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Bharat Jodo Yatra: राहुल की यात्रा में एक महीने बाद क्यों पहुंचीं सोनिया गांधी, कितना सधेगा चुनावी गणित, जानें
Thu, 06 Oct 2022 07:01 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 06 Oct 2022 07:01 PM IST
सार
आखिर राहुल गांधी की यात्रा के एक महीने बाद सोनिया के जुड़ने के सियासी मायने क्या हैं? कांग्रेस को इससे क्या फायदा हो सकता है? यात्रा में शामिल हो कर सोनिया गांधी किस तरह भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं? आइये जानते हैं...
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भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ सोनिया गांधी।
- फोटो : ANI
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विस्तार
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी गुरुवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में जारी 'भारत जोड़ो यात्रा' में शामिल होने के लिए कर्नाटक पहुंचीं। दशहरा के दो दिन के आराम के बाद सोनिया के पहुंचने से इस यात्रा में एक नया जोश देखने को मिला है। कांग्रेस अध्यक्ष के इस यात्रा में शामिल होने के कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं।
आखिर राहुल गांधी की यात्रा के एक महीने बाद सोनिया के जुड़ने के सियासी मायने क्या हैं? कांग्रेस को इससे क्या फायदा हो सकता है? यात्रा में शामिल हो कर सोनिया गांधी किस तरह भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं? आइये जानते हैं...
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आखिर राहुल गांधी की यात्रा के एक महीने बाद सोनिया के जुड़ने के सियासी मायने क्या हैं? कांग्रेस को इससे क्या फायदा हो सकता है? यात्रा में शामिल हो कर सोनिया गांधी किस तरह भाजपा के लिए मुश्किल खड़ी कर सकती हैं? आइये जानते हैं...
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भारत जोड़ो यात्रा में एक महीने बाद क्यों शामिल हो रहीं सोनिया गांधी?
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से चुनावी अभियानों और रैलियों में कम ही दिखाई देती हैं। आखिरी बार उन्होंने अगस्त 2016 में वाराणसी में एक रोडशो में हिस्सा लिया था, जहां उन्हें कंधे पर चोट आई थी और बाद में उनकी सर्जरी भी हुई थी। इसके बाद से ही वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही हिस्सा ले रही हैं।
इस साल भी दो बार कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुकी हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा था। हालांकि, भारत जोड़ो यात्रा के एक महीने पूरे हो जाने के मौके पर सोनिया गांधी ने एक बार फिर रैली में हिस्सा लेने का फैसला किया।
कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी स्वास्थ्य समस्याओं की वजह से चुनावी अभियानों और रैलियों में कम ही दिखाई देती हैं। आखिरी बार उन्होंने अगस्त 2016 में वाराणसी में एक रोडशो में हिस्सा लिया था, जहां उन्हें कंधे पर चोट आई थी और बाद में उनकी सर्जरी भी हुई थी। इसके बाद से ही वे सार्वजनिक कार्यक्रमों में कम ही हिस्सा ले रही हैं।
इस साल भी दो बार कोरोनावायरस से संक्रमित हो चुकी हैं। उन्हें अस्पताल में भर्ती तक कराना पड़ा था। हालांकि, भारत जोड़ो यात्रा के एक महीने पूरे हो जाने के मौके पर सोनिया गांधी ने एक बार फिर रैली में हिस्सा लेने का फैसला किया।
भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ सोनिया गांधी।
- फोटो : ANI
सोनिया के इस यात्रा में जुड़ने के सियासी मायने क्या हैं?
