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BJP: उपराष्ट्रपति के खिलाफ नोटिस को लेकर विपक्ष पर भड़की भाजपा, पात्रा बोले- किसान पुत्र-जाट कभी झुकता नहीं
Wed, 11 Dec 2024 03:43 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 11 Dec 2024 03:43 PM IST
सार
संबित पात्रा ने कहा, "पहली बार राज्यसभा में भारत के उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस विपक्ष द्वारा दिया गया है। सोरोस फाउंडेशन से पैसा लेकर देश को अस्थिर करने का जो षड्यंत्र है, उसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूरा गांधी नेहरू परिवार संलिप्त है।"
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संबित पात्रा
- फोटो : एक्स/बीजेपी
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विस्तार
राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के कांग्रेस और विपक्ष के कदम पर भाजपा ने बुधवार को निशाना साधा। पार्टी के नेता संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आरोप लगाया कि सोरोस और गांधी-नेहरु परिवार के रिश्तों को लेकर संसद में जो मुद्दा उठाया गया है, कांग्रेस उससे ध्यान बंटाने के लिए ही उपराष्ट्रपति के खिलाफ नोटिस लाई है। पात्रा ने कहा कि एक तरफ संविधान पर चर्चा की ओर भारत का संसद बढ़ रहा है और वहीं दूसरी ओर एक बात स्पष्ट हो रही है कि कांग्रेस के मन और कर्म में कहीं भी संविधान के प्रति सम्मान का भाव नहीं है।
आज सुबह से मीडिया में हम देख रहे हैं कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कुछ घटक दल ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल करेंगे। और दूसरी खबर यह है कि राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है।
उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस को घेरा
संबित पात्रा ने कहा, "पहली बार राज्यसभा में भारत के उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस विपक्ष द्वारा दिया गया है। सोरोस फाउंडेशन से पैसा लेकर देश को अस्थिर करने का जो षड्यंत्र है, उसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूरा गांधी नेहरू परिवार संलिप्त है। जब इस विषय को संसद और संसद के बाहर उठाया गया तो आनन-फानन में इस विषय से अपने आप को दूर करने के लिए और भटकाने के लिए धनखड़ जी के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास कांग्रेस और उनके कुछ साथी दलों ने किया है।"
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कुछ दिनों पहले ही भाजपा ने सोनिया गांधी जी का एक फाउंडेशन से लिंक खुलासा किया था। जॉर्ज सोरोस किस तरह से इस फाउंडेशन को फंड करते थे। किस तरह से यह फाउंडेशन कश्मीर को भारत से अलग करना चाहता था। जब यह विषय उठा, तब इन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर बात की।
पात्रा ने इस मुद्दे को जातीय बताते हुए कहा कि आप एक जाट उपराष्ट्रपति के ऊपर इस तरह से आक्षेप लगा रहे हैं। आप उन्हें किसी न किसी तरह कलंकित करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि एक किसान पुत्र और जाट कभी झुकता नहीं। जाट का सम्मान हिंदुस्तान में सदैव बरकरार और अडिग रहेगा।
ईवीएम के मुद्दे पर क्या बोले पात्रा?
