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पश्चिम बंगाल: जूनियर डॉक्टर्स खत्म कर सकते हैं 'काम रोको' अभियान; मांगें पूरी नहीं हुईं तो अनशन करने की तैयारी
Fri, 04 Oct 2024 01:44 AM IST
राहुल कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: राहुल कुमार
Updated Fri, 04 Oct 2024 01:44 AM IST
सार
Bengal Doctors Strike: पिछले महीने राज्य द्वारा संचालित सागर दत्ता अस्पताल में एक मरीज के परिवार द्वारा चिकित्सकों पर हमला किए जाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 1 अक्टूबर को अपना 'काम बंद' आंदोलन फिर से शुरू कर दिया था। जिसके चलते राज्यभर में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
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ओपीडी में प्रदर्शन करते रेजिडेंट डॉक्टर
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में आंदोलनकारी जूनियर डॉक्टरों ने गुरुवार देर रात बैठक कर आंदोलन के भविष्य की रणनीति तय की। दरअसल वरिष्ठ चिकित्सकों के एक वर्ग ने जूनियर डॉक्टरों से आम मरीजों की परेशानियों को देखते हुए 'पूरी तरह काम बंद करने' के फैसले पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया था।
पिछले महीने राज्य द्वारा संचालित सागर दत्ता अस्पताल में एक मरीज के परिवार द्वारा चिकित्सकों पर हमला किए जाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 1 अक्टूबर को अपना 'काम बंद' आंदोलन फिर से शुरू कर दिया था। जिसके चलते राज्यभर में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
इस बीच खबर है कि प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टर्स शुक्रवार को अपना 'काम रोको' अभियान खत्म कर सकते हैं। वे जल्द ही सामान्य ड्यूटी भी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, आरजी कर अस्पताल में सहकर्मी महिला प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म-हत्या मामले में न्याय और अस्पतालों में बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार रात को शुरू शासी निकाय की बैठक आज सुबह संपन्न हुई। बैठक में कनिष्ठ चिकित्सकों ने शुक्रवार दोपहर एक रैली निकालने का फैसला किया। इस दौरान वे पूर्ण काम रोको अभियान वापस लेने की घोषणा कर सकते हैं। एक प्रदर्शनकारी चिकित्सक ने बताया कि आज सुबह शासी निकाय की बैठक हुई। हमने फिलहाल काम बंद रखने का फैसला किया है, लेकिन हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। हम जानते हैं कि बड़ी संख्या में मरीज हर दिन सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
चिकित्सक ने कहा कि दोपहर में हम एक रैली आयोजित करने की योजना बना रहे हैं और पूर्ण काम रोको अभियान को वापस लेने के बारे में अपने निर्णय की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांगों को लागू करने के संदर्भ में राज्य सरकार के लिए एक समय सीमा तय करने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद वे वादे पूरे होने तक अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
आज बैठक में हो सकता है अहम फैसला
आंदोलनकारी डॉक्टरों में से एक अनिकेत महतो ने कहा कि, हम शीघ्र ही आरजी कर अस्पताल में आम सभा की बैठक करेंगे। इसमें समय लग सकता है, लेकिन हम कल सुबह तक आपको अपने निर्णय से अवगत करा देंगे। आंदोलन कर रहे डॉक्टर से जब यह पूछा कि, क्या वे मरीजों की मौजूदा परेशानियों, बाढ़ की स्थिति और आगामी दुर्गा पूजा उत्सव के कारण आंदोलन को आंशिक रूप से वापस लेने पर विचार करेंगे? तो इस पर महतो ने जवाब दिया कि, हम हर चीज पर चर्चा करेंगे। हमें वर्तमान स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है क्योंकि सुरक्षा के लिए हमारी मांगों पर सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि, कई वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा ओपीडी जैसी सेवाओं को फिर से बहाल करने का अनुरोध किया है, जिस पर हम विचार कर रहे हैं, लेकिन "पूर्ण कार्य विराम" तब तक जारी रहेगा जब तक पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट औपचारिक रूप से अपने अगले कदम की घोषणा नहीं कर देता है।
वरिष्ठ डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू करने की अपील की थी
