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बंगलूरू: कांग्रेस ने बीएलए पर लगाए आरोप, कहा- फॉर्म 7 के जरिए मतदाता सूची से कई नाम हटाने की रची साजिश
Tue, 06 Oct 2026 03:36 PM IST
देवेश त्रिपाठी
पीटीआई, बंगलूरू
पीटीआई, बंगलूरू
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Tue, 06 Oct 2026 03:36 PM IST
सार
बंगलूरू के सुबेदार पाल्या इलाके में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए 136 फॉर्म 7 आवेदन जमा किए जाने के मामले में बूथ स्तर एजेंट के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन आवेदनों पर दर्ज हस्ताक्षर मूल आवेदकों के हस्ताक्षरों से मेल नहीं खाते थे।
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मतदाता सूची से नाम हटाने का मामला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
कर्नाटक में एसआईआर पर विवाद गहराता जा रहा है। बंगलूरू के सुबेदार पाल्या इलाके में मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए कथित तौर पर जाली हस्ताक्षर वाले 136 आवेदन जमा करने के आरोप में एक बूथ स्तर एजेंट के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
पुलिस के अनुसार, मामले में कांग्रेस नेता अनूप अयंगर की शिकायत पर 5 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में बूथ स्तर एजेंट (बीएलए) दीपक सिंह पर आरोप लगाए गए हैं। अयंगर ने दावा किया कि सिंह भाजपा से जुड़े हुए हैं। हालांकि, प्राथमिकी में सिंह के किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने का जिक्र नहीं है। अयंगर ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र संख्या 157 मल्लेश्वरम से चुनाव लड़ा था।
कांग्रेस नेता ने लगाए क्या आरोप?
प्राथमिकी के अनुसार, उनके विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 45 में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान अयंगर को कथित तौर पर पता चला कि बीएलए दीपक सिंह ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 में कथित रूप से गलत रिकॉर्ड जमा किए थे। इन आवेदनों में दावा किया गया था कि संबंधित मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं हैं या स्थायी रूप से अपना निवास स्थान बदल चुके हैं।
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प्राथमिकी में कहा गया है कि सुबेदार पाल्या के वार्ड संख्या 45 स्थित मतदान केंद्र संख्या 68 से जुड़े 136 फॉर्म 7 मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जमा किए गए थे। इन आवेदनों में मतदाताओं के अनुपस्थित होने को नाम हटाने का आधार बताया गया था। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन आवेदन पत्रों पर दर्ज हस्ताक्षरों और मूल आवेदकों के हस्ताक्षरों के बीच काफी अंतर पाया गया।
क्या बीएलए ने रची थी साजिश?
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि बीएलए सिंह और उनके सहयोगियों ने वैध मतदाताओं को मतदाता सूची में बने रहने के अधिकार से वंचित करने के इरादे से कथित तौर पर साजिश रची। आरोप है कि इसके तहत मतदाताओं की पहचान की गई, फॉर्म 7 तैयार या एकत्र किए गए और बड़ी संख्या में आवेदन एक साथ जमा किए गए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन आवेदनों में किसी विशेष समुदाय से जुड़े मतदान केंद्रों को निशाना बनाए जाने की आशंका है। प्राथमिकी के अनुसार, बीएलए की ओर से जमा किए गए कई फॉर्म की तुलना करने पर हस्ताक्षरों में अंतर पाया गया। शिकायत में यह भी आशंका जताई गई कि कुछ हस्ताक्षर जाली हो सकते हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर?