पात्रा ने कहा कि ये दोनों खबरें विचलित करने वाली हैं और भारत के संविधान को कुचलने वाली हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ साथियों ने तय किया है कि अब हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के बाद वे चुनाव आयोग और ईवीएम की प्रणाली को सुप्रीम कोर्ट में घसीटेंगे। मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि कांग्रेस बार बार ईवीएम को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाती है और बार बार पटखनी खाकर आती है। जब भी उसने चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट में घसीटने की कोशिश की है, तब तब फजीहत कांग्रेस की हुई है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "23 नवंबर को जब महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव की गिनती हुई थी, उसके पश्चात चुनाव आयोग ने कहा था कि 288 विधानसभा सीटों पर 1440 वीवीपैट यूनिट लगाई गई हैं। हर विधानसभा में पांच वीवीपैट यूनिट और ईवीएम की गिनती में मिलान किया गया है और वह गिनती बिल्कुल ठीक निकली है। यानी ईवीएम के काम करने का तरीका ठीक है। चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को सीसीटीवी में कैद कर के हमारे सामने रखा है। इसके बावजूद इस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जा रही है। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी के मन में संविधान के प्रति सम्मान नहीं।"
26 नवंबर को भी एक पीआईएल इसी मसले पर दाखिल किया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप जो ईवीएम का रोना आप रोते हैं, जीत जाएं तो सब ठीक है, हार जाएं तो ईवीएम का रोना। आप झारखंड में जीतें तो ईवीएम ठीक है। तेलंगाना में जीत जाएं तो ईवीएम ठीक है। बाकी आप यहां आकर केस करते हैं, हम इस याचिका को खारिज करते हैं।
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आज सुबह से मीडिया में हम देख रहे हैं कि कांग्रेस और इंडिया गठबंधन के कुछ घटक दल ईवीएम और चुनाव आयोग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दाखिल करेंगे। और दूसरी खबर यह है कि राज्यसभा के सभापति और देश के उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ के खिलाफ एक अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया गया है।
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उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस को घेरा
संबित पात्रा ने कहा, "पहली बार राज्यसभा में भारत के उपराष्ट्रपति के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का नोटिस विपक्ष द्वारा दिया गया है। सोरोस फाउंडेशन से पैसा लेकर देश को अस्थिर करने का जो षड्यंत्र है, उसमें सोनिया गांधी, राहुल गांधी और पूरा गांधी नेहरू परिवार संलिप्त है। जब इस विषय को संसद और संसद के बाहर उठाया गया तो आनन-फानन में इस विषय से अपने आप को दूर करने के लिए और भटकाने के लिए धनखड़ जी के खिलाफ ये अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास कांग्रेस और उनके कुछ साथी दलों ने किया है।"
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कुछ दिनों पहले ही भाजपा ने सोनिया गांधी जी का एक फाउंडेशन से लिंक खुलासा किया था। जॉर्ज सोरोस किस तरह से इस फाउंडेशन को फंड करते थे। किस तरह से यह फाउंडेशन कश्मीर को भारत से अलग करना चाहता था। जब यह विषय उठा, तब इन्होंने अविश्वास प्रस्ताव पर बात की।
पात्रा ने इस मुद्दे को जातीय बताते हुए कहा कि आप एक जाट उपराष्ट्रपति के ऊपर इस तरह से आक्षेप लगा रहे हैं। आप उन्हें किसी न किसी तरह कलंकित करने की कोशिश कर रहे हैं। मैं आपको बता दूं कि एक किसान पुत्र और जाट कभी झुकता नहीं। जाट का सम्मान हिंदुस्तान में सदैव बरकरार और अडिग रहेगा।
ईवीएम के मुद्दे पर क्या बोले पात्रा?
पात्रा ने कहा कि ये दोनों खबरें विचलित करने वाली हैं और भारत के संविधान को कुचलने वाली हैं। कांग्रेस पार्टी और उसके कुछ साथियों ने तय किया है कि अब हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनाव नतीजों के बाद वे चुनाव आयोग और ईवीएम की प्रणाली को सुप्रीम कोर्ट में घसीटेंगे। मुझे तो आश्चर्य हो रहा है कि कांग्रेस बार बार ईवीएम को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाती है और बार बार पटखनी खाकर आती है। जब भी उसने चुनाव आयोग को सुप्रीम कोर्ट में घसीटने की कोशिश की है, तब तब फजीहत कांग्रेस की हुई है।
भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "23 नवंबर को जब महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव की गिनती हुई थी, उसके पश्चात चुनाव आयोग ने कहा था कि 288 विधानसभा सीटों पर 1440 वीवीपैट यूनिट लगाई गई हैं। हर विधानसभा में पांच वीवीपैट यूनिट और ईवीएम की गिनती में मिलान किया गया है और वह गिनती बिल्कुल ठीक निकली है। यानी ईवीएम के काम करने का तरीका ठीक है। चुनाव आयोग ने इस पूरी प्रक्रिया को सीसीटीवी में कैद कर के हमारे सामने रखा है। इसके बावजूद इस प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट जा रही है। यह दिखाता है कि कांग्रेस पार्टी के मन में संविधान के प्रति सम्मान नहीं।"
26 नवंबर को भी एक पीआईएल इसी मसले पर दाखिल किया गया था। तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आप जो ईवीएम का रोना आप रोते हैं, जीत जाएं तो सब ठीक है, हार जाएं तो ईवीएम का रोना। आप झारखंड में जीतें तो ईवीएम ठीक है। तेलंगाना में जीत जाएं तो ईवीएम ठीक है। बाकी आप यहां आकर केस करते हैं, हम इस याचिका को खारिज करते हैं।