आरजी कर अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख वरिष्ठ डॉक्टर मैत्रेयी बंद्योपाध्याय ने कहा कि, हम सभी बलात्कार-हत्या की शिकार हुई महिला डॉक्टर के लिए न्याय चाहते हैं। मेरा सुझाव है कि जूनियर डॉक्टर आंशिक रूप से काम बंद कर दें और आपातकालीन और ओपीडी सेवाएं जारी रखें। आंदोलन और काम एक साथ जारी रह सकते हैं।
इससे पहले 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक साथी चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 41 दिनों तक पूर्ण रूप से काम बंद रखा था। राज्य के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने 21 सितंबर को अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी।
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पिछले महीने राज्य द्वारा संचालित सागर दत्ता अस्पताल में एक मरीज के परिवार द्वारा चिकित्सकों पर हमला किए जाने के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 1 अक्टूबर को अपना 'काम बंद' आंदोलन फिर से शुरू कर दिया था। जिसके चलते राज्यभर में चिकित्सा सेवाएं बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं।
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इस बीच खबर है कि प्रदर्शनकारी जूनियर डॉक्टर्स शुक्रवार को अपना 'काम रोको' अभियान खत्म कर सकते हैं। वे जल्द ही सामान्य ड्यूटी भी शुरू कर सकते हैं। हालांकि, आरजी कर अस्पताल में सहकर्मी महिला प्रशिक्षु चिकित्सक से दुष्कर्म-हत्या मामले में न्याय और अस्पतालों में बेहतर सुरक्षा उपायों की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा।
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सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार रात को शुरू शासी निकाय की बैठक आज सुबह संपन्न हुई। बैठक में कनिष्ठ चिकित्सकों ने शुक्रवार दोपहर एक रैली निकालने का फैसला किया। इस दौरान वे पूर्ण काम रोको अभियान वापस लेने की घोषणा कर सकते हैं। एक प्रदर्शनकारी चिकित्सक ने बताया कि आज सुबह शासी निकाय की बैठक हुई। हमने फिलहाल काम बंद रखने का फैसला किया है, लेकिन हमारा प्रदर्शन जारी रहेगा। हम जानते हैं कि बड़ी संख्या में मरीज हर दिन सरकारी अस्पतालों पर निर्भर रहते हैं।
चिकित्सक ने कहा कि दोपहर में हम एक रैली आयोजित करने की योजना बना रहे हैं और पूर्ण काम रोको अभियान को वापस लेने के बारे में अपने निर्णय की घोषणा कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वे उनकी मांगों को लागू करने के संदर्भ में राज्य सरकार के लिए एक समय सीमा तय करने की योजना बना रहे हैं, जिसके बाद वे वादे पूरे होने तक अनिश्चितकालीन अनशन शुरू करेंगे।
आज बैठक में हो सकता है अहम फैसला
आंदोलनकारी डॉक्टरों में से एक अनिकेत महतो ने कहा कि, हम शीघ्र ही आरजी कर अस्पताल में आम सभा की बैठक करेंगे। इसमें समय लग सकता है, लेकिन हम कल सुबह तक आपको अपने निर्णय से अवगत करा देंगे। आंदोलन कर रहे डॉक्टर से जब यह पूछा कि, क्या वे मरीजों की मौजूदा परेशानियों, बाढ़ की स्थिति और आगामी दुर्गा पूजा उत्सव के कारण आंदोलन को आंशिक रूप से वापस लेने पर विचार करेंगे? तो इस पर महतो ने जवाब दिया कि, हम हर चीज पर चर्चा करेंगे। हमें वर्तमान स्थिति का आकलन करने की आवश्यकता है क्योंकि सुरक्षा के लिए हमारी मांगों पर सरकार ने अभी तक ध्यान नहीं दिया है।
उन्होंने कहा कि, कई वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा ओपीडी जैसी सेवाओं को फिर से बहाल करने का अनुरोध किया है, जिस पर हम विचार कर रहे हैं, लेकिन "पूर्ण कार्य विराम" तब तक जारी रहेगा जब तक पश्चिम बंगाल जूनियर डॉक्टर्स फ्रंट औपचारिक रूप से अपने अगले कदम की घोषणा नहीं कर देता है।
वरिष्ठ डॉक्टरों ने ओपीडी शुरू करने की अपील की थी
आरजी कर अस्पताल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख वरिष्ठ डॉक्टर मैत्रेयी बंद्योपाध्याय ने कहा कि, हम सभी बलात्कार-हत्या की शिकार हुई महिला डॉक्टर के लिए न्याय चाहते हैं। मेरा सुझाव है कि जूनियर डॉक्टर आंशिक रूप से काम बंद कर दें और आपातकालीन और ओपीडी सेवाएं जारी रखें। आंदोलन और काम एक साथ जारी रह सकते हैं।
इससे पहले 9 अगस्त को आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक साथी चिकित्सक के साथ बलात्कार और हत्या की घटना के बाद जूनियर डॉक्टरों ने 41 दिनों तक पूर्ण रूप से काम बंद रखा था। राज्य के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद उन्होंने 21 सितंबर को अपनी हड़ताल समाप्त कर दी थी।