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बंगाल हिंसा मामला: ममता सरकार का बड़ा फैसला, एसआईटी जांच में मदद के लिए की 10 वरिष्ठ आईपीएस की नियुक्ति

Thu, 02 Sep 2021 02:13 PM IST
संजीव कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: संजीव कुमार झा Updated Thu, 02 Sep 2021 02:13 PM IST
सार

बंगाल सरकार ने राज्य में चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए गुरुवार को एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी की सहायता के लिए 10 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। 

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Bengal Govt appoints 10 senior IPS officers to assist SIT formed by Calcutta High Court to probe post poll violence in west bengal
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : पीटीआई

विस्तार

बंगाल सरकार ने राज्य में चुनाव बाद हिंसा की जांच के लिए गुरुवार को एक बड़ा फैसला लिया है। दरअसल सरकार ने कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा गठित एसआईटी की सहायता के लिए 10 वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति कर दी है। बता दें कि एसआईटी में पश्चिम बंगाल कैडर के तीन आईपीएस अधिकारी सुमन बाला साहू, सौमेन मित्रा और रणवीर कुमार शामिल हैं। वहीं हाईकोर्ट ने राज्य की सभी एजेंसियों को जांच के लिए सीबीआई और एसआईटी को सहयोग करने का भी निर्देश दिया था।

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वहीं इससे पहले  बुधवार को पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम के बाद हत्या और महिलाओं के साथ किए गए अपराधों की जांच सीबीआई को सौंपने के कलकत्ता हाईकोर्ट के फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। 
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जानकारी के मुताबिक, पश्चिम बंगाल सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) दाखिल कर दी है, लेकिन अभी सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री की ओर से इस याचिका का परीक्षण किया जा रहा है। परीक्षण का काम पूरा होने के बाद मामले को सूचीबद्ध किया जाएगा।
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कलकत्ता हाईकोर्ट ने सीबीआई को सौंपी थी जांच
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने 19 अगस्त के आदेश में कहा था कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग समिति की रिपोर्ट में बताए गए हत्या या महिलाओं से दुष्कर्म से संबंधित सभी मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए। हाईकोर्ट ने कहा था कि राज्य को मामलों के सभी रिकॉर्ड सीबीआई को सौंपनी चाहिए। साथ ही हाईकोर्ट ने एनएचआरसी समिति की रिपोर्ट में उल्लेखित अन्य सभी मामलों को जांच अदालत की निगरानी में विशेष जांच दल (एसआईटी) से कराने का निर्णय लिया था। 

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