लंबे समय तक बीमार रहने के बावजूद भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी के शामिल होने को कांग्रेस के कैडर में जान फूंकने के कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस कहीं भी अपने दम पर सरकार बनाने में सफल नहीं हो पाई है। यहां तक कि जिन राज्यों में सत्तासीन भाजपा को एंटी-इन्कंबेंसी का सामना भी करना पड़ा है, वहां भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में यह आरोप लग रहे हैं कि गांधी परिवार कांग्रेस को सियासी तौर पर पुनर्जीवित करने में सक्षम नहीं है।
सितंबर में ही पार्टी अध्यक्ष चुनाव के नामांकन शुरू होने से पहले राजस्थान में पार्टी में उथल-पुथल शुरू हो गई। तब कहा गया कि भारत जोड़ो यात्रा के बीच गांधी परिवार का ध्यान अपने शासन वाले राज्यों से हट गया। हालांकि, राहुल गांधी की तरफ से तब भी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई। बल्कि अध्यक्ष चुनाव से जुड़ी पूरे विवाद को बाद में सोनिया गांधी ने ही हल कराया और संदेश दिया कि पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष होने का दायित्व वे पूरी तरह निभा रही हैं। साथ ही राहुल गांधी का अब कांग्रेस आलाकमान के फैसलों में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं है।
लंबे समय तक बीमार रहने के बावजूद भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी के शामिल होने को कांग्रेस के कैडर में जान फूंकने के कदम के तौर पर भी देखा जा रहा है। दरअसल, 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से कांग्रेस कहीं भी अपने दम पर सरकार बनाने में सफल नहीं हो पाई है। यहां तक कि जिन राज्यों में सत्तासीन भाजपा को एंटी-इन्कंबेंसी का सामना भी करना पड़ा है, वहां भी कांग्रेस को नुकसान उठाना पड़ा है। ऐसे में यह आरोप लग रहे हैं कि गांधी परिवार कांग्रेस को सियासी तौर पर पुनर्जीवित करने में सक्षम नहीं है।
सितंबर में ही पार्टी अध्यक्ष चुनाव के नामांकन शुरू होने से पहले राजस्थान में पार्टी में उथल-पुथल शुरू हो गई। तब कहा गया कि भारत जोड़ो यात्रा के बीच गांधी परिवार का ध्यान अपने शासन वाले राज्यों से हट गया। हालांकि, राहुल गांधी की तरफ से तब भी इस पर प्रतिक्रिया नहीं दी गई। बल्कि अध्यक्ष चुनाव से जुड़ी पूरे विवाद को बाद में सोनिया गांधी ने ही हल कराया और संदेश दिया कि पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष होने का दायित्व वे पूरी तरह निभा रही हैं। साथ ही राहुल गांधी का अब कांग्रेस आलाकमान के फैसलों में ज्यादा हस्तक्षेप नहीं है।
कांग्रेस को इससे क्या फायदा हो सकता है?
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी की एंट्री की टाइमिंग भी काफी अहम है। वे एक महीने बाद कर्नाटक में यात्रा से जुड़ी हैं, जहां 2023 यानी अगले साल के मध्य में चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस ने यात्रा में जिन दो राज्यों- तमिलनाडु और केरल में यात्रा निकाली, वहां 2019 और 2021 में ही चुनाव संपन्न हो चुके हैं। इस लिहाज से दक्षिण के किसी राज्य में कांग्रेस को अब सबसे पहले कर्नाटक में ही चुनाव में उतरना है। यहां उसे भाजपा का सामना करना है।
कांग्रेस के लिए कर्नाटक चुनाव अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने का अहम अवसर साबित हो सकता है। राहुल गांधी की यात्रा में सोनिया गांधी के आने से कांग्रेस के लिए इस राज्य की महत्ता भी बढ़ाने का काम किया है। गुरुवार को ही कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार समेत सभी बड़े नेता इस यात्रा में मौजूद रहे। ऐसे में कांग्रेस इस अहम राज्य में चुनाव से पहले सभी नेताओं की एकजुटता दिखाते हुए भाजपा के लिए चुनौती पेश करने की कोशिश में है।
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा में सोनिया गांधी की एंट्री की टाइमिंग भी काफी अहम है। वे एक महीने बाद कर्नाटक में यात्रा से जुड़ी हैं, जहां 2023 यानी अगले साल के मध्य में चुनाव होने हैं। इससे पहले कांग्रेस ने यात्रा में जिन दो राज्यों- तमिलनाडु और केरल में यात्रा निकाली, वहां 2019 और 2021 में ही चुनाव संपन्न हो चुके हैं। इस लिहाज से दक्षिण के किसी राज्य में कांग्रेस को अब सबसे पहले कर्नाटक में ही चुनाव में उतरना है। यहां उसे भाजपा का सामना करना है।
कांग्रेस के लिए कर्नाटक चुनाव अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने का अहम अवसर साबित हो सकता है। राहुल गांधी की यात्रा में सोनिया गांधी के आने से कांग्रेस के लिए इस राज्य की महत्ता भी बढ़ाने का काम किया है। गुरुवार को ही कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष डीके शिवकुमार समेत सभी बड़े नेता इस यात्रा में मौजूद रहे। ऐसे में कांग्रेस इस अहम राज्य में चुनाव से पहले सभी नेताओं की एकजुटता दिखाते हुए भाजपा के लिए चुनौती पेश करने की कोशिश में है।
भारत जोड़ो यात्रा में राहुल गांधी के साथ सोनिया गांधी।
- फोटो : ANI
यात्रा में सोनिया के शामिल होने से भाजपा पर क्या असर?
