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Bihar: क्या कांग्रेस को इतनी सीटों पर करना पड़ सकता है संतोष? महागठबंधन का यह है सीट शेयरिंग का फार्मूला
Mon, 06 Oct 2025 02:49 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Mon, 06 Oct 2025 02:49 PM IST
सार
कांग्रेस पिछली बार 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसे 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। इस बार छोटे दलों के दबाव के बीच कांग्रेस की सीटें घटने के आसार हैं। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस की सीटें 70 से घटकर 50-55 पर आ सकती हैं।
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नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और राहुल गांधी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर चुनावी बिगुल बजा गया है। इस बीच सत्तारूढ़ भाजपा-जेदयू और विपक्षी महागठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर जो आजमाइश तेज हो चली है। महागठबंधन के घटक दलों की रविवार को राष्ट्रीय जनता दल के कार्यालय में बैठक हुई। बैठक के बाद कांग्रेस, राजद या अन्य घटक दलों के नेताओं ने सब कुछ ठीक बताया। लेकिन गठबंधन के भीतर सीटों को लेकर खींचतान होने की बातें भी सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि, महागठबंधन में सीटों के बंटवारे की गुत्थी लगभग सुलझ गई है। लेकिन कुछ सीटों पर कांग्रेस और राजद अभी एकमत नहीं है। 8 से 10 सीटों को लेकर पेंच फंसा हुआ हैं। हालांकि बुधवार को होने वाली बैठक में इसका भी समाधान निकलने की उम्मीद है। इसके बाद महागठबंधन सीट बंटवारे की औपचारिक घोषणा करेगा।
कांग्रेस पिछली बार 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसे 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। इस बार छोटे दलों के दबाव के बीच कांग्रेस की सीटें घटने के आसार हैं। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस की सीटें 70 से घटकर 50-55 पर आ सकती हैं। बिहार कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि,कांग्रेस ने संभावित जिताऊ सीट को लेकर एक सर्वे करवाया है। लेकिन इनमें कुछ सीटें ऐसी है जो अभी राजद के हिस्से में है। कांग्रेस ने समीकरणों के आधार पर इन सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की हैं। पार्टी की कोशिश है कि कम सीटों के बदले में उसे जिताऊ सीटें मिल जाए। ताकि पार्टी का प्रदर्शन चुनाव में सुधर सके।
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कांग्रेस पिछली बार 70 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन उसे 19 सीटों पर ही जीत मिली थी। इस बार छोटे दलों के दबाव के बीच कांग्रेस की सीटें घटने के आसार हैं। ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस की सीटें 70 से घटकर 50-55 पर आ सकती हैं। बिहार कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि,कांग्रेस ने संभावित जिताऊ सीट को लेकर एक सर्वे करवाया है। लेकिन इनमें कुछ सीटें ऐसी है जो अभी राजद के हिस्से में है। कांग्रेस ने समीकरणों के आधार पर इन सीटों पर अपनी दावेदारी पेश की हैं। पार्टी की कोशिश है कि कम सीटों के बदले में उसे जिताऊ सीटें मिल जाए। ताकि पार्टी का प्रदर्शन चुनाव में सुधर सके।
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इस बीच रविवार को महागठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर राजद नेता तेजस्वी यादव की अध्यक्षता में समन्वय समिति की बैठक हुई। तीन घंटे चली बैठक में सीट बंटवारे के साथ साथ सभी दलों के संभावित प्रत्याशियों को लेकर भी विचार विमर्श हुआ। इस बैठक में यह सहमति बनी कि पिछली बार जीती हुई और नंबर दो की हैसियत वाली सीटें उसी दल के पास रहेगी। हालांकि इनमें से चार से पांच सीटों पर फेरबदल देखने को मिल सकता है। रविवार को इस बैठक में राजद की ओर से सांसद संजय यादव, प्रदेश महासचिव रणविजय साहू, पूर्व मंत्री आलोक मेहता, कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरु, प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ,वीआईपी नेता मुकेश सहनी, माले के राज्य सचिव कुणाल, भाकपा के राज्य सचिव रामनरेश पांडेय, माकपा के राज्य सचिव ललन चौधरी और विधायक अजय कुमार आदि उपस्थित रहे।
सीट शेयरिंग पर इन फॉर्मूले पर बन सकती है बात
