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Assam: मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा बोले- सीएए लागू करने के लिए भाजपा प्रतिबद्ध, समय आने पर बनाएंगे नियम
Sat, 12 Nov 2022 08:50 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दिसपुर
Published by: निर्मल कांत
Updated Sat, 12 Nov 2022 08:50 PM IST
सार
मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, अपनी मातृभूमि में नागरिक बनना एक हिंदू का वैध अधिकार है और भाजपा पूरी तरह से नागरिकता संशोधन अधिनियम के साथ खड़ी है।
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मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा
- फोटो : Himanta Biswa Sarma/Twitter
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विस्तार
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने शनिवार को कहा कि उनकी पार्टी भाजपा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू करने के लिए प्रतिबद्ध है। सरमा ने कहा कि समय आने पर इसके लिए नियम बनाए जाएंगे।
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एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा, अपनी मातृभूमि में नागरिक बनना एक हिंदू का वैध अधिकार है और भाजपा पूरी तरह से नागरिकता संशोधन अधिनियम के साथ खड़ी है।
उसने जब सवाल किया गया कि अधिनियम के नियम अभी तक क्यों नहीं बनाए गए, सरमा ने कहा कि सीएए का विरोध करने वाले लोग थे और उसके बाद कोरोना वायरस महामारी आ गई।
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उन्होंने आगे कहा, यह प्रक्रिया में है, लेकिन भाजपा इसके लिए प्रतिबद्ध है। संसद ने कानून पारित किया है, यह समय की बात की बात है, जब आप इसके लिए नियम देखेंगे।
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मुख्यमंत्री सरमा ने इन आरोपों को भी खारिज किया कि भगवा पार्टी सीएए को चुनाव के लिए इस्तेमाल करती है। जो लोग सीएए के कारण वोट करेंगे, वो देश के परिदृश्य में दो से तीन संसदीय सीटों के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।
उन्होंने आगे कहा, सीएए हमारी प्रतिबद्धता का हिस्सा है। यह हमारी विचारधारा का हिस्सा है। हम इसे लागू करेंगे। किसी ने सवाल किया कि राम मंदिर कहां, कब आएगा? आपने अभी राम मंदिर देखा है। किसी ने सवाल किया कि अनुच्छेद 370 कब हट जाएगा? यह हट गया है। जिस तरह आप समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को आते हुए देखेंगे, उसी तरह आप सीएए को आते हुए देखेंगे।
सीएए अफगानिस्तान, बांग्लादेश और पाकिस्तान से आने वाले गैर-मुस्लिमों (हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों) को भारतीय नागरिकता प्रदान करने का प्रावधान करता है। यह 11 दिसंबर 2019 को संसद में पारित किया गया था। इसके अगले दिन इसे राष्ट्रपति की ओर से मंजूरी दे दी गई। बाद में गृह मंत्रालय ने इसकी अधिसूचना जारी कर दी थी।
हालांकि, इस कानून को लागू किया जाना बाकी है, क्योंकि सीएए के तहत नियम अभी बनाए जाने बाकी हैं। इसको लागू करने के लिए कानून के तहत नियम बनाए जाएंगे।