कर्नाटक में राहुल की यात्रा 21 दिन रहेगी। कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा 511 किलोमीटर लंबी होगी। इस यात्रा के जरिए राज्य में दो धड़ों में बिखरी पार्टी को एकजुट करने की कोशिश भी है। कर्नाटक कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच खींचतान जारी है।
कर्नाटक में राहुल की यात्रा 21 दिन रहेगी। कर्नाटक में भारत जोड़ो यात्रा 511 किलोमीटर लंबी होगी। इस यात्रा के जरिए राज्य में दो धड़ों में बिखरी पार्टी को एकजुट करने की कोशिश भी है। कर्नाटक कांग्रेस में पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और मौजूदा प्रदेशाध्यक्ष डीके शिवकुमार के बीच खींचतान जारी है।
इन दोनों नेताओं के समर्थन वाले धड़ों के बीच जंग कितनी ज्यादा है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पिछले साल यहां हुए दो विधानसभा सीटों और एक लोकसभा सीट के उपचुनाव में भी कांग्रेस को कोई खास सफलता हाथ नहीं लगी। भाजपा ने यहां दो में से एक विधानसभा सीट हासिल की थी। वहीं, बेलगावी लोकसभा सीट को बचाने में भी सफलता हासिल की थी। इस सीट पर कांग्रेस को महज कुछ हजार वोटों से हार मिली थी। जबकि पहले इस सीट पर भाजपा की हार लगभग तय मानी जा रही थी। कांग्रेस में इस करीबी हार की वजह इन दो बड़े नेताओं के बीच बंटे हुए धड़ों को माना जा रहा था, जो कि चुनाव के दौरान भी साथ नहीं आए।
माना जा रहा है कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी कर्नाटक पहुंचकर पार्टी को एकजुट करने की कोशिश करेंगी। बीते दिनों में कर्नाटक कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर राज्य की भाजपा सरकार को घेरने के लिए कई अभियान चलाए हैं। फिर चाहे वह बारिश से प्रभावित बेंगलुरु की खराब हालत को विधानसभा में उठाने की बात हो या राज्य में दुकानों के बाहर PayCM के पोस्टर लगाकर बोम्मई को भ्रष्टाचार के मामले में घेरने की।
माना जा रहा है कि सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी कर्नाटक पहुंचकर पार्टी को एकजुट करने की कोशिश करेंगी। बीते दिनों में कर्नाटक कांग्रेस ने भी अपने स्तर पर राज्य की भाजपा सरकार को घेरने के लिए कई अभियान चलाए हैं। फिर चाहे वह बारिश से प्रभावित बेंगलुरु की खराब हालत को विधानसभा में उठाने की बात हो या राज्य में दुकानों के बाहर PayCM के पोस्टर लगाकर बोम्मई को भ्रष्टाचार के मामले में घेरने की।
मुश्किल में फंसी कांग्रेस के लिए संजीवनी बन सकता है दक्षिण
गांधी परिवार जब भी मुश्किल में होता है, तब वह दक्षिण भारत का रुख करता है। फिर चाहे वह कर्नाटक के चिकमगलूर और आंध्र प्रदेश के मेडक से लड़ने वाली इंदिरा गांधी हों, कर्नाटक के बेल्लारी से लड़ने वाली सोनिया गांधी हों या केरल के वायनाड से लड़ने वाले राहुल गांधी। कांग्रेस के अधिकतर वापसी के मौके दक्षिण से ही उपजे हैं। मजेदार बात यह है कि इन सभी सीटों से गांधी परिवार तभी खड़ा हुआ है, जब उसकी परांपरागत सीटों पर हार का खतरा पैदा हुआ है।
गांधी परिवार जब भी मुश्किल में होता है, तब वह दक्षिण भारत का रुख करता है। फिर चाहे वह कर्नाटक के चिकमगलूर और आंध्र प्रदेश के मेडक से लड़ने वाली इंदिरा गांधी हों, कर्नाटक के बेल्लारी से लड़ने वाली सोनिया गांधी हों या केरल के वायनाड से लड़ने वाले राहुल गांधी। कांग्रेस के अधिकतर वापसी के मौके दक्षिण से ही उपजे हैं। मजेदार बात यह है कि इन सभी सीटों से गांधी परिवार तभी खड़ा हुआ है, जब उसकी परांपरागत सीटों पर हार का खतरा पैदा हुआ है।
इसी लिहाज से सोनिया गांधी की भारत जोड़ो यात्रा में एंट्री कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम कर सकती है। उत्तर भारत के मुकाबले पार्टी यहां ज्यादा मजबूत रही है। रिपोर्ट्स की मानें तो उत्तर भारत के मुकाबले दक्षिण में कांग्रेस महिला वोट बैंक का फायदा भी भाजपा से ज्यादा बेहतर तरीके से उठा सकती है। इसलिए वह सोनिया के साथ प्रियंका को भी भारत जोड़ो यात्रा में भेजेगी।