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बिलकिस बानो केस: याचिकाओं पर आज सुनवाई करेगा सुप्रीम कोर्ट, सभी 11 दोषियों की सजा माफी को दी गई है चुनौती

Thu, 31 Aug 2023 02:00 AM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: निर्मल कांत Updated Thu, 31 Aug 2023 02:00 AM IST
सार

Bilkis Bano Case: उच्चतम न्यायालय गुरुवार को फिर से उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के सभी 11 दोषियों को दी गई छूट को चुनौती दी गई है। 

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Bilkis Bano case: SC to resume hearing on Aug 31 on batch of pleas challenging remission to convicts
सुप्रीम कोर्ट - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्चतम न्यायालय गुरुवार को फिर से उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें 2002 के गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो से सामूहिक दुष्कर्म और उसके परिवार के सात सदस्यों की हत्या के सभी 11 दोषियों को दी गई छूट को चुनौती दी गई है। 

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न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ दोषियों को दी गई सजा माफी को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अंतिम दलीलें सुन रही है और वह सातवें दिन आरोपियों की दलीलें सुनेगी जो अपनी रिहाई का बचाव कर रहे हैं। 

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शीर्ष अदालत ने 24 अगस्त को दलीलों पर सुनवाई करते हुए कहा था, 'कानून को एक महान पेशा माना जाता है।' उसने इस बात पर हैरानी जताई थी कि दोषी ठहराए जाने के बाद सजा में छूट के बावजूद एक दोषी कैसे कानून का अभ्यास कर सकता है।

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यह मुद्दा अदालत के संज्ञान में तब आया जब वकील ऋषि मल्होत्रा ने राधेश्याम शाह को दी गई माफी का बचाव करते हुए पीठ से कहा कि उनके मुवक्किल 15 साल से अधिक की वास्तविक सजा काट चुके हैं और राज्य सरकार ने उनके आचरण का संज्ञान लेने के बाद उन्हें राहत दी है।

गुजरात सरकार ने मामले के सभी 11 दोषियों को 1992 की माफी नीति के आधार पर रिहा किया था, न कि 2014 में अपनाई गई नीति के आधार पर, जो अब लागू है। 2014 की नीति के तहत राज्य सीबीआई द्वारा जांच किए गए अपराध के लिए छूट नहीं दे सकता है या जहां लोगों को दुष्कर्म या सामूहिक दुष्कर्म के साथ हत्या का दोषी ठहराया गया है।

बिलकिस बानो द्वारा दायर याचिका के अलावा माकपा नेता सुभाषिनी अली, स्वतंत्र पत्रकार रेवती लौल और लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति रूप रेखा वर्मा द्वारा दायर याचिका सहित कई अन्य जनहित याचिकाओं में छूट को चुनौती दी गई है। तृणमूल कांग्रेस की लोकसभा सांसद महुआ मोइत्रा ने भी सजा माफी के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की है।
 

बिलकिस बानो 21 साल की थीं और पांच महीने की गर्भवती थीं, जब गोधरा ट्रेन अग्निकांड के बाद भड़के सांप्रदायिक दंगों के डर से भागते समय उनके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। दंगों में मारे गए उनके परिवार के सात सदस्यों में उनकी तीन साल की बेटी भी शामिल थी।

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