Mumbai: BJP शहर अध्यक्ष का दावा- BMC की सिर्फ 50 सीटें ही जीत पाएगा ठाकरे गुट, 30 सालों से उद्धव दल का कब्जा
भारत की सबसे अमीर नगरीय निकाय बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर शिवसेना तीस सालों से शासन कर रही है। 2017 में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थी। जबकि, भाजपा शिवसेना से महज दो सीट कम जीती और 82 सीटों पर अपना कब्जा किया था।
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भाजपा मुंबई के शहर अध्यक्ष ने रविवार को उद्धव ठाकरे पर जमकर निशाना साधा। अध्यक्ष ने कहा कि लोगों ने ठाकरे खेमे को खारिज कर दिया है। ठाकरे खेमे के नेता मुंबई नगर निकाय के चुनावों में 50 से अधिक सीटें नहीं जीत पाएंगे। बता दें, बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) में कुल 227 सीटें हैं।
जनता ईमानदार नेता का साथ देती है
मुंबई में रविवार को भाजपा विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों सहित भाजपा की मुंबई इकाई के शीर्ष नेताओं की सभा का आयोजन किया गया था। इसी आयोजन को संबोधित करते हुए आशीष शेलार ने कहा कि भाजपा के समर्थन के कारण लंबे समय से बीएमसी में शिवसेना का कब्जा था, लेकिन अब स्थितियां पहले की तरह नहीं रह गई। इसलिए अगले निकाय चुनावों में ठाकरे खेमा निगम की 50 सीटों से अधिक सीटें अपने नाम नहीं कर पाएगा। शेलार ने ठाकरे पर आरोप लगाते हुए कहा कि जनता ईमानदार नेता को ही मौका देती है, उनका ही साथ देती है और उद्धव ठाकरे पैसों की हेराफेरी करने में माहिर हैं।
ठाकरे गुट के पास भाजपा से सिर्फ दो सीटें ही ज्यादा
भारत की सबसे अमीर नगरीय निकाय बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर शिवसेना तीस सालों से शासन कर रही है। 2017 में हुए निकाय चुनाव में शिवसेना ने 84 सीटें जीती थी। जबकि, भाजपा शिवसेना से महज दो सीट कम जीती और 82 सीटों पर अपना कब्जा किया था। 1977 में शिवसेना ने बीएमसी की 103 सीटों पर कब्जा किया था। बाद के चुनावों में शिवसेना 97 और 84 सीटों पर सिमट गई। वहीं 2012 में शिवसेना महज 75 सीटें ही जीत पाई। हाल ही में मुंबई दौरे पर आए भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने कार्यकर्ताओं से कहा था कि आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि मुंबई का अगला मेयर भाजपा से ही हो।
शिवसेना नेताओं ने की थी बगावत
बता दें, मार्च 2022 में ही बीएमसी के पांच साल का कार्यकाल पूरा हो गया था। लेकिन चुनाव न हो पाने के कारण सरकार ने बीएमसी में प्रशासक नियुक्त कर दिया है। मुंबई की आखिरी महापौर किशोरी पेडनेकर थीं, जो उद्धव ठाकरे गुट के शिवसेना से संबंधित हैं। जून 2022 में शिवसेना के विधायकों और नेताओं ने बगावत कर दी थी, जिनका नेतृत्व एकनाथ शिंदे ने किया। बाद में चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना होने की मान्यता दे दी है।