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भीमा कोरेगांव मामला: उच्चतम न्यायालय ने आरोपपत्र वाले बंबई उच्च न्यायालय के फैसले को खारिज किया
Wed, 13 Feb 2019 11:21 AM IST
Shilpa Thakur
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला
Published by: Shilpa Thakur
Updated Wed, 13 Feb 2019 11:21 AM IST
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supreme court
- फोटो : PTI
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में आरोपपत्र दायर करने की समय सीमा ना बढ़ाने के बंबई हाई कोर्ट के फैसले को खारिज कर दिया है। कोर्ट ने कहा है कि आरोपपत्र दाखिल किया जा चुका है इसलिए गिरफ्तार कार्यकर्ता नियमित जमानत मांग सकते हैं।
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हालांकि शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि महाराष्ट्र पुलिस ने आरोपपत्र दायर कर दिया है इसलिए मामले में गिरफ्तार किए गए पांच कार्यकर्ता अब नियमित जमानत की मांग कर सकते हैं।
Supreme Court sets aside Bombay High Court order refusing to extend the 90-day deadline to file the charge-sheet against five activists in Bhima Koregaon violence case. pic.twitter.com/BAK0WPU8Yn
— ANI (@ANI) February 13, 2019
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने पहले बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले पर रोक लगा दी थी, जिसमें उसने मामले में निचली अदालत के फैसले को दरकिनार कर दिया था। निचली अदालत ने राज्य पुलिस को मामले में आरोपपत्र दायर करने की अवधि में 90 दिन का विस्तार दे दिया था।
मामले में गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि वे कानूनी रूप से जमानत के हकदार हैं क्योंकि महाराष्ट्र पुलिस ने निर्धारित 90 दिन और उसके बाद भी आरोपपत्र दायर नहीं किया। ऐसी स्थिति में निचली अदालत द्वारा समय सीमा बढ़ाना कानूनी दृष्टि से सही नहीं था।
गौरलतब है कि पुणे पुलिस ने नक्सलियों से कथित संबंधों के आरोप में गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की संबंधित धाराओं के तहत वकील सुरेंद्र गडलिंग, नागुपर विश्वविद्यालय के प्रफेसर शोमा सेन, दलित कार्यकर्ता सुधीर धावले, कार्यकर्ता महेश राउत और केरल के रोना विल्सन को जून में गिरफ्तार किया था।