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Tamil Nadu: 'तिरुपरनकुंद्रम मामले से सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहती थी भाजपा', तमिलनाडु के मंत्री का दावा
Sat, 27 Dec 2025 12:38 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,चेन्नई
न्यूज डेस्क, अमर उजाला,चेन्नई
Published by: नितिन गौतम
Updated Sat, 27 Dec 2025 12:38 PM IST
सार
भगवान मुरुगन के छह पवित्र निवास स्थानों (आरुपड़ै वीडु) में से एक तिरुपरनकुंद्रम की पहाड़ी पर कार्तिगई दीपम का दीया कहां जलाया जाए, इसी बात को लेकर हिंदू कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच बीते दिनों झड़प हो गई थी। राजनीतिक तौर पर भी यह मुद्दा खूब गरमाया था।
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मंदिर में दीया जलाने का विवाद
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
तमिलनाडु सरकार के मंत्री पीके शेखर बाबू ने दावा किया है कि तिरुपरनकुंद्रम दीप प्रज्जवलन मामले में भाजपा सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहती थी, लेकिन भगवान मुरुगन उनके पक्ष में नहीं थे। उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक आधार पर लोगों को बांटने की कोई भी कोशिश सीएम स्टालिन की सरकार में सफल नहीं होगी।
'सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहती थी भाजपा'
मीडिया से बात करते हुए तमिलनाडु सरकार के मंत्री पीके शेखर बाबू ने कहा, वे (भाजपा) भगवान मुरुगन के नाम पर तिरुपरनकुंद्रम में दीप प्रज्जवलित करने के मुद्दे पर सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहते थे। लेकिन ऐसा लगता है कि भगवान ने भी इसकी मंजूरी नहीं दी और यह असफल हो गया। तमिलनाडु भाजपा की समन्वय समिति के संयोजक एच राजा ने हाल ही में दावा किया है कि जब राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी तो मंदिर प्रशासन को सरकार से लेकर भक्तों को सौंपा जाएगा। जब इसे लेकर पीके शेखर बाबू से सवाल किया गया तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'उन्हें चुनाव लड़ने और जीतने दीजिए।' उन्होंने कहा, एच राजा को ये अवांछित बयान देने की बजाय, पहले चेन्नई में किसी भी सीट से चुनाव लड़कर अपनी अहमियत बतानी चाहिए।
कार्तिगई दीपम तमिलनाडु का बहुत पुराना और पवित्र त्योहार है, जो कि कार्तिगई मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की अग्नि रूप में पूजा की जाती है। तिरुवन्नामलई में लाखों लोग महादीपम देखने आते हैं। इसी तरह हर मुरुगन मंदिर में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। घर-घर दीये जलाए जाते हैं, इसलिए इसे 'दीयों का त्योहार' भी कहते हैं।
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तिरुपरनकुंद्रम की पहाड़ी पर भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी (मुरुगन) का प्राचीन मंदिर है और उसी पहाड़ी पर सिकंदर बादशाह दरगाह भी है। सैकड़ों साल से दोनों समुदाय शांति से रहते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुछ संगठनों ने पहाड़ी का नाम बदलने, कुर्बानी करने जैसे कदम उठाए, जिससे हिंदू संगठनों में गुस्सा भड़का।
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'सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहती थी भाजपा'
मीडिया से बात करते हुए तमिलनाडु सरकार के मंत्री पीके शेखर बाबू ने कहा, वे (भाजपा) भगवान मुरुगन के नाम पर तिरुपरनकुंद्रम में दीप प्रज्जवलित करने के मुद्दे पर सांप्रदायिक नफरत भड़काना चाहते थे। लेकिन ऐसा लगता है कि भगवान ने भी इसकी मंजूरी नहीं दी और यह असफल हो गया। तमिलनाडु भाजपा की समन्वय समिति के संयोजक एच राजा ने हाल ही में दावा किया है कि जब राज्य में भाजपा की सरकार बनेगी तो मंदिर प्रशासन को सरकार से लेकर भक्तों को सौंपा जाएगा। जब इसे लेकर पीके शेखर बाबू से सवाल किया गया तो उन्होंने तंज कसते हुए कहा, 'उन्हें चुनाव लड़ने और जीतने दीजिए।' उन्होंने कहा, एच राजा को ये अवांछित बयान देने की बजाय, पहले चेन्नई में किसी भी सीट से चुनाव लड़कर अपनी अहमियत बतानी चाहिए।
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कार्तिगई दीपम तमिलनाडु का बहुत पुराना और पवित्र त्योहार है, जो कि कार्तिगई मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन भगवान शिव की अग्नि रूप में पूजा की जाती है। तिरुवन्नामलई में लाखों लोग महादीपम देखने आते हैं। इसी तरह हर मुरुगन मंदिर में भी यह पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। घर-घर दीये जलाए जाते हैं, इसलिए इसे 'दीयों का त्योहार' भी कहते हैं।
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तिरुपरनकुंद्रम की पहाड़ी पर भगवान सुब्रह्मण्य स्वामी (मुरुगन) का प्राचीन मंदिर है और उसी पहाड़ी पर सिकंदर बादशाह दरगाह भी है। सैकड़ों साल से दोनों समुदाय शांति से रहते आए हैं। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में कुछ संगठनों ने पहाड़ी का नाम बदलने, कुर्बानी करने जैसे कदम उठाए, जिससे हिंदू संगठनों में गुस्सा भड़का।
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