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RG कर मामले में शुभेंदु सरकार की बड़ी कार्रवाई: तीन IPS अधिकारी निलंबित, ममता बनर्जी की भूमिका की होगी जांच
Fri, 15 May 2026 03:44 PM IST
Rahul Kumar
अमर उजाला, ब्यूरो, कोलकाता।
अमर उजाला, ब्यूरो, कोलकाता।
Published by: Rahul Kumar
Updated Fri, 15 May 2026 03:44 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल सरकार ने शुक्रवार को आरजी कर अस्पताल दुष्कर्म और हत्या केस की शुरुआती जांच में कथित लापरवाही को लेकर तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
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शुभेंदु सरकार का बड़ा फैसला।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार आने के बाद से मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ताबड़-तोड़ फैसले ले रहे हैं। शुक्रवार को बंगाल सरकार ने आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला डॉक्टर से दुष्कर्म और हत्या मामले में बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए तीन आईपीएस अधिकारियों को निलंबित कर दिया है।
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ममता बनर्जी की भूमिका की भी होगी जांच
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार को नवान्न में इसकी घोषणा करते हुए कहा कि मामले की फाइल दोबारा खोली जाएगी और तत्कालीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की विभागीय जांच कराई जाएगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि उस समय की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की भूमिका की भी जांच के दायरे में समीक्षा की जाएगी।
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निलंबित किए गए अधिकारियों में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत गोयल, तत्कालीन डीसी (नॉर्थ) अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन डीसी (सेंट्रल) इंदिरा मुखोपाध्याय शामिल हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आरजी कर कांड के दौरान मामले को संभालने में गंभीर लापरवाही और प्रक्रियागत चूक के आरोप सामने आए हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा, गृह मंत्री के रूप में जिम्मेदारी संभालने के बाद मैंने मुख्य सचिव और गृह सचिव से आरजी कर मामले और उसके बाद की परिस्थितियों पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। तथ्य सामने आने के बाद सरकार ने प्रारंभिक प्रशासनिक कार्रवाई का फैसला लिया है।
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सीबीआई की आपराधिक जांच में राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी
उन्होंने आरोप लगाया कि मामले में एफआईआर दर्ज करने और शुरुआती कार्रवाई में गंभीर गड़बड़ियां हुईं। मुख्यमंत्री के मुताबिक, मीडिया रिपोर्टों से यह भी जानकारी मिली थी कि पीड़िता की मां को राज्य सरकार की ओर से पैसे देने की कोशिश की गई थी, जिसकी जांच कराई जाएगी। शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए जिन अधिकारियों पर आरोप हैं, उन्हें जांच प्रक्रिया से अलग रखा जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सीबीआई की आपराधिक जांच में राज्य सरकार हस्तक्षेप नहीं करेगी, लेकिन राज्य पुलिस की भूमिका की अलग से समीक्षा होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, उस समय किन अधिकारियों ने किससे बातचीत की, कॉल डिटेल, व्हाट्सएप चैट और निर्देशों की जांच की जाएगी। यह भी देखा जाएगा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री या किसी मंत्री से कोई निर्देश आया था या नहीं। उन्होंने एक महिला डीसी के प्रेस कॉन्फ्रेंस का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय उनकी बॉडी लैंग्वेज और बयान राज्य के लिए सुखद नहीं थे। मुख्यमंत्री के अनुसार, वह अधिकारी आधिकारिक रूप से कोलकाता पुलिस या गृह विभाग की प्रवक्ता नहीं थीं, इसलिए यह भी जांच का विषय होगा कि उन्हें सार्वजनिक बयान देने की जिम्मेदारी किसने दी थी।
गौरतलब है कि अगस्त 2024 में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में महिला चिकित्सक से दुष्कर्म और हत्या की घटना के बाद राज्यभर में व्यापक विरोध प्रदर्शन हुए थे। जूनियर डॉक्टरों के आंदोलन और बढ़ते दबाव के बीच तत्कालीन पुलिस आयुक्त विनीत गोयल को बाद में कोलकाता पुलिस से हटाकर एसटीएफ में स्थानांतरित किया गया था। वर्तमान में विनीत गोयल डीजी (आईबी), अभिषेक गुप्ता (डीआईजी) ईएफआर में कमांडेंट और इंदिरा मुखोपाध्याय सीआईडी में विशेष अधीक्षक के पद पर कार्यरत हैं।
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अगस्त 2024 में मिला था महिला डॉक्टर का शव
गौरतलब है कि 9 अगस्त 2024 को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर का शव बरामद हुआ था। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था। मामले के अगले ही दिन कोलकाता पुलिस ने सिविक वॉलंटियर संजय रॉय को गिरफ्तार किया था। बाद में कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश पर मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। लंबी जांच और सुनवाई के बाद 18 जनवरी 2025 को सियालदह कोर्ट ने आरोपी संजय रॉय को दोषी करार दिया। इसके बाद 20 जनवरी 2025 को जज अनिर्बाण दास ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई।