Bengaluru Heist: बंगलूरू में फिल्मी स्टाइल लूट; 30 मिनट में सात करोड़ लेकर फरार हुए नकली 'आरबीआई अफसर'
Bengaluru Robbery: कर्नाटक की राजधानी बंगलूरू में एक कैश वैन से 30 मिनट के भीतर सात करोड़ रुपये की लूट की वारदात को अंजाम दिया गया है। फिलहाल इस मामले में आठ विशेष टीमें जांच में जुट गई है। वहीं सीएमएस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उन्हें अपने स्टाफ पर शक नहीं है, और पुलिस सच्चाई सामने लाएगी।
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कैसे शुरू हुई 'जांच' की झूठी कहानी?
दोपहर करीब 12:30 बजे, सीएमएस इंफो सिस्टम्स की कैश वैन एचडीएफसी बैंक (जेपी नगर) से तीन कैश बॉक्स लेकर 22 किमी दूर एचबीआर लेआउट जा रही थी। अचानक जयनगर के अशोक पिलर के पास एक मारुति जेन कार ने वैन को रोक दिया। इसके साथ ही पीछे से एक इनोवा (एमयूवी) भी आकर रुकी। जेन कार में से तीन लोग उतरे और वैन के कर्मचारियों से बोले- 'हम आरबीआई अधिकारी हैं, आपकी कंपनी पर नियम तोड़ने का आरोप है, बयान लेना है।' इस घटना के दौरान कैश वैन में चार लोग थे- ड्राइवर बिनोद कुमार, कस्टोडियन आफताब और दो गनमैन राजन्ना व तम्मैया। स्टाफ बिना शक किए उनके साथ एमयूवी में बैठ गया और अपनी राइफलें वैन में ही छोड़ दीं।
Bengaluru just witnessed a scene straight out of a crime thriller. 🎬💰
— Oxomiya Jiyori 🇮🇳 (@SouleFacts) November 19, 2025
A crew of robbers — disguised as Tax officials — stopped a CMS cash-loading van under the pretext of a “verification check.”
In a perfectly timed operation, they calmly shifted ₹7 crore into their Innova,… pic.twitter.com/au4WkVBinJ
नकली अफसरों का नया बहाना
बड़ी कार में बैठे बदमाशों ने बताया कि पूछताछ के लिए पुलिस स्टेशन जाना होगा और कैश बॉक्स आरबीआई ऑफिस ले जाए जाएंगे। स्टाफ को उन्होंने सिद्धापुर पुलिस स्टेशन की ओर पैदल भेज दिया। ड्राइवर को अलग निर्देश मिला, वह वैन लेकर डेयरी सर्किल फ्लाइओवर पर जाकर इंतजार करे।
तीन मिनट में पूरा कैश साफ
इसके बाद डेयरी सर्किल पर ड्राइवर बिनोद इंतजार कर रहा था। तभी कार वहां पहुंची। इस दौरान बदमाशों ने बंदूक दिखाकर कैश बॉक्स वैन से निकाले और पास खड़ी मारुति वैगन-आर में डाल दिए। इसके बाद वे मौके से फरार हो गए। इस दौरान जिस कार में वे लोग आए थे उसे वहीं छोड़ दी। ड्राइवर को कुछ समझ नहीं आया कि अभी जो 'अफसर' थे, वही असल में लुटेरे थे।
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पुलिस हर एंगल से जांच में जुटी
बंगलूरू पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने बताया कि सीएमएस ने शिकायत करने में देर की, जिससे समय हाथ से निकल गया। अब आठ स्पेशल टीमें इस मामले की जांच कर रही हैं। वहीं मामले में एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि एमयूवी के आगे भारत सरकार का लोगो लगा था। लेकिन जांच में सामने आया कि उसकी नंबर प्लेट फर्जी थी।