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पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल का खुलासा: वायुसेना की इस कार्रवाई की सरकार को भी नहीं थी भनक, चीन भी हुआ हैरान

Mon, 08 Jun 2020 07:27 AM IST
श्रीधर मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्रीधर मिश्रा Updated Mon, 08 Jun 2020 07:27 AM IST
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Big disclosure of former Vice Chief Air Marshal Pranab Kumar Barbora: Government was not even aware of this action of Air Force, China also shocked
फाइल फोटो - फोटो : PTI

पूर्वी लद्दाख में फिलहाल चल रहे गतिरोध में चीन के साथ लगती वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) के करीब मौजूद दौलत बेग ओल्डी (डीबीओ) हवाई पट्टी अहम भूमिका निभा रही है। लेकिन इस हवाई पट्टी को भारतीय वायुसेना ने सरकार से लिखित मंजूरी लिए बिना ही दोबारा चालू किया था। यह दावा पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) प्रणब कुमार बारबोरा ने रविवार को किया।

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बता दें कि डीबीओ विश्व की सबसे ऊंचे एडवांस्ड लैंडिंग ग्राउंड में से एक है। करीब 16,800 फीट से भी ज्यादा ऊंचाई पर स्थित इस लैंडिंग ग्राउंड की हवाई पट्टी का उपयोग एएन-32 और सी-130जे सुपर हरक्युलिस जैसे बड़े मालवाहक सैन्य विमानों को उतारने में किया जा सकता है। बारबोरा से जब यह पूछा गया कि भारतीय वायुसेना ने सरकारी मंजूरी लिए बिना ही इस हवाई पट्टी को दोबारा चालू किया था तो उन्होंने इसकी पुष्टि की। 
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उन्होंने कहा, हवाई पट्टी को दोबारा चालू करने के लिए लिखित जैसा कुछ नहीं था। सरकार को केवल लैंडिंग पूरी होने और मेरे वहां से वापस लौटने के बाद उचित चैनल के जरिये इसकी जानकारी दी गई थी। बदले में सरकार की प्रतिक्रिया पूछे जाने पर बारबोरा ने कहा, सरकार ने पूछा कि आपने ऐसा क्यों किया? हमने महज इतना कहा कि सैनिक साजोसामान को सही हालत में रखना वायुसेना की जिम्मेदारी है। उन्होंने दावा किया कि भारत की तरफ से हवाई पट्टी को दोबारा चालू किए जाने के बाद चीन इसके बारे में फ्लैग मीटिंग के जरिये वार्ता करना चाहता था, लेकिन भारत की तरफ से इसके लिए सहमति जताए जाने के बावजूद चीनी अधिकारी कभी चर्चा करने के लिए नहीं आए। 
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बारबोरा ने कहा, तत्कालीन रक्षा मंत्री ने भी मुझसे पूछा था कि यदि उनके चीन दौरे के दौरान चीनी इसे लेकर सवाल पूछेंगे तो मुझे क्या कहना चाहिए। लेकिन चीनियों ने उनसे कभी इस बारे में कोई सवाल ही नहीं किया। रक्षा मंत्री चीन में आए भूकंप के लिए राहत सप्लाई लेकर वहां गए थे।


इसलिए नहीं ली थी सरकार से मंजूरी

पूर्व वाइस चीफ एयर मार्शल बारबोरा ने यह भी बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्रालय से मंजूरी क्यों नहीं ली थी। उन्होंने कहा, 1962 के बाद जब यह हवाई पट्टी चालू की गई थी, तो 1965 के बाद से इसका संचालन बंद हो गया। तीन साल हमने इसका संचालन किया और उसके बाद केवल इसलिए बंद कर दिया कि हमारे पास कोई विमान नहीं था। उन्होंने कहा कि 1965 के बाद इसे दोबारा चालू करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया। ऐसे में 43 वर्ष गुजर गए और इसे दोबारा चालू करने की मंजूरी नहीं मिली, क्योंकि हर बार बहुत सारे कारण गिनाकर नहीं, नहीं और नहीं कह दिया जाता था। उन्होंने कहा, जब मैंने इस परियोजना का अध्ययन किया और इसके बाद फील्ड ऑफिसर को हर तरीके से यहां की समीक्षा करने के निर्देश दिए थे।

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