रभाव है। यदि उनके असर से मतदान प्रभावित होता है तो भाजपा को इन इलाकों में नुकसान हो सकता है।
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शाहदरा में भी बगावत का डर
पार्टी ने अब तक शाहदरा की टिकट घोषित नहीं किया है। यहां से एक नेता लंबे समय से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। यदि पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं। चूंकि, इस नेता ने भी अपने क्षेत्र में हिंदूवादी नेता के तौर पर ही अपनी पहचान बनाई है, उनका भाजपा के मतदाताओं के ऊपर अच्छा-खासा असर है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिला और वे बगावत पर उतरे तो भाजपा को शाहदरा और उत्तर पूर्वी दिल्ली की कई सीटों पर नुकसान हो सकता है। कहा जा रहा है कि इसी कारण से शाहदरा का टिकट अब तक नहीं घोषित किया जा सका है।
दिल्ली कैंट में भी बगावत का डर
इसी तरह पार्टी को दिल्ली कैंट की सीट पर भी बगावत का डर सता रहा है। यहां से एक नेता पिछली बार भी टिकट की दावेदारी कर रहे थे, जबकि पार्टी ने मनीष सिंह को टिकट थमा दिया था। मनीष सिंह इस बार भी दावेदारी कर रहे हैं, वहीं पिछली बार उपेक्षा के बाद भी चुप रह गए एक उम्मीदवार के करीबी लोगों का दावा है कि यदि इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे बगावत पर उतर सकते हैं। वे पूरी तरह चुनाव की तैयारी कर चुके हैं और टिकट न मिलने पर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर दावा ठोंकने के लिए तैयार बैठे हैं। यदि ऐसा होता है तो भाजपा को इस सीट पर भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बिष्ट भी आएंगे साथ
हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि पार्टी दिल्ली में पूरी तरह एकजुट है। एक-दो नेताओं ने टिकट न मिलने पर अपनी नाराजगी अवश्य जताई है, लेकिन बड़े परिवार में इस तरह के छोटे-मोटे मामले होते रहते हैं। नेता का दावा है कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा और ये सभी नेता मिलकर चुनाव प्रचार करेंगे और वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ी जीत दर्ज करेंगे।
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दरअसल, भाजपा ने शनिवार को दिल्ली के लिए उम्मीदवारों की दूसरी सूची जारी कर दी। इसमें करावल नगर विधानसभा सीट से वर्तमान विधायक मोहन सिंह बिष्ट का टिकट काटकर उसने अपने हिंदू फायरब्रांड नेता कपिल मिश्रा को टिकट थमा दिया। कपिल मिश्रा करावल नगर में काफी दमदार उम्मीदवार हो सकते हैं। लेकिन इसी बीच मोहन सिंह बिष्ट ने बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है।
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मोहन सिंह बिष्ट ने कहा कि यदि पार्टी सोचती है कि वह किसी को भी टिकट दे देगी और वह जीत जाएगी तो ऐसा नहीं होगा। अपनी सीट के साथ-साथ उन्होंने आसपास की सीटों पर भी भाजपा के लिए गंभीर परिणाम होने की चेतावनी भी दे दी। दरअसल, करावल नगर एरिया में उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश से आए बाहरी मतदाता बहुत बड़ी संख्या में रहते हैं और कहा जाता है कि मोहन सिंह बिष्ट का उन पर काफी प्रभाव है। यदि उनके असर से मतदान प्रभावित होता है तो भाजपा को इन इलाकों में नुकसान हो सकता है।
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शाहदरा में भी बगावत का डर
पार्टी ने अब तक शाहदरा की टिकट घोषित नहीं किया है। यहां से एक नेता लंबे समय से टिकट की दावेदारी कर रहे हैं, लेकिन उन्हें हर बार उपेक्षा का शिकार होना पड़ा है। यदि पार्टी ने इस बार उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर सकते हैं। चूंकि, इस नेता ने भी अपने क्षेत्र में हिंदूवादी नेता के तौर पर ही अपनी पहचान बनाई है, उनका भाजपा के मतदाताओं के ऊपर अच्छा-खासा असर है। यदि उन्हें टिकट नहीं मिला और वे बगावत पर उतरे तो भाजपा को शाहदरा और उत्तर पूर्वी दिल्ली की कई सीटों पर नुकसान हो सकता है। कहा जा रहा है कि इसी कारण से शाहदरा का टिकट अब तक नहीं घोषित किया जा सका है।
दिल्ली कैंट में भी बगावत का डर
इसी तरह पार्टी को दिल्ली कैंट की सीट पर भी बगावत का डर सता रहा है। यहां से एक नेता पिछली बार भी टिकट की दावेदारी कर रहे थे, जबकि पार्टी ने मनीष सिंह को टिकट थमा दिया था। मनीष सिंह इस बार भी दावेदारी कर रहे हैं, वहीं पिछली बार उपेक्षा के बाद भी चुप रह गए एक उम्मीदवार के करीबी लोगों का दावा है कि यदि इस बार पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वे बगावत पर उतर सकते हैं। वे पूरी तरह चुनाव की तैयारी कर चुके हैं और टिकट न मिलने पर स्वतंत्र उम्मीदवार के तौर पर दावा ठोंकने के लिए तैयार बैठे हैं। यदि ऐसा होता है तो भाजपा को इस सीट पर भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
बिष्ट भी आएंगे साथ
हालांकि भाजपा नेताओं का दावा है कि पार्टी दिल्ली में पूरी तरह एकजुट है। एक-दो नेताओं ने टिकट न मिलने पर अपनी नाराजगी अवश्य जताई है, लेकिन बड़े परिवार में इस तरह के छोटे-मोटे मामले होते रहते हैं। नेता का दावा है कि एक-दो दिन में सब ठीक हो जाएगा और ये सभी नेता मिलकर चुनाव प्रचार करेंगे और वे दिल्ली विधानसभा चुनाव में इस बार बड़ी जीत दर्ज करेंगे।