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New Education Policy 2020 : 5वीं तक पढ़ाई अब मातृभाषा में, स्नातक तक प्रवेश की एक परीक्षा

Thu, 30 Jul 2020 01:26 AM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: गौरव पाण्डेय Updated Thu, 30 Jul 2020 01:26 AM IST
सार

  • नई शिक्षा नीति कैबिनेट से मंजूर, 34 साल बाद हुआ बदलाव
  • मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम अब शिक्षा मंत्रालय
  • मेडिकल-विधि के अलावा पूरी उच्च शिक्षा का एक नियामक
  • 2035 तक उच्च-व्यावसायिक शिक्षा में पंजीकरण 50 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्य
  • जीडीपी का 6 फीसदी होगा शिक्षा पर खर्च, अब तक 4.43 फीसदी था

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big changes in school education to higher education, here is all you need to know about new education policy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

विस्तार

केंद्र सरकार ने बुधवार को बहुप्रतीक्षित शिक्षा नीति को मंजूरी दे दी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति में 34 साल बाद हुए व्यापक परिवर्तन के तहत मेडिकल और विधि को छोड़ पूरी उच्च शिक्षा का एक नियामक होगा। साथ ही स्नातक तक पढ़ाई के लिए एक ही प्रवेश परीक्षा होगी। पांचवीं तक पढ़ाई मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में होगी। नर्सरी से स्नातक तक के पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को चार हिस्सों में बांटा गया है। इसके साथ ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय का नाम फिर शिक्षा मंत्रालय कर दिया गया है। वहीं, नई नीति में शिक्षा पर खर्च को बढ़ा दिया गया है। अब शिक्षा पर जीडीपी का 6 फीसदी खर्च होगा, जो अब तक 4.43 फीसदी था।

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केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर और रमेश पोखरियाल निशंक ने बताया, पीएम नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के इसरो के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के कस्तूरीरंगन कमेटी द्वारा तैयार राष्ट्रीय शिक्षा नीति को मंजूरी दी गई। नई नीति का मकसद समग्र शिक्षा को बढ़ावा देना है। यह मील का पत्थर साबित होगी। इसके तहत 2035 तक उच्च शिक्षा में पंजीकरण मौजूदा 26.3 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके लिए विभिन्न पाठ्यक्रमों में 3.5 करोड़ नई सीटें जोड़ी जाएंगी। वहीं, स्कूली शिक्षा में बड़ा बदलाव करते हुए बोर्ड परीक्षा का आयोजन साल में एक बार की जगह सेमेस्टर या दो बार (वस्तुनिष्ठ और प्रश्नोत्तर श्रेणियों में विभाजित) हो सकता है। इसके लिए अलग नीति बनाई जाएगी।
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सरकारी-निजी संस्थानों के लिए एक नियम...

सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी परीक्षा आयोजित करेगी। सरकारी और निजी उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक ही नियम होंगे। अगले 15 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से कॉलेजाें को संबंद्धता दी जाएगी। इसके साथ ही कॉलेजों की ग्रेडिंग और उन्हें स्वायत्तता देने के लिए राज्य स्तर पर तंत्र बनेगा। तय समय में कॉलेजों को स्वायत्तता मिलेगी या उन्हें विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा।

छठवीं कक्षा से ही व्यावसायिक पढ़ाई 

नई नीति में स्कूल शिक्षा में व्यापक बदलाव किया गया है। गैर हिंदी भाषी राज्यों में भाषा विवाद खत्म करते हुए पांचवीं या राज्य चाहेें तो आठवीं तक पढ़ाई मातृभाषा में हो सकेगी। राज्य इसके बाद भी मातृभाषा में पढ़ाई जारी रख सकते हैं। विज्ञान समेत सभी विषयों की किताबें भारतीय भाषाओं में उपलब्ध होंगी। इसके अलावा त्रिभाषा फार्मूला से भाषा चुनने का अधिकार राज्यों को दिया गया है। नई नीति तक के तहत 2030 तक शत-प्रतिशत बच्चों को स्कूली शिक्षा में नामांकन का लक्ष्य है। वहीं, पढ़ाई का दबाव कम करने के लिए कोर्स घटाया जाएगा तथा छठवीं कक्षा से ही व्यावसायिक पढ़ाई शुरू होंगे।
 

35 साल बाद फिर बदला मंत्रालय का नाम...

