सुष्मिता देव का इस्तीफा: पूरब से लेकर उत्तर तक नहीं संभल रही कांग्रेस, कई बड़ी महिला नेताओं ने छोड़ा साथ
कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है सुष्मिता देव पार्टी छोड़ रही हैं इस बात की जानकारी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पहले से थी। क्योंकि असम के कई मुद्दों पर सुष्मिता देव ने पार्टी में अपना विरोध दर्ज कराया था...
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जिस असम में कभी कांग्रेस सीना ठोक कर कहती थी, इस राज्य में उनका सूरज कभी अस्त नहीं होगा। उसी राज्य में कांग्रेस के चमकते सितारे एक-एक कर पार्टी से अपना दामन छुड़ाने लगे। असम से लेकर उत्तर प्रदेश और चंडीगढ़ तक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष से लेकर राष्ट्रीय अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री जैसे अहम पद वाले पदाधिकारी भी पार्टी से किनारा कर दूसरी पार्टियों में जुगाड़ तलाशने लगे। पार्टी के अंदर मची भगदड़ पर वरिष्ठ नेता नेता मंथन करने की बजाए अपना दामन पाक साफ करने में लगे हैं।
सोमवार को अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष और असम से पूर्व सांसद सुष्मिता देव के पार्टी छोड़ने और तृणमूल कांग्रेस पार्टी ज्वाइन करने से हलचल मची हुई है। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का कहना है सुष्मिता देव पार्टी छोड़ रही हैं इस बात की जानकारी कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को पहले से थी। क्योंकि असम के कई मुद्दों पर सुष्मिता देव ने पार्टी में अपना विरोध दर्ज कराया था। कांग्रेस पार्टी के सूत्रों का यह तक कहना है कि उनकी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटों में टिकट के बंटवारे तक पर उनकी राय नहीं ली गई थी। ऐसे बहुत से मुद्दे थे जिसे लेकर सुष्मिता लंबे समय से परेशान थीं और आलाकमान से अपनी आपत्तियां दर्ज कराती रहीं। लेकिन हाल वही पुराने कांग्रेसी नेता और वर्तमान में असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिसवा सरमा जैसा ही हुआ। आलाकमान ने सुष्मिता देव की शिकायतों पर कोई तवज्जो नहीं दिया। नतीजतन देव ने इस्तीफा देकर तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया।
असम में कांग्रेस के लिए इस वक्त सबसे बड़ा राजनैतिक संकट बना हुआ है। एक तो सत्ता कांग्रेस को असम में नहीं मिली। ऊपर से कांग्रेस के बड़े नेताओं का लगातार पार्टी छोड़ना भी घातक साबित हो रहा है। पिछले महीने असम के जोरहाट विधानसभा से दो बार विधायक रहे और कद्दावर नेता सुशांत बोरगोहेन ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया। सुशांत का इस्तीफा असम कांग्रेस के लिए बड़ा झटका था। सुशांत ने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा। इसी तरीके से कांग्रेस के चार बार विधायक रहे रूप ज्योति कुर्मी ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ भारतीय जनता पार्टी का साथ पकड़ लिया। रूप ज्योति चाय बागानों और जनजातियों के लिए काम करने वाले कांग्रेस के बड़े और कद्दावर नेताओं में शुमार किए जाते थे। सिर्फ रूप ज्योति और सुशांत ही नहीं बल्कि असम चुनाव से पहले कई कांग्रेसी नेताओं ने भी भारतीय जनता पार्टी समेत दूसरी अन्य पार्टियों का दामन थाम लिया था। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिसवा सरमा के पार्टी छोड़ने के बाद कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार राज्य में गिरता रहा।
सिर्फ असम और उत्तर प्रदेश समेत दिल्ली ही नहीं बल्कि चंडीगढ़ में भी कांग्रेस में हलचल मची हुई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रहे प्रदीप छाबड़ा ने भी पार्टी से इस्तीफा देकर आम आदमी पार्टी का दामन थाम लिया। प्रदीप छाबड़ा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष और चंडीगढ़ के मेयर भी रहे हैं। पंजाब में कांग्रेस पार्टी के बीच लगी आग की तपिश केंद्र शासित राज्य चंडीगढ़ तक पहुंच चुकी है। चंडीगढ़ कांग्रेस के नेता ने बताया कि हालात यहां भी बहुत अच्छे नहीं हैं। जल्द ही पार्टी से कुछ और बड़े नाम इस्तीफा देने वाले हैं। कांग्रेस की इस मची भगदड़ में ही पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद भी अपना दामन छुड़ा कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। यह बात दीगर है कि जितिन प्रसाद को भारतीय जनता पार्टी में क्या मिला या नहीं लेकिन उनका अपनी पार्टी से मोहभंग होना ही कांग्रेस के लिए एक बड़ा संदेश था। क्योंकि जितिन प्रसाद समेत ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट जैसे युवा नेता कभी राहुल गांधी की पसंदीदा टीम के सदस्य हुआ करते थे।
अखिल भारतीय महिला कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के इस्तीफा देने से कांग्रेस में एक राजनैतिक धड़े ने इस बात को लेकर चर्चा शुरू कर दी है कि आखिर महिला नेताओं को कांग्रेस क्यों नहीं संभाल पा रही है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि सुष्मिता देव से पहले उत्तर प्रदेश की तेजतर्रार नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हेमवती नंदन बहुगुणा की बेटी रीता बहुगुणा जोशी ने भी कांग्रेस का दामन छोड़ दिया था। रीता बहुगुणा जोशी ने भारतीय जनता पार्टी ज्वाइन की और इस वक्त प्रयागराज से सांसद भी हैं। इससे पहले उत्तर प्रदेश कैबिनेट में मंत्री भी रहीं। रीता बहुगुणा जोशी की ही तरह कांग्रेस की तेज तर्रार नेता रही प्रियंका चतुर्वेदी ने भी पार्टी से पल्ला छुड़ा लिया। पार्टी के वरिष्ठ नेता का कहना है कि कांग्रेस की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वहां पर एक ग्रुप शीर्ष नेतृत्व के बहुत करीबी है और दूसरा शीर्ष नेतृत्व से उतना ही दूर। वह कहते हैं कुछ महीने पहले ही अहम राज्यों के चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार से पार्टी ने कोई सबक नहीं लिया। बल्कि अगले साल होने वाले पांच राज्यों के चुनाव में भी उसी तरीके के हालात फिर से बन रहे हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता का कहना है कि अगर पार्टी अभी भी ऐसे मामलों में अपना दखल नहीं देगी तो 2022 में होने वाले चुनाव तो दूर 2024 के चुनाव में भी उसकी भूमिका कोई खास रोल अदा करने वाली नहीं।
सुष्मिता देव के इस्तीफे के बाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं का ट्विटर वॉर शुरू हो गया। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल ने ट्वीट करके कहा कि इस्तीफा तो युवा दे रहे हैं जबकि बुजुर्गों के किए जाने वाले प्रयासों को नजरअंदाज किया जाता रहा है। सिर्फ कपिल सिब्बल ही नहीं बल्कि कार्ति चिदंबरम ने भी ट्वीट कर इस मामले को यूं ही छोड़ देना पार्टी के लिए बेहतर नहीं बताया। पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित ने भी पार्टी में मची भगदड़ पर तंज कसते हुए कहा कि शॉर्ट टर्म वाले अवसरवादी नेताओं को ज्यादा तवज्जो मिल रही है।