प्राथमिकी में कहा गया है कि आरोपी पर आरोप है कि उसने सरकारी कर्मचारी के रूप में गलत सूचना दी, जिसका उद्देश्य किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना था। उस पर जाली दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी के इरादे से साजिश में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर यशवंतपुरा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 336(2), 340(2), 61(2)(बी) और 217(बी) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने बताया कि इन धाराओं में प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली बताकर इस्तेमाल करने, आपराधिक साजिश और किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से सरकारी कर्मचारी को अपने वैध अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए गलत सूचना देने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।
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पुलिस के अनुसार, मामले में कांग्रेस नेता अनूप अयंगर की शिकायत पर 5 अक्तूबर को प्राथमिकी दर्ज की गई। शिकायत में बूथ स्तर एजेंट (बीएलए) दीपक सिंह पर आरोप लगाए गए हैं। अयंगर ने दावा किया कि सिंह भाजपा से जुड़े हुए हैं। हालांकि, प्राथमिकी में सिंह के किसी राजनीतिक दल से जुड़े होने का जिक्र नहीं है। अयंगर ने 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव में विधानसभा क्षेत्र संख्या 157 मल्लेश्वरम से चुनाव लड़ा था।
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कांग्रेस नेता ने लगाए क्या आरोप?
प्राथमिकी के अनुसार, उनके विधानसभा क्षेत्र के वार्ड संख्या 45 में विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया के दौरान अयंगर को कथित तौर पर पता चला कि बीएलए दीपक सिंह ने मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म 7 में कथित रूप से गलत रिकॉर्ड जमा किए थे। इन आवेदनों में दावा किया गया था कि संबंधित मतदाता अपने पते पर मौजूद नहीं हैं या स्थायी रूप से अपना निवास स्थान बदल चुके हैं।
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प्राथमिकी में कहा गया है कि सुबेदार पाल्या के वार्ड संख्या 45 स्थित मतदान केंद्र संख्या 68 से जुड़े 136 फॉर्म 7 मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए जमा किए गए थे। इन आवेदनों में मतदाताओं के अनुपस्थित होने को नाम हटाने का आधार बताया गया था। शिकायतकर्ता ने दावा किया कि इन आवेदन पत्रों पर दर्ज हस्ताक्षरों और मूल आवेदकों के हस्ताक्षरों के बीच काफी अंतर पाया गया।
क्या बीएलए ने रची थी साजिश?
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि बीएलए सिंह और उनके सहयोगियों ने वैध मतदाताओं को मतदाता सूची में बने रहने के अधिकार से वंचित करने के इरादे से कथित तौर पर साजिश रची। आरोप है कि इसके तहत मतदाताओं की पहचान की गई, फॉर्म 7 तैयार या एकत्र किए गए और बड़ी संख्या में आवेदन एक साथ जमा किए गए।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इन आवेदनों में किसी विशेष समुदाय से जुड़े मतदान केंद्रों को निशाना बनाए जाने की आशंका है। प्राथमिकी के अनुसार, बीएलए की ओर से जमा किए गए कई फॉर्म की तुलना करने पर हस्ताक्षरों में अंतर पाया गया। शिकायत में यह भी आशंका जताई गई कि कुछ हस्ताक्षर जाली हो सकते हैं।
किन धाराओं में दर्ज हुई एफआईआर?
प्राथमिकी में कहा गया है कि आरोपी पर आरोप है कि उसने सरकारी कर्मचारी के रूप में गलत सूचना दी, जिसका उद्देश्य किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाना था। उस पर जाली दस्तावेज तैयार करने और धोखाधड़ी के इरादे से साजिश में शामिल होने का भी आरोप लगाया गया है। पुलिस ने शिकायत के आधार पर यशवंतपुरा थाने में भारतीय न्याय संहिता की धारा 319(2), 336(2), 340(2), 61(2)(बी) और 217(बी) के तहत मामला दर्ज किया है।
पुलिस ने बताया कि इन धाराओं में प्रतिरूपण के जरिए धोखाधड़ी, जालसाजी, जाली दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को असली बताकर इस्तेमाल करने, आपराधिक साजिश और किसी अन्य व्यक्ति को नुकसान पहुंचाने के इरादे से सरकारी कर्मचारी को अपने वैध अधिकार का इस्तेमाल करने के लिए गलत सूचना देने से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। पुलिस के अनुसार, मामले की जांच की जा रही है।