इस बैठक के बाद महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर दो फॉर्मूला सामने आए है। इनमें किसी एक पर मुहर लग सकती है। राज्य में विधानसभा की 243 सीटें है। पहले फार्मूले के तहत आरजेडी 138, कांग्रेस 52, वाम दल 35,वीआईपी पार्टी 15, आरएलजेपी 2, जेएमएम को 1 सीटें दी जा सकती हैं। जबकि दूसरे फॉर्मूले के तहत आरजेडी 130, कांग्रेस 55, वाम दल 35, वीआईपी 18, आरएलजेपी 3, जेएमएम को 2 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम का कहना है कि गठबंधन में सभी की हिस्सेदारी का सम्मान किया जाएगा। इस समय सभी की हिस्सेदारी है और सभी की हिस्सेदारी के अनुसार हम काम करेंगे। हम सब मिलकर एक निष्कर्ष पर निकलेंगे, जो आज भी निकल सकता है या एक-दो दिन में भी। महागठबंधन में सभी दल एकजुट हैं और साथ मिलकर चुनाव में बेहतर परिणाम देंगे।
इस बैठक के बाद महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर दो फॉर्मूला सामने आए है। इनमें किसी एक पर मुहर लग सकती है। राज्य में विधानसभा की 243 सीटें है। पहले फार्मूले के तहत आरजेडी 138, कांग्रेस 52, वाम दल 35,वीआईपी पार्टी 15, आरएलजेपी 2, जेएमएम को 1 सीटें दी जा सकती हैं। जबकि दूसरे फॉर्मूले के तहत आरजेडी 130, कांग्रेस 55, वाम दल 35, वीआईपी 18, आरएलजेपी 3, जेएमएम को 2 सीटें मिल सकती हैं। कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम का कहना है कि गठबंधन में सभी की हिस्सेदारी का सम्मान किया जाएगा। इस समय सभी की हिस्सेदारी है और सभी की हिस्सेदारी के अनुसार हम काम करेंगे। हम सब मिलकर एक निष्कर्ष पर निकलेंगे, जो आज भी निकल सकता है या एक-दो दिन में भी। महागठबंधन में सभी दल एकजुट हैं और साथ मिलकर चुनाव में बेहतर परिणाम देंगे।
वाम दल भी मांग रहे ज्यादा सीट
इस बीच महागठबंधन में शामिल वाम दल भी ज्यादा सीटों की डिमांड करते हुए नजर आ रहे है। सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) ने मिलकर पिछली बार 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन्हें 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाकपा (माले) ने 19 लड़ी सीटों में से 12 सीटें जीती थी। इसी आधार पर वाम दल चुनावों में ज्यादा सीटों की डिमांड करते हुए नजर आ रहे है। विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की (आरएलजेपी) और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को भी कुछ सीटें देनी पड़ सकती हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि राजद की सीटों का आंकड़ा 115 से 120 के आसपास रह सकता है।
इस बीच महागठबंधन में शामिल वाम दल भी ज्यादा सीटों की डिमांड करते हुए नजर आ रहे है। सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई (एमएल) ने मिलकर पिछली बार 29 सीटों पर चुनाव लड़ा था। उन्हें 16 सीटों पर जीत हासिल हुई थी। भाकपा (माले) ने 19 लड़ी सीटों में से 12 सीटें जीती थी। इसी आधार पर वाम दल चुनावों में ज्यादा सीटों की डिमांड करते हुए नजर आ रहे है। विकासशील इंसान पार्टी के मुकेश साहनी के अलावा पूर्व केंद्रीय मंत्री पशुपति पारस की (आरएलजेपी) और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झामुमो को भी कुछ सीटें देनी पड़ सकती हैं। ऐसे में उम्मीद की जा रही है कि राजद की सीटों का आंकड़ा 115 से 120 के आसपास रह सकता है।
महागठबंधन में सीएम फेस साफ नहीं
महागठबंधन में सीएम का चेहरा अभी तक साफ नहीं हैं। राजद तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस बता रही है। खुद तेजस्वी अपने को महागठबंधन का सीएम फेस बता चुके हैं। वीआईपी और वाम दलों ने इसका समर्थन भी किया है, लेकिन कांग्रेस ने कभी भी खुलकर इस पर हामी नहीं भरी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता, जैसे सचिन पायलट और कृष्णा अल्लावरु भी इस मुद्दे पर गोलमोल जवाब देते नजर आए। इन नेताओं का कहना है, मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव जीतने के बाद गठबंधन द्वारा सामूहिक रूप से तय किया जाएगा।
महागठबंधन में सीएम का चेहरा अभी तक साफ नहीं हैं। राजद तेजस्वी यादव को महागठबंधन का सीएम फेस बता रही है। खुद तेजस्वी अपने को महागठबंधन का सीएम फेस बता चुके हैं। वीआईपी और वाम दलों ने इसका समर्थन भी किया है, लेकिन कांग्रेस ने कभी भी खुलकर इस पर हामी नहीं भरी है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेता, जैसे सचिन पायलट और कृष्णा अल्लावरु भी इस मुद्दे पर गोलमोल जवाब देते नजर आए। इन नेताओं का कहना है, मुख्यमंत्री का चेहरा चुनाव जीतने के बाद गठबंधन द्वारा सामूहिक रूप से तय किया जाएगा।