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आरोपः बिना 'प्रश्न काल' चल रही दिल्ली विधानसभा, सत्र के पूर्व विधायकों को नहीं मिलता नोटिस
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दिल्ली विधानसभा (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो :
सोशल मीडिया
विस्तार
संसद और विधानसभाओं में देश-राज्यों के लिए कानून बनाए जाते हैं। लेकिन भाजपा ने आरोप लगाया है कि दिल्ली विधानसभा स्वयं बिना नियमों के चल रही है। पार्टी के अनुसार, दिल्ली सरकार विधानसभा का सत्र बुलाने के लिए नियमों का पालन नहीं करती। सदन बुलाए जाने के पहले विधायकों को 15 दिन पहले नोटिस दिया जाना चाहिए, लेकिन उन्हें कोई सूचना नहीं दी जाती और अचानक एक-दो दिन पूर्व की आपात सूचना पर सत्र आयोजित करा लिया जाता है।
भाजपा ने दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा और विधायकों के साथ उपराज्यपाल से मुलाकात कर कहा है कि दिल्ली विधानसभा सत्र बुलाने के लिए नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है। शरद, मानसून सत्र को भी अनिवार्य रूप से बुलाया जाना चाहिए, लेकिन दिल्ली सरकार ऐसा नहीं कर रही है। आरोप है कि सरकार ने 16-17 अगस्त को बुलाए विशेष सत्र में कोई प्रश्न काल नहीं रख रही है जिससे वे अपने अधिकार से वंचित रह जाएंगे।
यह आरोप इस संदर्भ में बेहद गंभीर माना जा रहा है कि संसद-विधानसभा में विपक्षी दल सरकार से प्रश्न पूछने का काम करते हैं। लेकिन यदि सत्र में कोई प्रश्नकाल नहीं रखा जाएगा तो वे जनता से जुड़े मुद्दो पर सरकार से कोई सवाल नहीं पूछ सकेंगे। इससे सरकार की जिम्मेदारी तय करने में भी कमी आ सकती है। यही कारण है कि सत्र बुलाने के निय़मों को लेकर टकराव बढ़ सकता है।
सत्र बुलाने के अधिकार को लेकर भी हुआ था विवाद
इसके पहले भी दिल्ली विधानसभा का सत्र बुलाने को लेकर भाजपा-आम आदमी पार्टी में विवाद हो गया था। दिल्ली सरकार ने आरोप लगाया था कि उपराज्यपाल सरकार के चाहने के बाद भी सत्र बुलाने का नोटिस नहीं जारी कर रहे थे। इससे सरकार आवश्यक मुद्दों पर चर्चा नहीं करा पा रही थी। सरकार ने इसे उपराज्यपाल का राजनीति से प्रेरित होकर काम करने का आरोप लगाया था।
बाद में दबाव पड़ने के बाद जब सत्र बुलाया गया तब उसका सत्रावसान नहीं किया गया। सत्रावसान न होने के कारण दुबारा सदन की बैठक बुलाने का अधिकार विधानसभा अध्यक्ष के पास ही रह गया। यही कारण है कि दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष के माध्यम से सरकार कभी भी सत्र बुला लेती है। भाजपा इसे असंवैधानिक बता रही है। पार्टी का कहना है कि अलग-अलग मौसम में सत्र बुलाया जाना चाहिए, लेकिन सरकार ऐसा न कर अपनी जिम्मेदारी और प्रश्नों से बचने का काम कर रही है।