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COP-27: सीओपी-27 मिस्र में आज से, पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव करेंगे भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व
Sun, 06 Nov 2022 03:37 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली।
एजेंसी, नई दिल्ली।
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 06 Nov 2022 03:37 AM IST
सार
6 से 18 नवंबर तक मिस्र के शर्म अल-शेख में होने वाले संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) में सम्मेलन (सीओपी) के 27वें संस्करण में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव
- फोटो : social media
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विस्तार
अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण सम्मेलन (COP 27) का 27वां संस्करण रविवार (आज) से शुरू होगा। मिस्र के शर्म अल-शेख में छह से आठ नवंबर तक आयोजित होने वाले सम्मेलन में भाग लेने के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव पहुंच चुके हैं। वे भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे।
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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के खतरे से संयुक्त रूप से किस तरह से निपटा जाए इसके लिए दुनिया एकत्र हुई है। सीओपी 27 को 'सीओपी ऑफ एक्शन' होना चाहिए, जिसमें जलवायु वित्त को ध्यान में रखते हुए हानि और क्षति पर परिणामों पर विशेष ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
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भारत ने शुक्रवार को कहा कि विकासशील देशों को हर वर्ष 100 अरब डॉलर जलवायु वित्त देने का वादा विकसित देश पूरा नहीं कर पा रहे हैं। सीओपी में कुछ विकसित देश भी विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिए प्रति वर्ष 100 अरब अमेरिकी डॉलर के मुद्दे को मजबूती से उठाने में भारत का साथ देंगे।
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भारत ने नए जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने के लिए पर्याप्त संसाधनों का आह्वान किया। 6 से 18 नवंबर तक मिस्र के शर्म अल-शेख में होने वाले संयुक्त राष्ट्र फ्रेमवर्क कन्वेंशन (यूएनएफसीसीसी) में पार्टियों के सम्मेलन (सीओपी) के 27वें संस्करण में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वित्त संबंधी स्थायी समिति विभिन्न परिभाषाओं पर एक रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी। उम्मीद है कि एक आम सहमति पर पहुंचने के लिए इस पर अच्छी चर्चा होगी।
इस शब्द की व्याख्या कन्वेंशन और उसके पेरिस समझौते में जलवायु वित्त पर देशों द्वारा की गई प्रतिबद्धताओं के अनुरूप होनी चाहिए। मंत्रालय ने कहा कि 2020 तक और उसके बाद 2025 तक हर साल 100 अरब अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष जलवायु वित्त का लक्ष्य हासिल किया जाना बाकी है। सामान्य समझ की कमी के कारण, जलवायु वित्त के रूप में जो प्रवाहित हुआ है, उसके कई अनुमान उपलब्ध हैं। जबकि वादा की गई राशि को जल्द से जल्द पूरा किया जाना चाहिए। अब 2024 के बाद नए मात्रात्मक लक्ष्य के तहत पर्याप्त संसाधन प्रवाह सुनिश्चित करने और पर्याप्त रूप से बढ़ाने की आवश्यकता है।
जलवायु वित्त की परिभाषा में और स्पष्टता की उम्मीद
पर्यावरण मंत्रालय से जारी एक बयान में कहा कि जलवायु वित्त की परिभाषा पर और अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है। जलवायु वित्त से संबंधित चर्चाओं में पर्याप्त प्रगति और इसकी परिभाषा पर स्पष्टता की उम्मीद करता है। जैसा एक कहावत है कि जो मापा जाता है वह हो जाता है। विकासशील देशों के लिए जलवायु वित्त की परिभाषा पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है ताकि जलवायु कार्रवाई के लिए वित्त प्रवाह की सीमा का सटीक आकलन करने में सक्षम हो सकें।
विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने की कार्ययोजना का करेगा समर्थन
मंत्रालय का कहना है कि सीओपी-27 का अध्यक्ष मिस्र समान विचारधारा वाले विकासशील देशों का सदस्य भी है। उसने सीओपी-27 को कार्यान्वयन के सीओपी के रूप में नामित किया है। भारत इस कदम का स्वागत करता है क्योंकि पिछले बारह महीनों में दुनिया ने ग्लासगो में सीओपी-26 में विकसित देशों के बयानों और उनके कार्यों की वास्तविकता के बीच व्यापक अंतर देखा है। साथ ही विकासशील देशों की जरूरतों को पूरा करने वाली कार्य योजना के लिए भारत मिस्र की अध्यक्षता का समर्थन करेगा।
भारत घरेलू कार्रवाई और बहुपक्षीय सहयोग के लिए है प्रतिबद्ध
मंत्रालय ने कहा कि भारत जलवायु परिवर्तन पर घरेलू कार्रवाई और बहुपक्षीय सहयोग, दोनों के लिए प्रतिबद्ध है। वह समूची मानवता के इस ग्रह गृह की रक्षा के आह्वान में सभी वैश्विक पर्यावरणीय चिंताओं से लड़ना जारी रखेगा। लेकिन ग्लोबल वार्मिंग यह भी चेतावनी देती है कि समानता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग, किसी को पीछे नहीं छोड़ना, ये ही सफलता की कुंजी हैं और यहां सबसे भाग्यशाली को ही सबका नेतृत्व करना चाहिए।
हानि और क्षति भी एजेंडे में हों
मंत्रालय ने कहा कि हानि और क्षति के मुद्दे हमारे ध्यान में रहने चाहिए और इन दो मुद्दों पर प्रगति एक दूसरे की पूरक होगी। हानि और क्षति भी सीओपी27 के एजेंडे में होनी चाहिए और हानि और क्षति वित्त के मुद्दे पर प्रगति होनी चाहिए। कन्वेंशन के तहत मौजूदा वित्तीय तंत्र, जीईएफ, जीसीएफ और अनुकूलन कोष, जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान और क्षति के लिए धन जुटाने या वितरित करने में सक्षम नहीं हैं। ये तंत्र अल्प-वित्तपोषित हैं, धन प्राप्त करना बोझिल और समय लेने वाला है। ये वे परिस्थितियां हैं जिनके आधार पर जी77 और चीन ने हानि और क्षति वित्त पर एक एजेंडा आइटम को अपनाने का प्रस्ताव दिया है। अब समय आ गया है कि इस मुद्दे को जलवायु एजेंडे में प्रमुखता दी जाए।