नोटबंदी ने वो कराया जो डरावने विज्ञापन नहीं करा पाए, सिगरेट की 40 फीसदी बिक्री घटी
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मौत को दावत देने वाले विज्ञापन वो नहीं करा पाए जो पीएम नरेंद्र मोदी के नोटबंदी के फैसले ने करा डाला। सिगरेट के पैकेट्स पर बड़ी तस्वीर के कैंसर वाले विज्ञापनों का असर लोगों पर नहीं पड़ा, लेकिन नोटबंदी के बाद से सिगरेट की बिक्री में गिरावट दर्ज की गई है।
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक नोटबंदी के फैसले के बाद से सिगरेट्स की 40 प्रतिशत बिक्री घटी है। शहर के पान और सिगरेट बिक्रेताओं की मानें तो इस फैसले पर उनके व्यवसाय पर बड़ा असर पड़ा है। सिगरेट की खपत बेहद कम हो गई है।
उनके रेगुलर सिगरेट उपभोक्ता सिगरेट लेने नहीं आ रहे हैं। शहर की टर्नर रोड पर पान की दुकान चलाने वाले किशन कुमार ने अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि नोटबंदी के फैसले के पहले चार दिन तक मैं एक भी सिगरेट बेच नहीं पाया। बाद से सेल में थोड़ा इजाफा हुआ। आज की तारीख में बात करूं तो अबतक मेरी सिगरेट की होने वाली सेल 40 प्रतिशत तक कम हो चुकी है।
मैने एक सप्ताह में एक भी सिगरेट नहीं पी
खबर के मुताबिक शहर की अलग-अलग कई पान और सिगरेट की दुकानों का दौरा करने पर पता चला कि फैसले का असर सिगरेट और पान-मसाले के व्यवसाय पर पड़ा है। ज्यादातर दुकानदारों ने यही कहा कि इसका बड़ा असर हमारी रोजाना की बिक्री पर पड़ा है। रोजाना की बिक्री घटकर आधी रह गई है।
राजपुर में एक छोटी सी दुकान चलाने वाले रोहन कुमार कहते हैं, कि उनके ज्यादातर ग्राहक सिगरेट के साथ अन्य तंबाकू उत्पाद उधार लेना चाहते थे, लेकिन ऐसा संभव नहीं था। बड़े दुकानदार हमें भी उधार सामान नहीं दे रहे हैं। ये एक बड़ा कारण है कि हमारी बिक्री घटी है।
वहीं कौलगढ़ के ललित बिष्ट कहते हैं कि वो काफी समय से सिगरेट छोड़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा था। नोटबंदी के फैसले के बाद खुले पैसों की कमी के चलते शुरुआत में मैने सिर्फ एक दिन में एक सिगरेट ही पी। बाद में मुझे महसूस हुआ कि मैं ये गलत आदत छोड़ सकता हूं। मैं खुश हूं कि मैने पिछले एक सप्ताह में एक भी सिगरेट नहीं पी है।