{"_id":"69fb164025d9e8791f0e3c56","slug":"bengal-rail-projects-back-on-track-after-regime-change-railways-begins-preparations-2026-05-06","type":"story","status":"publish","title_hn":"Railways: सरकार बदलते ही ममता राज में रुकी रेल परियोजनाएं फिर पकड़ेगी रफ्तार? रेलवे ने शुरू कर कीं तैयारियां","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Railways: सरकार बदलते ही ममता राज में रुकी रेल परियोजनाएं फिर पकड़ेगी रफ्तार? रेलवे ने शुरू कर कीं तैयारियां
Wed, 06 May 2026 03:51 PM IST
Rahul Kumar
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Rahul Kumar
Updated Wed, 06 May 2026 03:51 PM IST
सार
जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों के कारण रुके कई अहम प्रोजेक्ट्स को अब तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। मंत्रालय जल्द ही नई राज्य सरकार को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध करेगा।
विज्ञापन
उत्तर-पश्चिम रेलवे
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव संपन्न हो गए हैं, इसमें भारतीय जनता पार्टी ने बड़ी जीत दर्ज की है। राज्य में सत्ता बदलने के साथ नई उम्मीदें भी सामने आ रही हैं। माना जा रहा है कि इससे भारतीय रेलवे के करीब एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाओं को गति मिल सकती है। ममता सरकार के दौरान कई अहम रेलवे परियोजनाएं जमीन अधिग्रहण की वजह से अटकी हुई थीं। अब नई सरकार बनने के बाद इन प्रोजेक्ट्स के आगे बढ़ने की उम्मीद बढ़ गई है।
रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों के कारण रुके कई अहम प्रोजेक्ट्स को अब तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। मंत्रालय जल्द ही नई राज्य सरकार को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध करेगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल में करीब 98,499 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं, जिन्हें राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास के लिए अहम माना जा रहा है।
राज्य में स्वीकृत रेलवे परियोजनाओं के लिए कुल 4,662 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, लेकिन अब तक सिर्फ 1,273 हेक्टेयर यानी करीब 27 प्रतिशत जमीन ही अधिग्रहित हो पाई है।भूमि अधिग्रहण को लेकर केंद्र और राज्य के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ था। लेकिन अब नई सरकार के गठन के बाद यह जमीन विवाद खत्म हो जाएंगे।
विज्ञापन
रेल मंत्रालय का कहना कि, राज्य की ममता सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा था। जबकि ममता बनर्जी की सरकार केंद्र पर पश्चिम बंगाल की अनदेखी का आरोप लगाती रही। भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण कम से कम 12 प्रमुख रेलवे परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें सबसे अहम सिवोक–रंगपो नई रेल लाइन है। जो पहली बार सिक्किम को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। इसके अलावा राज्य में 52 किलोमीटर लंबे चार मेट्रो कॉरिडोर पर काम चल रहा है। इनमें से करीब 20 किलोमीटर हिस्से का निर्माण जमीन अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग की समस्याओं के कारण रुका हुआ है।
देरी से प्रभावित परियोजनाओं में नवदीप घाट–नवद्वीप धाम नई लाइन (107 हेक्टेयर), कालियागंज–बुनियादपुर नई लाइन (168 हेक्टेयर), कैनिंग–बगनखाली नई लाइन (18 हेक्टेयर), रुकनी–अनारा रेल फ्लाईओवर (35 हेक्टेयर), गौरीनाथ धाम–पुरुलिया फ्लाईओवर (34 हेक्टेयर), कालिपहाड़ी–बख्तर नगर पांचवी लाइन (14 हेक्टेयर) और नैहाटी–रानाघाट तीसरी लाइन (13 हेक्टेयर) जैसी योजनाएं शामिल हैं।
विज्ञापन
रेल मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, जमीन अधिग्रहण से जुड़े विवादों के कारण रुके कई अहम प्रोजेक्ट्स को अब तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। मंत्रालय जल्द ही नई राज्य सरकार को पत्र लिखकर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने का अनुरोध करेगा। फिलहाल पश्चिम बंगाल में करीब 98,499 करोड़ रुपये की रेलवे परियोजनाएं चल रही हैं, जिन्हें राज्य के इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास के लिए अहम माना जा रहा है।
विज्ञापन
राज्य में स्वीकृत रेलवे परियोजनाओं के लिए कुल 4,662 हेक्टेयर जमीन की जरूरत है, लेकिन अब तक सिर्फ 1,273 हेक्टेयर यानी करीब 27 प्रतिशत जमीन ही अधिग्रहित हो पाई है।भूमि अधिग्रहण को लेकर केंद्र और राज्य के बीच लंबे समय से विवाद बना हुआ था। लेकिन अब नई सरकार के गठन के बाद यह जमीन विवाद खत्म हो जाएंगे।
विज्ञापन
रेल मंत्रालय का कहना कि, राज्य की ममता सरकार से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा था। जबकि ममता बनर्जी की सरकार केंद्र पर पश्चिम बंगाल की अनदेखी का आरोप लगाती रही। भूमि अधिग्रहण में देरी के कारण कम से कम 12 प्रमुख रेलवे परियोजनाएं प्रभावित हुई हैं। इनमें सबसे अहम सिवोक–रंगपो नई रेल लाइन है। जो पहली बार सिक्किम को भारतीय रेल नेटवर्क से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण परियोजना मानी जाती है। इसके अलावा राज्य में 52 किलोमीटर लंबे चार मेट्रो कॉरिडोर पर काम चल रहा है। इनमें से करीब 20 किलोमीटर हिस्से का निर्माण जमीन अधिग्रहण और यूटिलिटी शिफ्टिंग की समस्याओं के कारण रुका हुआ है।
देरी से प्रभावित परियोजनाओं में नवदीप घाट–नवद्वीप धाम नई लाइन (107 हेक्टेयर), कालियागंज–बुनियादपुर नई लाइन (168 हेक्टेयर), कैनिंग–बगनखाली नई लाइन (18 हेक्टेयर), रुकनी–अनारा रेल फ्लाईओवर (35 हेक्टेयर), गौरीनाथ धाम–पुरुलिया फ्लाईओवर (34 हेक्टेयर), कालिपहाड़ी–बख्तर नगर पांचवी लाइन (14 हेक्टेयर) और नैहाटी–रानाघाट तीसरी लाइन (13 हेक्टेयर) जैसी योजनाएं शामिल हैं।