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महाराष्ट्र के स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल हो सकती है गीता, वेद और उपनिषद्!
अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Updated Sun, 02 Sep 2018 04:08 AM IST
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महाराष्ट्र के स्कूली शिक्षा पाठ्यक्रम में श्रीमद्भागवत गीता, वेद और उपनिषद् शामिल हो सकता है। राज्य के शिक्षा मंत्री विनोद तावड़े ने शनिवार को भक्तिवेदांत विद्यापीठ रिसर्च सेंटर (वीवीआरसी) के कार्यक्रम में यह संकेत दिया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से छात्र अपने समृद्ध सामग्रियों से ज्ञान और लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
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स्कॉन ने मुंबई से सटे ठाणे के वाड़ा इलाके में वैदिक पढ़ाई के लिए वीवीआरसी की स्थापना की है जो मुंबई विश्वविद्यालय से संबद्ध है। वीवीआरसी दर्शन शास्त्र में पीएचडी डिग्री भी प्रदान करेगा। शनिवार को शिक्षामंत्री तावड़े ने इसका उद्घाटन किया।
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इस मौके पर उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत गीता, वेद और उपनिषद सिर्फ मंदिरों तक सीमित नहीं होना चाहिए। मैं चाहता हूं कि कक्षा एक से ही गीता की पढ़ाई शुरू की जाए। गीता का ज्ञान दैनिक जीवन के लिए बहुत लाभकारी है। लेकिन, छात्रों को धार्मिक ग्रंथ की शिक्षा सरल और सहज भाषा में दी जानी चाहिए जिससे वे आसानी से समझ सकें।
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तावड़े ने कहा कि वेद और उपनिषद् सिर्फ धार्मिक ग्रंथ नहीं है बल्कि इसकी दार्शनिक उपयोगिता है। वेद, उपनिषद् को न सिर्फ आम आदमी बल्कि छात्रों में भी प्रसारित किया जाना चाहिए क्योंकि यह जीवन के लिए जरूरी है।
तावड़े ने कहा कि भविष्य में महाराष्ट्र के प्राथमिक शिक्षा के पाठ्यक्रम में गीता, वेद और उपनिषद् को शामिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि रोजगार के लिए अंग्रेजी जरूरी है लेकिन, छात्र अपनी मातृभाषा में ही प्रभावी तरीके ज्ञान अर्जित कर सकते हैं।