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बंगाल: एंटी-गुंडा बिल पर सस्पेंस बरकरार, सीएम शुभेंदु बोले- राष्ट्रपति ने नहीं लौटाया, गृह मंत्रालय में लंबित
Fri, 25 Sep 2026 10:40 PM IST
शिवम गर्ग
पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता
Published by: शिवम गर्ग
Updated Fri, 25 Sep 2026 10:40 PM IST
सार
शुभेंदु अधिकारी ने उन खबरों को खारिज किया है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बंगाल के एंटी-गुंडा बिल को पुनर्विचार के लिए लौटाया है। उन्होंने कहा कि बिल अभी गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन है और उन्हें राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने की उम्मीद है।
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बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी
- फोटो : Amar Ujala Graphics
विस्तार
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया है, जिनमें दावा किया गया था कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राज्य के एंटी-गुंडा बिल को कुछ प्रावधानों पर आपत्ति जताते हुए पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया है। शुभेंदु ने इसे 'फेक न्यूज' बताते हुए कहा कि बिल अभी राष्ट्रपति के पास पहुंचा ही नहीं है और केंद्रीय गृह मंत्रालय के पास विचाराधीन है।
शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार देर शाम राज्य सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बिल को लेकर सामने आई खबरों का कोई आधार नहीं है।
'यह फेक न्यूज है'
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह फेक न्यूज है। इसका कोई आधार नहीं है। बिल राष्ट्रपति तक पहुंचा ही नहीं है और अभी गृह मंत्रालय के पास विचार के लिए है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक क्रियाकलाप नियंत्रण विधेयक, 2026 पूरी तरह स्पष्ट है और उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी मिल जाएगी।
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इससे पहले मीडिया के एक वर्ग में ऐसी खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने बिल के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। कथित तौर पर यह प्रावधान केंद्र के मादक पदार्थ रोधी कानून से संभावित रूप से टकराव से जुड़ा था। शुभेंदु ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
जून में विधानसभा से पास हुआ था बिल
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने जून 2026 में पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक क्रियाकलाप नियंत्रण विधेयक, 2026 पारित किया था। यह कानून संगठित अपराध, जबरन वसूली, अवैध खनन, साइबर अपराध और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों से निपटने के लिए राज्य सरकार की शक्तियों का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था। बिल में 'एंटी-सोशल एक्टिविटी' और 'गुंडा' की परिभाषा तय करने के साथ-साथ निवारक हिरासत और कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति को किसी क्षेत्र या जिले में प्रवेश करने से रोकने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रपति की मंजूरी को लेकर क्या है स्थिति?
अगस्त में कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि बिल को राज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा गया है और राष्ट्रपति की मंजूरी अभी बाकी है। अदालत ने भी उस समय इसे राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित होने के कारण बिल के रूप में ही माना था। अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि बिल अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय के विचाराधीन है और राष्ट्रपति ने इसे पुनर्विचार के लिए वापस नहीं किया है।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकारी बिल के मुताबिक, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनाए रखना तथा असामाजिक गतिविधियों को रोकना और नियंत्रित करना है। इसमें संगठित असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं। बिल में संगठित अपराध के अलावा सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा, संपत्ति को गंभीर नुकसान और अवैध खनन जैसी गतिविधियों को भी दायरे में रखा गया है। अब इसकी आगे की स्थिति राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने पर स्पष्ट होगी।
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शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार देर शाम राज्य सचिवालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह जानकारी दी। उनके साथ वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। उन्होंने कहा कि बिल को लेकर सामने आई खबरों का कोई आधार नहीं है।
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'यह फेक न्यूज है'
शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह फेक न्यूज है। इसका कोई आधार नहीं है। बिल राष्ट्रपति तक पहुंचा ही नहीं है और अभी गृह मंत्रालय के पास विचार के लिए है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक क्रियाकलाप नियंत्रण विधेयक, 2026 पूरी तरह स्पष्ट है और उन्हें उम्मीद है कि राष्ट्रपति की ओर से इसे मंजूरी मिल जाएगी।
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इससे पहले मीडिया के एक वर्ग में ऐसी खबरें आई थीं कि राष्ट्रपति ने बिल के एक प्रावधान पर आपत्ति जताते हुए इसे राज्य सरकार को वापस भेज दिया है। कथित तौर पर यह प्रावधान केंद्र के मादक पदार्थ रोधी कानून से संभावित रूप से टकराव से जुड़ा था। शुभेंदु ने इस दावे को खारिज कर दिया है।
जून में विधानसभा से पास हुआ था बिल
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने जून 2026 में पश्चिम बंगाल लोक सुरक्षा एवं असामाजिक क्रियाकलाप नियंत्रण विधेयक, 2026 पारित किया था। यह कानून संगठित अपराध, जबरन वसूली, अवैध खनन, साइबर अपराध और सार्वजनिक व्यवस्था से जुड़ी गतिविधियों से निपटने के लिए राज्य सरकार की शक्तियों का दायरा बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया था। बिल में 'एंटी-सोशल एक्टिविटी' और 'गुंडा' की परिभाषा तय करने के साथ-साथ निवारक हिरासत और कुछ मामलों में संबंधित व्यक्ति को किसी क्षेत्र या जिले में प्रवेश करने से रोकने जैसे प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
राष्ट्रपति की मंजूरी को लेकर क्या है स्थिति?
अगस्त में कलकत्ता हाईकोर्ट में राज्य सरकार की ओर से कहा गया था कि बिल को राज्यपाल की मंजूरी के बाद राष्ट्रपति के पास भेजा गया है और राष्ट्रपति की मंजूरी अभी बाकी है। अदालत ने भी उस समय इसे राष्ट्रपति की मंजूरी लंबित होने के कारण बिल के रूप में ही माना था। अब मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का कहना है कि बिल अभी केंद्रीय गृह मंत्रालय के विचाराधीन है और राष्ट्रपति ने इसे पुनर्विचार के लिए वापस नहीं किया है।
बिल में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
सरकारी बिल के मुताबिक, प्रस्तावित कानून का उद्देश्य राज्य में सार्वजनिक सुरक्षा और शांति बनाए रखना तथा असामाजिक गतिविधियों को रोकना और नियंत्रित करना है। इसमें संगठित असामाजिक गतिविधियों से जुड़े लोगों के खिलाफ निवारक कार्रवाई के प्रावधान किए गए हैं। बिल में संगठित अपराध के अलावा सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा, संपत्ति को गंभीर नुकसान और अवैध खनन जैसी गतिविधियों को भी दायरे में रखा गया है। अब इसकी आगे की स्थिति राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया पूरी होने पर स्पष्ट होगी।