Seat ka samikaran: हरलाखी में 35 साल पहले मिली थी कांग्रेस को आखिरी जीत, भाजपा को अब तक खाता खुलने का इंतजार
बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज हरलाखी विधानसभा सीट की बात करेंगे। इस सीट पर 2020 में जदयू के सुधांशु शेखर को जीत मिली थी।
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बिहार विधानसभा चुनावों में तारीखों के इंतजार से ज्यादा इंतजार सीट बंटवारे को लेकर हो रहा है। सियासी खींचतान के बीच अमर उजाला की बिहार की विधानसभा सीटों से जुड़ी खास सीरीज ‘सीट का समीकरण’ में आज हरलाखी विधानसभा सीट की बात करेंगे।
पहले जानते है हरलाखी सीट के बारे में
बिहार के 38 जिलों में से एक मधुबनी जिला भी है। जिले में कुल 10 विधानसभा सीटें आती हैं। इनमें हरलाखी, बेनीपट्टी, खजौली, बाबूबरही, बिस्फी, मधुबनी, राजनगर (एससी), झंझारपुर, फुलपरास, लौकहा विधानसभा सीटें शामिल हैं। हरलाखी विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र का हिस्सा है। मधुबनी लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र में कुल छह विधानसभा सीटें आती हैं, जिसमें हरलाखी, बेनीपट्टी, बिस्फी, मधुबनी यह चार मधुबनी जिले, वहीं केवटी और जाले दरभंगा जिले का हिस्सा है। हरलाखी सीट पर सबसे पहले चुनाव 1952 में हुए थे।

1952 में पहली बार हुए चुनाव
1952 में इस सीट पर पहली बार चुनाव हुए। तब यहां से कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत मिली थी। कांग्रेस की जनक किशोर देवी ने निर्दलीय उम्मीदवार राजेंद्र नारायण चौधरी को 5872 वोट से हरा दिया था।
1962 में सीपीआई को जीत
1957 में इस सीट पर चुनाव नहीं हुए। यहां सीधा 1962 में चुनाव हुए। इस चुनाव में भाकपा के बैद्यनाथ यादव को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के रामदुलारी शास्त्री को 1873 वोट से हरा दिया था।
1967 में फिर एक बार भाकपा के बैद्यनाथ यादव को जीत मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के डी.एन. यादव को 7094 वोट से हरा दिया था।
कांग्रेस के मिली जीत
1969 में कांग्रेस के जीत मिली थी। कांग्रेस के शकूर अहमद ने भाकपा के बैद्यनाथ यादव को 4925 वोट से हरा दिया था।
1972 में एक बार फिर कांग्रेस के शकूर अहमद को जीत मिली थी। उन्होंने भाकपा बैद्यनाथ यादव को 2260 वोट से हरा दिया था।

फिर सीपीआई को मिली जीत
1977 में एक बार फिर भाकपा के बैद्यनाथ यादव को जीत मिली थी। उन्होंने तत्कालीन विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार शकूर अहमद को हराया।
1980 में कांग्रेस को मिली जीत
इस चुनाव में कांग्रेस (आई) को जीत मिली थी। कांग्रेस (आई) के मिथिलेश कुमार पांडे को भाकपा के बैद्यनाथ यादव को 138 वोट से हरा दिया था।
1985 के चुनाव में एक बार फिर कांग्रेस के मिथिलेश कुमार पांडे ने इस सीट को जीत लिया। उन्होंने भाकपा के बैद्यनाथ यादव को 15166 वोट से हरा दिया था।
1990: कांग्रेस के उम्मीदवार को जीत
1990 के चुनाव में कांग्रेस की वीणा देवी को जीत मिली थी। उन्होंने भाकपा के राम नरेश पांडे को 6020 वोट से हरा दिया था।
1995 में सीपीआई को जीत
1990 में आए चुनावों के नतीजे इस चुनाव में पलट गए थे। 1995 में भाकपा के राम नरेश पांडे को जीत मिली थी, उन्होंने कांग्रेस के वीणा पांडे को 32525 वोट से हरा दिया था।
2000 में राजद को मिली जीत
इस चुनाव में राजद को जीत मिली थी। राजद के सीताराम यादव ने भाकपा के रामनरेश पांडे को 534 वोट से हरा दिया था।
2005 में भाकपा को मिली जीत
2005 में बिहार में दो बार चुनाव हुए थे। इन दोनों ही चुनावों में भाकपा के राम नरेश पांडे को जीत मिली थी।
पहली बार चुनाव फरवरी 2005 में हुए थे। इस चुनाव में भाकपा के रामनरेश पांडे ने राजद के सीता राम यादव को 6858 वोट से हरा दिया था।
2005 में दूसरी बार चुनाव अक्तूबर में हुए थे। इसमें एक बार फिर भाकपा के रामनरेश पांडे ने राजद के सीता राम यादव को 2863 वोट से हरा दिया था।
2010 में जदयू को जीत
इस चुनाव में जदयू को जीत मिली थी। जदयू के शालिग्राम यादव ने भाकपा के रामनरेश पांडे को 6659 वोट से हरा दिया था।
2015 में बीएलएसपी को जीत
इस चुनाव में रालोसपा के बसंत कुमार को मिली थी। उन्होंने कांग्रेस के मोहम्मद शब्बीर को 3892 वोट से हरा दिया था।
2016 में बसंत कुमार के निधन के कारण इस सीट पर उपचुनाव हुए। इस चुनाव में बसंत कुमार के बेटे सुधांशु शेखर को जीत मिली।

2020 जदयू को जीत
इस चुनाव की बात करें तो सुधांशु शेखर एक बार फिर जीते, लेकिन इस बार पार्टी अलग थी। वे जदयू से चुनाव लड़ रहे थे। उन्होंने भाकपा के राम नरेश पांडे को 17593 वोट से हरा दिया था।