आचार्य रजनीश चंद्र मोहन 'ओशो' ने अपने विचारों के आधार पर एक अलग दुनिया गढ़ी। मुक्त सेक्स को लेकर ओशो की विचारधारा पर हमेशा सवाल ही उठते रहे। उन्होंने सेक्स को समाधि का रास्ता बताया। उनकी विचारधारा समाज को चुनौती देती है। जो लोग ओशो के बारे में ज्यादा नहीं जानते उनके लिए ओशो का नाम दुनियाभर के प्रसिद्ध बाबाओं और गुरुओं में से ही एक हैं। उनके लिए ओशो की पहचान एक ऐसी विवादित शख्सियत की है, जिन्होंने हमेशा बेरोकटोक जीवन और मुक्त सेक्स जैसी बातों का समर्थन किया। आज उनके जन्मदिन के मौके पर आपको जरूर जानना चाहिए कि ओशो की आखिर संभोग (सेक्स) को लेकर क्या विचाधारा थी। ओशो ने सेक्स को ही समाधि तक पहुंचने की सीढ़ी बता दिया।
संभोग के बारे में ओशो के विचार
टीम डिजिटल / अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Mon, 12 Dec 2016 03:19 PM IST
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'सेक्स से ज्यादा महत्वपूर्ण कुछ नहीं है'
'प्रेम की सारी यात्रा का प्राथमिक बिंदु सेक्स है'
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