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Bihar Election: क्या अमित शाह ने नीतीश कुमार के नाम पर लगा दी मुहर? बेगूसराय में वंशवाद पर भी साधा निशाना

Wed, 29 Oct 2025 06:58 PM IST
राहुल कुमार विशेष प्रतिनिधि, पटना
विशेष प्रतिनिधि, पटना Published by: राहुल कुमार Updated Wed, 29 Oct 2025 06:58 PM IST
सार

गृह मंत्री अमित शाह ने बेगूसराय की रैली में एक तीर में दो निशाने साधे। पहला विपक्ष के वंशवाद पर सीधा हमला और नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने पर स्पष्ट मुहर। शाह ने बेगूसराय की जनसभा से साफ कर दिया- बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी भरी हुई है” यह सिर्फ विपक्ष को नहीं बल्कि सहयोगियों और बिहार की जनता को संदेश था।

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Bihar Election Has Amit Shah approved Nitish Kumar's name for cm face, He also targeted dynasty politics
गृह मंत्री अमित शाह। - फोटो : @BJP4India

विस्तार

बिहार में महागठंधन की सियासी घेरेबंदी ने भाजपा को रणनीति बदलने पर मजबूर कर दिया। एनडीए के अगले मुख्यमंत्री नीतीश होंगे या नहीं, इस भ्रम से होने वाले नुकसान को भांपते हुए भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने नीतीश कुमार के नाम पर गहराया कुहासा हटा दिया।

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गृह मंत्री अमित शाह ने बेगूसराय की रैली में एक तीर में दो निशाने साधे। पहला विपक्ष के वंशवाद पर सीधा हमला और नीतीश कुमार के मुख्यमंत्री बने रहने पर स्पष्ट मुहर। शाह ने मंच से कहा  कि “लालू जी चाहते हैं कि उनका बेटा मुख्यमंत्री बने और सोनिया जी चाहती हैं कि उनका बेटा प्रधानमंत्री बने। मैं दोनों से कहना चाहता हूं कि बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी खाली नहीं है और दिल्ली में प्रधानमंत्री की कुर्सी भी खाली नहीं है। आपके बेटों का नंबर अब नहीं लगने वाला।”
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उनके इस बयान ने न केवल महागठबंधन के आरोपों की धार कुंद हो गई बल्कि, भाजपा-जदयू गठबंधन के भीतर उठ रही तमाम अटकलों पर भी विराम लगा दिया कि आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री चेहरा कौन होगा। भाजपा के सूत्रों ने साफ कहा कि रही सही कसर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब बिहार में रैलियां करेंगे तो और पूरी कर देंगे। वह महागठबंधन को इस आधार पर कोई भ्रम नहीं फैलाने देंगे।
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नीतीश पर भरोसे की मोहर, अटकलों पर विराम
अमित शाह का यह बयान वस्तुतः उस सियासी सुगबुगाहट का जवाब था, जो कुछ हफ्तों से चल रही थी, क्या 2025 के विधानसभा चुनाव में एनडीए नीतीश कुमार को ही चेहरा बनाए रखेगा या कोई नया नेतृत्व उभरेगा? शाह ने बेगूसराय की जनसभा से साफ कर दिया-“बिहार में मुख्यमंत्री की कुर्सी भरी हुई है” यह सिर्फ़ विपक्ष को नहीं बल्कि सहयोगियों और बिहार की जनता को संदेश था।

नीतीश कुमार, जिन्होंने बीते एक दशक में कई बार पलटी मारी। वह अब फिर भाजपा के साथ खड़े हैं। शाह का यह भरोसा जताना कि “सीएम पद खाली नहीं” यानी भाजपा ने नीतीश के नेतृत्व को चुनाव तक बनाए रखने की रणनीति पर मुहर लगा दी है।


अमित शाह ने भाषण में बार-बार यह रेखांकित किया कि बिहार और देश दोनों को अब ‘परिवार की राजनीति’ नहीं, बल्कि ‘काम और स्थिरता की राजनीति’ चाहिए। उनके शब्दों में  “एक तरफ लालू-तेजस्वी की जोड़ी है, जिनके लिए सत्ता परिवार की विरासत है। दूसरी ओर मोदी-नीतीश की जोड़ी है, जिनके लिए सत्ता जनता की सेवा का माध्यम है।

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