सड़क पर भीख मांगने से अच्छा है बार में नाचना: सुप्रीम कोर्ट
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सु्प्रीम कोर्ट ने सोमवार महाराष्ट्र में डांस बार संचालकों को लाइसेंस देने में हो रही देरी के लिए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि सड़क पर भीख मांगने से अच्छा है डांस करना। अपने पहले से आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को डांस बार संचालकों को लाइसेंस जारी करने के आदेश दिए थे लेकिन उस आदेश पर अब तक अमल नहीं किया गया है जिसकी वजह से कोर्ट काफी नाराज है।
सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को लताड़ लगाते हुए कहा, 'नृत्य एक पेशा है। अगर इसमें अश्लीलता आ जाती है तो यह अपनी पुरानी पवित्रता को देती है। सरकार के नियम कानून निषेधात्मक नहीं होने चाहिए।' कोर्ट ने कहा, 'अनैतिक कार्यों में लिप्तता और सड़क पर भीख मांगने से अच्छा है कि महिलाएं डांस बार में नाच पेश करें।'
महाराष्ट्र सरकार ने 12 अप्रैल को एक डांस बार संचालन बिल पास किया था जिसमें डांस बार में नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़े कार्रवाई का प्रावधान है। इसके तहत अगर डांस बार में अश्लीलता, महिलाओं का शोषण और कोई अन्य नियम तोड़े जाते हैं तो इसके लिए बार मालिक ही जिम्मेदार माना जाएगा और उसके खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी। दोष सिद्ध होने पर मालिक को पांच साल की सजा और 25 हजार रुपए जुर्माना भी देना होगा।
राज्य सरकार ने बनाए नए नियम
इसके अलावा किसी भी विद्यालय या धार्मिक स्थल से करीब एक किमी के अंदर डांस बार नहीं खोला जा सकता। डांस बार शाम 6:30 बजे से लेकर 11:30 बजे तक ही खुला रहेगा और साथ ही जहां नाच हो रहा है उस जगह पर शराब नहीं परोसी जाएगी।
राज्य सरकार के इन्हीं नियमों के खिलाफ डांस बार संचालकों ने एक बार फिर से सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने यह तल्ख टिप्पणी की।