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पाकिस्तानी सेनाप्रमुख से बोले जनरल रावत, शांति वार्ता पर जो मेरा वो सरकार का पक्ष
Thu, 24 Jan 2019 09:10 AM IST
अमर शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अमर शर्मा
Updated Thu, 24 Jan 2019 09:10 AM IST
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बिपिन रावत
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भारतीय सेनाध्यक्ष जनरल बिपिन रावत का कहना है कि उनके पाकिस्तानी समकक्ष जनरल कमर बाजवा को भारत सरकार के जरिए ही बातचीत करनी होगी। उन्होंने उन खबरों को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि पिछले साल पाकिस्तान सेनाप्रमुख ने उन्हें बातचीत का प्रस्ताव दिया था। बुधवार को उन्होंने कहा, 'लेफ्टिनेंट जनरल कमर बाजवा भारत सरकार के जरिए मुझसे संपर्क कर सकते हैं और हम यह फैसला करेंगे कि बातचीत की जानी चाहिए या नहीं। मैं न हां बोल रहा हूं और न नहीं।'
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जनरल रावत ने कहा, 'मैं एक सैनिक हूं और सीधी बात करता हूं। मुझसे जब संपर्क किया जाएगा तभी मैं फैसला लूंगा।' उन्होंने इस ओर इशारा किया कि आतंक और वार्ता साथ नहीं हो सकती। कई मीडिया रिपोर्ट्स जिसमें न्यूयॉर्क टाइम्स भी शामिल था उसमें कहा गया था कि पश्चिमी कूटनीतिक और पाकिस्तानी स्रोतों के अनुसार, जनरल बाजवा 'पाकिस्तान के अंतर्राष्ट्रीय अलगाव और लड़खड़ाती हुई अर्थव्यवस्था को लेकर चिंतित हैं। शांति वार्ता को फिर से शुरू करने के लिए वह भारत पहुंचे लेकिन उन्हें उत्साहहीन प्रतिक्रिया मिली।'
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अखबार की रिपोर्ट में कहा गया है कि दोनों सेनाध्यक्ष एक दशक तक संयुक्त राष्ट्र शांति सेना में अपनी सेवा दे चुके हैं। रावत ने कहा, 'मैं भारतीय सेना का अध्यक्ष हूं। सरकार का पक्ष मेरा पक्ष है। बहुत से ऐसे सवाल हैं जिनके जवाब दिए जाने बाकी हैं। मैं उनसे पूछना चाहता हूं कि क्या वह (जनरल बाजवा) हाफिज सईद और मसूद अजहर के खिलाफ कार्रवाई करेंगे।' भारत लंबे समय से कह रहा है कि सईद और अजहर जो आतंकी संगठन लशकर-ए-तैयबा (एलईटी) और जैश-ए-मोहम्मद (जेईएम) के मुखिया हैं वह भारत में आतंकवाद फैलाते हैं, वह पाकिस्तानी सेना के प्रतिनिधि हैं।
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2008 में हुए मुंबई हमलों के पीछे एलईटी का और 2016 में वायुसेना के पठानकोट एयरबेस पर हुए हमले के पीछे जेईएम का हाथ था। कई आतंकी हमलों की वजह से भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली शांति वार्ता स्थगित कर दी गई। भारत का साफ कहना है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते हैं। सेनाध्यक्ष ने कहा, 'जब कश्मीर में कुछ गलत होता है तो आप सभी भारतीय सेना को तुरंत दोषी ठहराते हैं। क्यों पाकिस्तानी सेना को दोषी नहीं ठहराते जो लोगों को उकसा रही है?'