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West Bengal: केंद्र ने भेजे 1.17 लाख करोड़, कहां खर्च हुए? राज्यपाल बोस ने सीएम ममता बनर्जी से मांगा हिसाब

Tue, 01 Oct 2024 04:12 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: बशु जैन Updated Tue, 01 Oct 2024 04:12 PM IST
सार

राज्यपाल बोस को जानकारी मिली है कि राज्य सरकार ने सांवधानिक दायित्व का उल्लंघन करते हुए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की कई रिपोर्टें विधानसभा में पेश नहीं की हैं। 

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Bengal Guv Bose asks Mamata to furnish details of state's spending of Rs 1.17 lakh cr central funds
सीवी आनंद बोस - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखकर केंद्र सरकार की ओर से मिले बजट को खर्च करने का हिसाब मांगा है। उन्होंने पत्र में कहा है उनकी सरकार रिपोर्ट दाखिल करे कि केंद्र सरकार की ओर से वित्तीय वर्ष 2023-24 में मिले 1.17 लाख करोड़ रुपये कहां खर्च किए गए? इसका उपयोग किन योजनाओं में किया गया?

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राजभवन के एक अधिकारी के मुताबिक राज्यपाल बोस को जानकारी मिली है कि राज्य सरकार ने सांवधानिक दायित्व का उल्लंघन करते हुए नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की कई रिपोर्टें विधानसभा में पेश नहीं की हैं। पत्र में लिखा गया है कि पश्चिम बंगाल सरकार को वित्तीय वर्ष 2023-24 में 1.17 लाख करोड़ रुपये की केंद्रीय निधि आवंटित की गई थी। इस निधि का दुरुपयोग किए जाने के आरोप लगाए गए हैं।  
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पत्र में राज्यपाल बोस ने कुछ मुद्दों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य में 2018-19 में राजकोषीय घाटा लगभग 33,500 करोड़ रुपये था। जो 2022-23 में बढ़कर लगभग 49,000 करोड़ रुपये हो गया। जबकि जीएसडीपी-ऋण अनुपात 35.69 प्रतिशत से बढ़कर 37 प्रतिशत से अधिक हो गया।
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बोस ने यह भी कहा कि सार्वजनिक ऋण प्राप्तियों के एक महत्वपूर्ण हिस्से का राज्य सरकार ने 2021-22 से 2022-23 तक ऋण भुगतान के लिए उपयोग किया। पत्र में लिखा गया कि पश्चिम बंगाल सरकार को भी वित्त आयोग से भारी लाभ हुआ है। 2023-24 में पश्चिम बंगाल के कुल राजस्व 2.13 लाख करोड़ रुपये में से अकेले केंद्रीय हस्तांतरण 1.17 लाख करोड़ रुपये था, जो राज्य के कुल राजस्व का लगभग 55 प्रतिशत था।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल सरकार ने सीएजी की छह ऑडिट रिपोर्ट अभी तक विधानसभा में पेश नहीं की हैं। बोस ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 151 में प्रावधान का भी उल्लेख किया है। इसके तहत राज्य के खातों से संबंधित सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपी जाएगी, जो उन्हें विधानसभा के समक्ष रखवाएगा।


बोस ने कहा कि नियम में यह भी सुझाव दिया गया है कि राज्य सरकार को कार्रवाई शुरू करने की जरूरत है ताकि सीएजी रिपोर्ट विधानसभा में पेश की जा सके। राज्यपाल ने राज्य सरकार से राजकोषीय विवेक और पारदर्शिता सुनिश्चित करने, इसे कैबिनेट के समक्ष रखने और राजकोषीय स्थिति पर एक श्वेत पत्र जारी करने के लिए भी कहा है। 

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