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Bengal Panchayat Polls: पंचायत चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती पर फंसा पेंच! क्यों जोखिम में जवान?

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 07 Jul 2023 07:17 PM IST
सार

Bengal Panchayat Polls: फोर्स कोर्डिनेटर के पत्र के मुताबिक, हर बूथ पर एक जवान की तैनाती, सीएपीएफ की तैनाती के नियमों के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में पहले से ही हिंसा के अलर्ट मिल रहे हैं। वहां पर बूथ कैप्चरिंग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सीएपीएफ का अकेला एक जवान किसी तरह की कार्रवाई में सक्षम नहीं हो सकेगा...

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Bengal Panchayat Polls: hurdles on deployment of capf in panchayat elections! Why the jawans at risk?
Bengal Panchayat Polls - फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार

आठ जून को होने वाले पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती को लेकर बड़ी तनातनी हो गई है। एक तरफ कोलकाता हाई कोर्ट का आदेश है, तो दूसरी ओर केंद्रीय सुरक्षा बलों की अपर्याप्त संख्या होना है। बीएसएफ के आईजी एससी बुडाकोटी (फोर्स कोर्डिनेटर) ने इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय की पुलिस डिवीजन 2, आईजी ऑपरेशन (सीआरपीएफ) और 2आईसी (जी) गृह मंत्रालय को पांच जुलाई को लिखे पत्र में स्थिति स्पष्ट कर दी है। फोर्स कोर्डिनेटर ने उक्त अधिकारियों से उस आदेश पर दोबारा से विचार करने का आग्रह किया है, जिसमें पंचायत चुनाव के लिए तैयार 61636 पोलिंग बूथों पर केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की बात कही है। हालांकि इनमें से 528 बूथ ऐसे हैं, जहां पर मतदान नहीं होता है। बाकी बचे बूथों पर सीएपीएफ की तैनाती की बात करें, तो हर एक बूथ पर मुश्किल से एक सीएपीएफ जवान तैनात नहीं हो सकेगा। अगर एक जवान को तैनात करते हैं तो इसका मतलब उसकी जान को जोखिम में डालना है।

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यह भी पढ़ें: West Bengal Panchayat Polls: हिंसा के बीच पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव कल, भाजपा उम्मीदवार पर जानलेवा हमला

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फोर्स कोर्डिनेटर के पत्र के मुताबिक, हर बूथ पर एक जवान की तैनाती, सीएपीएफ की तैनाती के नियमों के खिलाफ है। पश्चिम बंगाल के पंचायत चुनाव में पहले से ही हिंसा के अलर्ट मिल रहे हैं। वहां पर बूथ कैप्चरिंग होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में सीएपीएफ का अकेला एक जवान किसी तरह की कार्रवाई में सक्षम नहीं हो सकेगा। वजह, वहां पर लोगों की भीड़ हमला कर सकती है। इस कारण हर बूथ पर एक सीएपीएफ जवान रहे, इस पर दोबारा से विचार किया जाए। मौजूदा समय में सीएपीएफ की 822 कंपनी बंगाल में भेजी गई हैं। नियमानुसार एक कंपनी में जवानों की संख्या 100 से 120 तक रहती है, लेकिन ड्यूटी का ग्राफ देखें तो वह संख्या 70 के आसपास ही रहती है। ऐसे में सीएपीएफ के कुल जवानों की संख्या भी लगभग 57 हजार ही रहेगी। एक बूथ पर एक जवान, यह संभव नहीं है। एक बूथ पर कम से कम चार पांच जवान होने चाहिए। हालांकि इसके बाद सरकार ने अतिरिक्त 485 कंपनियों को बंगाल भेजने की बात कही थी, लेकिन अभी तक उनकी तैनाती को लेकर कुछ स्पष्ट नहीं है। अभी तक किसी भी राज्य में केंद्रीय बलों की इतनी भारी तैनाती देखने को नहीं मिली है।

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केंद्रीय बलों की तैनाती का जो मापदंड तय किया गया है, उसके मुताबिक एक बूथ परिसर में सुरक्षा बल का आधा सेक्शन होना चाहिए। बता दें कि एक सेक्शन में कहीं पर तीन से पांच तो कहीं पांच से सात जवान होते हैं। किसी परिसर में दो बूथ हैं, तो वहां भी आधा सेक्शन तैनात हो। तीन से चार बूथ वाले परिसर में एक सेक्शन रहे। पांच से छह बूथ वाले परिसर में डेढ़ सेक्शन हो। सात या इससे ज्यादा बूथों वाले परिसर में दो सेक्शन होने चाहिए। मतदान के बाद स्ट्रॉन्ग रूम पर एक कंपनी तैनात रहेगी। बंगाल में भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी सहित कई लोगों ने हाई कोर्ट में अपील की थी कि पंचायत चुनाव में केंद्रीय बलों की तैनाती हो। कम से कम हर बूथ पर एक सीएपीएफ जवान रहे। हाई कोर्ट ने भी उस अपील को स्वीकार लिया और संबंधित अथॉरिटी को आदेश जारी कर दिया। अब केंद्रीय सुरक्षा बलों के सामने एक बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। जवानों की अपर्याप्त संख्या के चलते हर बूथ पर एक जवान तैनात नहीं किया जा सकता। अगर एक जवान तैनात होता भी है, तो उसकी जान को जोखिम होगा।

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