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बिलकिस बानो केसः सभी दोषी करीब 1000 दिन रहे बाहर, इस दौरान एक दोषी पर शीलभंग मामले में चार्जशीट भी हुई दाखिल
Wed, 19 Oct 2022 09:22 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Amit Mandal
Updated Wed, 19 Oct 2022 09:22 PM IST
सार
11 आरोपियों में से मितेश चमनलाल भट्ट पर आईपीसी की धारा 354 (महिला का शील भंग), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था।
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बिलकिस बानो
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
बिलकिस बानो मामले के दोषी आजीवन कारावास की सजा पर रिहा होने से पहले ही लगभग 1,000 दिनों के लिए जेल से बाहर थे। और इनमें से एक को पैरोल पर रहते हुए 2020 में एक महिला के शील भंग करने के आरोप में चार्जशीट भी किया गया था। गुजरात सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी दी है। राज्य सरकार के एक हलफनामे में कहा गया है कि सभी दोषियों को उनकी कैद के दौरान विभिन्न बिंदुओं पर पैरोल, फरलो और यहां तक कि अस्थायी जमानत दी गई थी, जिसमें अधिकतम 1,576 दिन और सबसे कम 998 दिन थे।
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मितेश चमनलाल भट्ट पर महिला के शील भंग में चार्जशीट दाखिल
11 आरोपियों में से मितेश चमनलाल भट्ट पर आईपीसी की धारा 354 (महिला का शील भंग), 504 (शांति भंग करने के इरादे से अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत अपराधों के लिए मामला दर्ज किया गया था। इसमें 7 साल की सजा या जुर्माना या दोनों प्रावधान हैं। भट्ट (57) के संबंध में ये जानकारी दाहोद के कलेक्टर-सह-जिला मजिस्ट्रेट ने अपने पत्र दिनांक 25 मई, 2022 में सीआरपीसी की धारा 432-433 ए के तहत कैदी की समयपूर्व रिहाई के बारे में अपनी राय रखते हुए दी थी। ये धाराएं दोषियों की सजा निलंबन और सजा में छूट से संबंधित हैं।
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कलेक्टर ने दी थी अपनी रिपोर्ट
कलेक्टर ने आगे कहा, दाहोद जिले के सभी थानों के अभिलेख तलब किए जाने पर मितेश चिमनलाल भट्ट के पैरोल फरलो रिहाई के दौरान न तो कोई अभ्यावेदन और न ही कोई ज्ञापन और न ही कोई प्राथमिकी दर्ज पाई गई है। इससे हिंदू-मुसलमान के बीच सांप्रदायिक संघर्ष हो सकता है। पुलिस उपनिरीक्षक, रणधीकपुर और लिमखेड़ा के पुलिस उपाधीक्षक की राय को ध्यान में रखते हुए भट्ट की समयपूर्व रिहाई पर कोई आपत्ति नहीं जताई गई। राज्य सरकार ने 2002 के मामले में सजा की छूट और दोषियों की रिहाई को चुनौती देने वाली माकपा नेता सुभाषिनी अली और अन्य द्वारा दायर एक जनहित याचिका के जवाब में अपना हलफनामा दायर किया था।
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हलफनामे में कहा गया है कि जसवंत चतुरभाई नई सहित 11 दोषियों ने 950 दिनों की पैरोल और 219 दिनों की फरलो (कुल 1169 दिन), केशरभाई खिमाभाई वहोनिया (972+203: कुल 1175 दिन), गोविंदभाई अखंभाई नई (986+216 कुल 1202 दिन)) बाहर रहने का आनंद लिया था। शैलेशभाई चिमनलाल भट्ट (934+163 + 6 दिन की अस्थायी जमानत: कुल 1103 दिन), बिपिनचंद्र कनैयालाल जोशी (909+170: कुल 1079 दिन) बाहर रहे।