मानव संसाधन मंत्रालय को 35 साल बाद फिर शिक्षा मंत्रालय के नाम से जाना जाएगा। शुरुआत में इसका नाम शिक्षा मंत्रालय था लेकिन 1985 में बदल दिया गया था। मौजूदा शिक्षा नीति 1986 में बनी थी और इसे 1992 में संशोधित किया गया था। नई शिक्षा नीति का मुद्दा 2014 के लोकसभा चुनाव से भाजपा के घोषणा पत्र में शामिल था।

5-3-3-4 के तहत होगा नया पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा...

 

 

फाउंडेशन

नई नीति में पूरे पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचे को 5-3-3-4 के तहत चार हिस्सों में बांटा गया है। पहले पांच में नर्सरी, केजी और अपर-केजी होंगे। फाउंडेशन वर्ग का गठन होगा, जिसमें तीन साल बच्चे प्री-स्कूलिंग शिक्षा लेंगे और फिर पहली और दूसरी में पढ़ेंगे। पांच सालों के लिए एनसीईआरटी विशेष पाठ्यमक्रम बनाएगा। इसमें किताबी ज्ञान के साथ खेलकूद, मनोरंजन से सीखाना है, ताकि मानसिक और शारीरिक विकास सामान्य हो। एक्टिविटी आधारित लर्निंग पर फोकस होगा और 3 से 8 साल तक बच्चे कवर होंगे। रिपोर्ट कार्ड में बदलाव होगा और आकलन तीन स्तर पर होगा। पहला छात्र, दूसरा सहपाठी और तीसरे शिक्षक। नेशनल असेसमेंट सेंटर परख सीखने की क्षमता का आर्टिफिशिल इंटेलीजेंस आधारित सॉफ्टवेयर परीक्षण करेगा।

प्राथमिक

दूसरे वर्ग में तीसरी, चौथी व पांचवीं के छात्र शामिल होंगे। इसमें बच्चों को प्रयोगों के माध्यम से गणित, विज्ञान और कला आदि विषयों की पढ़ाई करवायी जाएगी। इसमें 8-11 आयु वर्ग के बच्चे शामिल होंगे।

माध्यमिक

इस वर्ग में छठीं, सातवीं और आठवीं कक्षा होगी और 11-14 आयु वर्ग के छात्रों को शामिल किया जाएगा। इसमें विषय आधारित पाठ्यक्रम पढ़ाया जाएगा। छठवीं कक्षा से ही कौशल विकास कोर्स शुरू होंगे और अनिवार्य व्यावसायिक ट्रेनिंग व पढ़ाई होगी। इसमें दस दिन की लोकल क्राफ्ट की इंटर्नशिप करनी पड़ेगी। इसी कक्षा से छात्रों को कोडिंग सिखाई जाएगी। शिक्षा में तकनीक के इस्तेमाल पर जोर होगा। इसमें ऑनलाइन शिक्षा का क्षेत्रीय भाषाओं में कंटेट तैयार करना, वर्चुअल लैब, डिजिटल लाइब्रेरी आदि शामिल होंगी।

सेकेंडरी स्टेज

चौथे वर्ग में 9वीं से 12वीं तक की पढ़ाई होगी। इस दौरान बोर्ड की तैयारी पर फोकस होगा। छात्रों को विषयों चुनने की आजादी होगी। अपने विषय के साथ-साथ बहुविषयक जानकारियों को बढ़ावा दिया जाएगा। बोर्ड परीक्षा रट्टा की बजाय ज्ञान बढ़ाने पर आधारित हो, इसलिए पाठ्यक्रम कम किया जाएगा। 

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