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सीएए पर सीएम शुभेंदु पर बड़ा बयान: मतुआ समुदाय को नागरिकता देने का किया वादा, कहा- ममता हमेशा करती थीं विरोध
Sun, 01 Nov 2026 03:24 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: अस्मिता त्रिपाठी
Updated Sun, 01 Nov 2026 03:24 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल के नेता शुभेंदु अधिकारी ने एलान किया कि 31 दिसंबर तक सीएए के तहत 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता दी जाएगी। उन्होंने सुनवाई प्रक्रिया तेज करने और मतुआ समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। साथ ही, ममता बनर्जी पर सीएए विरोध को लेकर निशाना साधा।
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शुभेंदु अधिकारी, पश्चिम बंगाल मुख्यमंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा कि सरकार सुनवाई की प्रक्रिया में तेजी लाएगी। 31 दिसंबर तक राज्य में सीएए के तहत 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता देंगी। उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर में 'इंटरनेशनल मतुआ गोसाई कन्वेंशन 2026' को संबोधित कर रहे थे। ये मतुआ समुदाय का पारंपरिक गढ़ है। इस दौरान उन्होंने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार के गठन में इस समुदाय का समर्थन अहम रहा है।
अधिकारी ने क्या कहा?
उन्होंने यह भी घोषणा की कि समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अधिकारी ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में अब तक केवल 25,000 लोगों को ही सीएए के तहत नागरिकता मिली है। हम सुनवाई की प्रक्रिया तेज करेंगे और 31 दिसंबर तक 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता दे देंगे।'
उन्होंने कहा, 'अन्य सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीएए लागू कर दिया है और पात्र लोगों को नागरिकता मिल गई है। केवल ममता बनर्जी ने ही इसका विरोध किया।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि सीएए के तहत नागरिकता पाने वाले सभी वास्तविक अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों को एससी प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
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उन्होंने आगे कहा, 'पश्चिम बंगाल में यह सरकार मतुआ समुदाय के समर्थन की वजह से ही बन पाई है।' इससे पहले दिन में, ठाकुरनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि उनसे पहले की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतुआ समुदाय के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि उन्हें बांटने का काम किया।
क्या ममता पर साधा निशाना?
बिना किसी का नाम लिए, अधिकारी ने कहा कि पिछली मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का भी विरोध किया था। यह कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। मतुआ समुदाय के लोग मूल रूप से आज के बांग्लादेश से आए हैं।
अधिकारी ने कहा, 'मैं यहां आकर खुश हूं। अगर मैं ठाकुरनगर के लिए कुछ कर सकूं, तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। पिछली मुख्यमंत्री ने मतुआ समुदाय और उनके समाज को बांट दिया था और उनके लिए कुछ नहीं किया। असल में, उन्होंने सीधे तौर पर सीएए का विरोध किया था। आने वाले दिनों में, मैं उनके लिए काम करूंगा।'
कौन हैं मतुआ समुदाय?
अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला मतुआ समुदाय, 19वीं सदी के आखिर में हरिचंद ठाकुर के नेतृत्व में शुरू हुए एक समाज सुधार आंदोलन का हिस्सा है। इस आंदोलन ने मुख्य रूप से अविभाजित पूर्वी बंगाल में नमाशुद्र समुदाय के सदस्यों को एकजुट किया। पश्चिम बंगाल में नमाशुद्रों को अनुसूचित जाति के अंतर्गत भी वर्गीकृत किया गया है।
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अधिकारी ने क्या कहा?
उन्होंने यह भी घोषणा की कि समुदाय के विकास के लिए 50 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। अधिकारी ने कहा, 'पश्चिम बंगाल में अब तक केवल 25,000 लोगों को ही सीएए के तहत नागरिकता मिली है। हम सुनवाई की प्रक्रिया तेज करेंगे और 31 दिसंबर तक 2.5 लाख आवेदकों को नागरिकता दे देंगे।'
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उन्होंने कहा, 'अन्य सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने सीएए लागू कर दिया है और पात्र लोगों को नागरिकता मिल गई है। केवल ममता बनर्जी ने ही इसका विरोध किया।' उन्होंने यह भी घोषणा की कि सीएए के तहत नागरिकता पाने वाले सभी वास्तविक अनुसूचित जाति (एससी) के लोगों को एससी प्रमाण पत्र दिए जाएंगे।
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उन्होंने आगे कहा, 'पश्चिम बंगाल में यह सरकार मतुआ समुदाय के समर्थन की वजह से ही बन पाई है।' इससे पहले दिन में, ठाकुरनगर में पत्रकारों से बात करते हुए अधिकारी ने कहा कि उनसे पहले की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में मतुआ समुदाय के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि उन्हें बांटने का काम किया।
क्या ममता पर साधा निशाना?
बिना किसी का नाम लिए, अधिकारी ने कहा कि पिछली मुख्यमंत्री ने नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) का भी विरोध किया था। यह कानून बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने का प्रावधान करता है। मतुआ समुदाय के लोग मूल रूप से आज के बांग्लादेश से आए हैं।
अधिकारी ने कहा, 'मैं यहां आकर खुश हूं। अगर मैं ठाकुरनगर के लिए कुछ कर सकूं, तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी। पिछली मुख्यमंत्री ने मतुआ समुदाय और उनके समाज को बांट दिया था और उनके लिए कुछ नहीं किया। असल में, उन्होंने सीधे तौर पर सीएए का विरोध किया था। आने वाले दिनों में, मैं उनके लिए काम करूंगा।'
कौन हैं मतुआ समुदाय?
अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखने वाला मतुआ समुदाय, 19वीं सदी के आखिर में हरिचंद ठाकुर के नेतृत्व में शुरू हुए एक समाज सुधार आंदोलन का हिस्सा है। इस आंदोलन ने मुख्य रूप से अविभाजित पूर्वी बंगाल में नमाशुद्र समुदाय के सदस्यों को एकजुट किया। पश्चिम बंगाल में नमाशुद्रों को अनुसूचित जाति के अंतर्गत भी वर्गीकृत किया गया है।