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पलटवार: सावरकर के पोते बोले- सिर्फ गांधी राष्ट्रपिता नहीं, राउत ने कहा- सावरकर ने कभी माफी नहीं मांगी
Wed, 13 Oct 2021 06:53 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Wed, 13 Oct 2021 06:53 PM IST
सार
शिवसेना प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि राजनीति और कैद के दौरान अलग ही रणनीति अपनाई जाती है। अगर सावरकर ने ऐसी कोई रणनीति अपनाई तो फिर उसे माफी मांगना नहीं कहा जा सकता।
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वीर सावरकर पर राजनाथ के बयान का बचाव करने उतरीं भाजपा और शिवसेना।
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विस्तार
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की ओर से महात्मा गांधी और सावरकर को लेकर की गई टिप्पणी पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। जहां विपक्ष के नेताओं ने केंद्रीय मंत्री पर इतिहास को दोबारा लिखने का आरोप लगाया था, तो वहीं भाजपा और शिवसेना जैसे दलों ने राजनाथ के बयान को सही ठहराया। सावरकर के पोते ने इस विवाद के बीच यहां तक कह दिया कि महात्मा गांधी देश के राष्ट्रपिता ही नहीं थे। राजनाथ सिंह ने मंगलवार को सावरकर पर लिखी एक किताब के विमोचन कार्यक्रम के दौरान कहा था कि महात्मा गांधी के कहने पर वीर सावरकर ने अंग्रेजी शासन को दया याचिका दी थी।
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राजनाथ के बयान को लेकर क्या बोले सावरकर के पोते?
सावरकर के पोते रंजीत सावरकर ने इस पूरे विवाद के बीच कूदते हुए कहा, "मुझे नहीं लगता गांधी राष्ट्रपिता हैं। भारत जैसे देश में कोई एक राष्ट्रपिता नहीं हो सकता है, यहां हजारों ऐसे हैं जिन्हें भुला दिया गया है।"
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भाजपा-शिवसेना ने भी किया राजनाथ के बयान का बचाव
विपक्ष के आरोपों पर भाजपा सांसद राकेश सिन्हा ने राजनाथ के बयान का बचाव किया। उन्होंने अपने ट्वीट में कहा, "कांग्रेस सावरकर जी का विरोध करती है, जो ब्रिटिश प्रशासन के साथ कभी नहीं जुड़े और मातृभूमि के लिए सर्वोच्च बलिदान का उदाहरण प्रस्तुत किया। बहरहाल, कुछ लोग माउंटबेटन के घर पर नियमित रूप से रात्रिभोज करते थे।"
उधर इस मामले पर शिवसेना के प्रवक्ता संजय राउत ने कहा कि वीर सावरकर ने कभी भी अंग्रेजों से माफी नहीं मांगी थी। उन्होंने कहा कि एक ऐसा स्वतंत्रता सेनानी जो एक दशक से ज्यादा समय तक जेल में रहा हो, वह अपने मकसद को पूर्ण करने के लिए रणनीति अपना सकता है ताकि जेल से बाहर आए। राउत ने कहा कि राजनीति और कैद के दौरान अलग ही रणनीति अपनाई जाती है। अगर सावरकर ने ऐसी कोई रणनीति अपनाई तो फिर उसे माफी मांगना नहीं कहा जा सकता।
भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सावरकर के बारे में गांधी की एक टिप्पणी का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘वह बहुत समझदार हैं। वह बहादुर हैं, वह देशभक्त हैं। मौजूदा सरकार में निहित बुराई को उन्होंने मुझसे पहले देख लिया था। वह भारत से बहुत प्रेम करने के कारण अंडमान में हैं। वह सरकार में वह बड़े पद पर आसीन रहे होते।’’
क्या था राजनाथ सिंह का पूरा बयान?
राजनाथ सिंह ने मंगलवार को कहा था कि राष्ट्र नायकों के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के बारे में वाद-प्रतिवाद हो सकते हैं, लेकिन विचारधारा के चश्मे से देखकर वीर सावरकर के योगदान की उपेक्षा करना और उन्हें अपमानित करना माफ करने लायक और न्यायसंगत नहीं है। राजनाथ सिंह ने उदय माहूरकर और चिरायु पंडित की पुस्तक वीर सावरकर हु कुड हैव प्रीवेंटेड पार्टिशन के विमोचन कार्यक्रम में यह बात कही। उन्होंने यह भी कहा था कि महात्मा गांधी के कहने पर सावरकर ने अंग्रेजों के समक्ष दया याचिका दी थी।