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Parliament: राज्यसभा में पास किया गया CEC-EC की नियुक्ति वाला संसोधन विधेयक; जानें इसमें क्या-क्या

Tue, 12 Dec 2023 06:11 PM IST
शिव शरण शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Tue, 12 Dec 2023 06:11 PM IST
सार

मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023 को पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि विधेयक 1991 के अधिनियम को बदलने के लिए 10 अगस्त को उच्च सदन में पेश किया गया था।

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Bill to appoint CEC and ECs moved in Rajya Sabha know all updates in hindi
Parliament winter session - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति और सेवा शर्तों में बदलाव के लिए सरकार के लिए मंगलवार को राज्यसभा में पेश किया गया संसोधन विधेयक पारित कर दिया गया है। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा पेश किया गया विधेयक चुनाव आयोग (चुनाव आयुक्तों की सेवा शर्तों और व्यवसाय संचालन) अधिनियम 1991 का स्थान लेगा। यह मुख्य चुनाव आयुक्तों और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति, वेतन और उन्हें हटाने के प्रावधान करता है।

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सदन में पेश करते हुए कानून मंत्री ने कहा कि यह कानून इस साल मार्च में एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मद्देनजर लाया गया है। वहीं, कांग्रेस ने इस विधेयक को संविधान का उल्लंघन करने वाला बिल करार दिया है। कांग्रेस ने इसका विरोध करते हुए आरोप लगाया कि प्रस्तावित बिल चुनाव आयोग को कार्यपालिका के अधीन कर देगा। 
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मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यालय की अवधि) विधेयक, 2023 को पेश करते हुए केंद्रीय कानून मंत्री ने कहा कि विधेयक 1991 के अधिनियम को बदलने के लिए 10 अगस्त को उच्च सदन में पेश किया गया था। यह बहस और पारित होने के लिए अभी लंबित है। पूर्व चुनाव आयुक्तों और सदन में इसका व्यापक विरोध किया गया था। जिसके के चलते इसे फिर से सदन के समक्ष लाया गया है।
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नियुक्ति के लिए नाम तय करने के लिए समिति बनाने का प्रस्ताव
उन्होंने बताया कि अब तक इन पदों पर नियुक्तियों के  लिए नाम सरकार तय करती थी, लेकिन अब इसके लिए एक खोज और चयन समिति के गठन  का प्रस्ताव विधेयक में शामिल किया गया है। इस संशोधन विधेयक के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों की नियुक्ति के लिए कैबिनेट सचिव के नेतृत्व में एक सर्च कमेटी बनाई जाएगी, जो कि पांच नामों को भेजेगी। इसके अलावा, एक चयन समिति भी बनाई जाएगी। प्रधानमंत्री इस चयन समिति के प्रमुख होंगे। उनके अलावा नेता विपक्ष लोकसभा, या सबसे बड़े राजनीतिक दल के व्यक्ति, और कैबिनेट मंत्री भी इसमें होंगे। यह चयन समिति सर्च कमेटी के अलावा अन्य नामों पर भी विचार कर सकेगी। 

नए विधेयक में कार्यकाल और पुनर्नियुक्ति के लिए भी प्रावधान किया गया है। इसमें प्रस्ताव दिया गया है कि चुनाव आयोग के सदस्य छह साल तक या 65 वर्ष की आयु तक इस पद पर रह सकेंगे। एक सदस्य को एक ही बार नियुक्ति दी जा सकेगी। यदि कोई ईसी सीईसी के रूप में नियुक्ति पाता है तब भी उनका कार्यकाल केवल छह साल के लिए होगा। साथ ही इसमें  सीईसी और ईसी को हटाने के लिए भी प्रावधान किया गया है। इसके मुताबिक, सीईसी  को सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश की तरह हटाया जा सकेगा। वहीं, ईसी को सीईसी की सिफारिश करके हटाया जा सकेगा।

इस साल अगस्त में राज्यसभा में पेश किए गए इस विधेयक में सीईसी और ईसी की स्थिति को कैबिनेट सचिव के बराबर लाने का प्रस्ताव किया गया था। इसके अलावा प्रस्तावित आधिकारिक संशोधन में कहा गया है कि सीईसी और अन्य आयुक्तों को जो वेतन दिया जाएगा वह सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के वेतन के बराबर होगा।


कांग्रेस ने जताया विरोध
वहीं, कांग्रेस ने इस विधेयक पर प्रतिक्रिया दी है। वरिष्ठ कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा कि प्रस्तावित कानून संविधान की मूल भावना को पूरी तरह से नकारता है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 का  उल्लंघन करता है। उन्होंने कहा कि यह चुनाव आयोग को पूरी तरह से नकारता है और उसे कार्यपालिका के अधिकार के अधीन कर देता है। यही कारण है कि यह कानून एक मृत बच्चे की तरह है।

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