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मजबूत अर्थव्यवस्थाएं भी बेहाल, खाते में पैसे डालने से नहीं सुधरेंगे हालात, एमएसएमई पे दें ध्यान: केवी सुब्रमण्यम
Sun, 07 Jun 2020 12:20 PM IST
अनवर अंसारी
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: अनवर अंसारी
Updated Sun, 07 Jun 2020 12:20 PM IST
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मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम
- फोटो : ANI
वैश्विक महामारी कोरोना वायरस की वजह से दुनिया की मजबूत से मजबूत अर्थव्यवस्थाओं की हालत खराब हो गई है। बिगड़ते हालातों में कंपनियां बड़े स्तर पर छंटनिया करने में लगी हुई हैं। वहीं, कई रेटिंग एजेंसियों ने भी भारत की जीडीपी को लेकर नकारात्मक आंकड़े पेश किए हैं।
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ऐसे में देश के मुख्य आर्थिक सलाहकार केवी सुब्रमण्यम का आत्मविश्वास चौंकाने वाला है। उनका कहना है कि खपत बढ़ाने के लिए आम उपभोक्ता के खाते में पैसे डालने से बड़ा फर्क नहीं पड़ेगा। मौजूदा हालात में अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कैश ट्रांसफर जैसी योजना नाकाफी होगी। इससे हालात नहीं सुधरेंगे इसलिए हम सूक्ष्म लघु व मझोले, उद्योगों को सहारा देने पर ध्यान दे रहे हैं। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
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सीईए सुब्रमण्यम ने कहा कि वैश्विक महामारी के कारण पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा था। इससे निपटने की हर संभव कोशिश की गई लेकिन सब बेअसर रहा और अर्थव्यवस्था को कोई फायदा नहीं मिल पाया। वैश्विक महामारी के कारण फरवरी से ही खपत और निवेश घटना शुरू हो गया था। अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उपभोग बढ़ाना जरूरी है।
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उनका कहना कि भारत बाकी देशों से बहुत अलग है। सुब्रमण्यम ने कहा कि हम अपनी रेटिंग फिर हासिल कर लेंगे क्योंकि अभी हम अपने कर्ज लौटाने में काफी सक्षम हैं। बता दें कि दुनिया भर की रेटिंग एजेंसी ने भारत ही नहीं 30 से ज्यादा देशों की रेटिंग घटाई है।
मांग के बारीक पहलू को ध्यान में रखना जरूरी
उन्होंने कहा कि मांग के बारीक पहलू को ध्यान में रखना जरूरी है क्योंकि रोजमर्रा की जरूरत की चीजों की मांग को बनाए रखने के लिए उठाए गए एहतियाती कदम फिलहाल जारी रहेंगे। यह ध्यान रखा जाना भी जरूरी है कि वैश्विक महामारी के कारण पैदा हुई अनिश्चितता के कारण ही पिछली तिमाही में आर्थिक वृद्धि पर असर पड़ा था। आर्थिक सर्वेक्षण में हमने सुस्ती का बारीकी से विश्लेषण किया था। इससे साफ हुआ कि आर्थिक सुस्ती का मुख्य कारण बैंकिंग सेक्टर के बैड लॉन्स हैं।
दूसरी छमाही के नतीजों का इंतजार करना होगा
सुब्रमण्यम ने कहा कि अगर वित्त वर्ष की दूसरी छमाही से रिकवरी होनी शुरू हो जाए तो हालात इतने खराब नहीं रहेंगे जितने दिख रहे हैं या अनुमान लगाया जा रहा है हालांकि अगर रिकवरी अगले साल से होनी शुरू हुई तो वास्तव में हमारा सामना आर्थिक सुस्ती के हालात से होगा। वहीं, इस वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि की रफ्तार को लेकर फिलहाल काफी अनिश्चितता है। अभी इस बारे में कुछ भी नहीं कहा जा सकता है, इसके लिए हमें दूसरी छमाही के नतीजों का इंतजार करना होगा। आर्थिक वृद्धि की दर दूसरी छमाही में आर्थिक विकास में उछाल आने या नहीं आने पर निर्भर करेगी।